• होम
  • गेहूं की फसल को पाले से बचाने के 5 कारगर उपाय

गेहूं की फसल को पाले से बचाने के 5 कारगर उपाय

गेहूं की फसल पाले से बचाने के उपाय
गेहूं की फसल पाले से बचाने के उपाय

सर्दियों के मौसम में गेहूं की फसल को पाले से होने वाला नुकसान किसानों के लिए बड़ी चिंता का विषय होता है। तापमान में अचानक गिरावट पौधों की बढ़वार रोक सकती है और उपज पर सीधा असर डाल सकती है। ऐसे में समय रहते सही कृषि उपाय अपनाकर पाले के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है और बेहतर उत्पादन सुनिश्चित किया जा सकता है।

मौसम पूर्वानुमान के आधार पर करें तैयारी:

गेहूं की फसल को पाले से बचाने के लिए सबसे पहला कदम मौसम की जानकारी पर नजर रखना है। पाला पड़ने की संभावित तिथियों का पूर्वानुमान देखकर किसान पहले से ही सिंचाई, खाद प्रबंधन और अन्य सुरक्षात्मक उपायों की योजना बना सकते हैं। आवश्यकता पड़ने पर पौधों को ढकने या अन्य संरक्षण तकनीकों का भी सहारा लिया जा सकता है।

पाले से बचाव में सिंचाई का अहम रोल:

पाला पड़ने से पहले खेत में हल्की सिंचाई करना बेहद लाभकारी होता है। गीली मिट्टी सूखी मिट्टी की तुलना में अधिक गर्मी को संजोकर रखती है, जिससे फसल को ठंड से राहत मिलती है। यह उपाय खासतौर पर उन क्षेत्रों में प्रभावी होता है, जहां रात के समय तापमान शून्य के करीब पहुंच जाता है।

पाला-प्रतिरोधी किस्मों का करें चयन:

पाले के जोखिम को कम करने के लिए गेहूं की पाला-सहिष्णु किस्मों का चयन करना भी एक समझदारी भरा कदम है। इसके साथ-साथ संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाने से पौधों की जड़ें मजबूत होती हैं और उनकी ठंड सहने की क्षमता बढ़ती है। जिन खेतों में बुवाई से पहले कम खाद डाली गई हो, वहां सर्दियों से पहले पोषक तत्व देने से फसल की मजबूती बढ़ती है।

संतुलित उर्वरक से बढ़ेगी ठंड सहन क्षमता:

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार गेहूं की फसल को पाले से बचाने के लिए नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश का संतुलित उपयोग जरूरी है। विशेष रूप से फास्फोरस जड़ों के विकास, पानी और पोषक तत्वों के अवशोषण तथा ठंड सहन करने की क्षमता को बढ़ाता है। हालांकि, अधिक नाइट्रोजन देने से पौधे कमजोर और लंबे हो सकते हैं, जिससे पाले का असर बढ़ जाता है।

मल्चिंग से मिलेगी फसल को सुरक्षा:

पाले से बचाव का एक और प्रभावी तरीका मल्चिंग है। गेहूं के खेत में पुआल या सड़ी हुई जैविक खाद की परत बिछाने से मिट्टी का तापमान स्थिर रहता है और ठंड के तीखे प्रभाव से पौधे सुरक्षित रहते हैं। लगभग 3 सेंटीमीटर मोटी परत सबसे उपयुक्त मानी जाती है। जब गेहूं की बढ़वार रुक जाए, उस समय मल्च बिछाना लाभकारी होता है। वसंत ऋतु में पुनः बढ़वार शुरू होने से पहले इस परत को हटा देना चाहिए।
मल्चिंग से न केवल पाले से सुरक्षा मिलती है, बल्कि यह नाइट्रोजन का प्राकृतिक स्रोत भी बनती है। सामान्यतः प्रति एकड़ 500 से 800 किलोग्राम पुआल या जैविक पदार्थ उपयोग करने की सलाह दी जाती है। हालांकि, क्षारीय या अधिक लवणीय मिट्टी में इस विधि से बचना चाहिए।

पाले के समय यूरिया का प्रयोग न करें:

जब खेत में पाला या बर्फ जमी हो, उस समय यूरिया डालने से बचना चाहिए। इससे तापमान और गिर सकता है और छोटे पौधों को अतिरिक्त नुकसान हो सकता है।

सही तकनीक से मिलेगा बेहतर उत्पादन: इन सभी उपायों को अपनाकर किसान सर्दियों में गेहूं की फसल को पाले से होने वाले नुकसान से काफी हद तक बचा सकते हैं। समय पर सिंचाई, संतुलित पोषण, पाला-प्रतिरोधी किस्मों का चयन और मल्चिंग जैसी तकनीकें अपनाकर न केवल फसल सुरक्षित रहती है, बल्कि आने वाले मौसम में बेहतर और स्वस्थ पैदावार भी मिलती है।

FAQ – गेहूं की फसल को पाले से बचाने के उपाय:

Q1: पाले से बचाव के लिए सबसे महत्वपूर्ण कदम क्या है?
A1: सबसे पहले मौसम पूर्वानुमान पर नजर रखना और समय पर सिंचाई, मल्चिंग व पाला-प्रतिरोधी किस्मों का चयन करना जरूरी है।

Q2: पाले से पहले सिंचाई क्यों जरूरी है?
A2: गीली मिट्टी अधिक गर्मी संजोती है, जिससे फसल को ठंड से बचाव मिलता है।

Q3: मल्चिंग कब करनी चाहिए?
A3: गेहूं की बढ़वार रुकने के बाद और ठंड के मौसम में मल्चिंग करना लाभकारी होता है।

Q4: क्या पाले के समय यूरिया डालना सही है?
A4: नहीं, पाले के समय यूरिया डालने से तापमान और गिर सकता है और पौधों को नुकसान होता है।

Q5: पाला-प्रतिरोधी किस्में कहाँ मिल सकती हैं?
A5: आप अपने नजदीकी कृषि विभाग या Khetivyapar की वेबसाइट से पाला-प्रतिरोधी गेहूं की किस्मों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

लेटेस्ट
khetivyapar.com अब whatsapp चैनल पर भी उपलब्ध है। आज ही फॉलो करें और पाएं महत्वपूर्ण जानकारी WhatsApp चैनल से जुड़ें