गेहूं की खेती में अधिक उत्पादन पाने के लिए केवल पौधों की बढ़वार ही नहीं, बल्कि बाली की लंबाई और उसमें दानों की संख्या बढ़ाना भी बेहद जरूरी होता है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इसके लिए गेहूं की फसल में एनपीके, फॉस्फोरस, पोटाश और बोरॉन का संतुलित और सही मात्रा में छिड़काव करना चाहिए। समय पर पोषक तत्व देने से गेहूं की बालियां मजबूत बनती हैं और दानों का भराव बेहतर होता है।
कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि गेहूं में दाना बनने की प्रक्रिया के लिए फॉस्फोरस और पोटाश अत्यंत महत्वपूर्ण पोषक तत्व हैं। इनकी पर्याप्त उपलब्धता से बाली की लंबाई बढ़ती है और प्रति बाली दानों की संख्या में भी इजाफा होता है। पोटाश पौधों को मजबूती देता है, जबकि फॉस्फोरस जड़ विकास और दाना भरने में सहायक होता है।
किसान गेहूं की फसल में एनपीके खाद के माध्यम से पोटाश और फॉस्फोरस की जरूरत पूरी कर सकते हैं। यह आसानी से उपलब्ध और किफायती विकल्प है। इसके साथ ही बोरॉन का छिड़काव भी लाभकारी माना जाता है। बोरॉन पर-परागण की प्रक्रिया को बेहतर बनाता है, जिससे फूलों में अधिक दाने बनने की संभावना बढ़ जाती है और बालियां पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं।
गेहूं की अधिक पैदावार के लिए इन सभी पोषक तत्वों को स्प्रे के माध्यम से देना अधिक प्रभावी होता है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि सही समय पर लिहोसिन, टैबूकोनाजोल, एनपीके और बोरॉन का छिड़काव करने से फसल की उत्पादकता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होती है।
किसान चाहें तो पोषक तत्वों को एक साथ मिलाकर या अलग-अलग छिड़काव कर सकते हैं। आमतौर पर एनपीके और बोरॉन को साथ में छिड़कने की सलाह दी जाती है, लेकिन घोल बनाते समय विशेष सावधानी जरूरी है। कई बार रसायनों को मिलाने पर घोल फट सकता है या उसका तापमान असामान्य (बहुत ठंडा या गर्म) हो सकता है, जिससे उसकी गुणवत्ता प्रभावित होती है और फसल को नुकसान पहुंच सकता है।
छिड़काव में इन बातों का रखें खास ध्यान: बोरॉन की बहुत अधिक मात्रा का प्रयोग न करें, क्योंकि यह कम मात्रा में भी प्रभावी होता है। किसी भी प्रकार के संयुक्त छिड़काव से पहले यह जांच अवश्य कर लें कि रसायनों को मिलाने से उनकी गुणवत्ता पर नकारात्मक असर तो नहीं पड़ रहा है। यदि घोल फट जाए या उसका तापमान बदल जाए, तो छिड़काव से पहले सतर्कता बरतना बेहद जरूरी है।
FAQs:
Q1. गेहूं में बोरॉन का छिड़काव कब करना चाहिए?
बालियां निकलने से पहले या शुरुआती फूल अवस्था में।
Q2. क्या एनपीके और बोरॉन साथ में छिड़क सकते हैं?
हां, लेकिन पहले घोल की संगतता (compatibility) जांच लें।
Q3. बोरॉन की कितनी मात्रा सुरक्षित है?
बोरॉन कम मात्रा में ही प्रभावी होता है, अधिक मात्रा नुकसानदायक हो सकती है।
Q4. फोलियर स्प्रे से उत्पादन कितना बढ़ सकता है?
सही समय और मात्रा में छिड़काव से 10–20% तक उत्पादन बढ़ सकता है।
Q5. Khetivyapar किसानों को क्या सलाह देता है?
संतुलित पोषण, सही समय पर छिड़काव और घोल बनाते समय पूरी सावधानी।