केंद्र सरकार द्वारा मखाना बोर्ड के गठन के बाद बिहार के पूसा स्थित डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय में मखाना अनुसंधान एवं विकास केंद्र की स्थापना की गई है। इस केंद्र का उद्घाटन केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने किया।
यह केंद्र मखाना उत्पादक किसानों को उत्पादन तकनीक, उन्नत बीज, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और निर्यात जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करेगा। विश्वविद्यालय ने मखाना की पूरी वैल्यू चेन पर कार्य करने के लिए 17 वैज्ञानिकों की एक विशेष टीम गठित की है। उद्घाटन अवसर पर “मखाना अनुसंधान एवं विकास” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन भी किया गया, जिसमें देशभर के वैज्ञानिक, किसान और उद्यमी शामिल हुए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री रामनाथ ठाकुर ने कहा कि मखाना अब आम घरों से लेकर विशेष आयोजनों तक पसंदीदा खाद्य पदार्थ बन चुका है। विवाह समारोहों और अन्य कार्यक्रमों में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र की सरकार ने मखाना को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। संगोष्ठी में बिहार के विभिन्न जिलों के मखाना उत्पादक किसानों के साथ-साथ देश के प्रमुख कृषि वैज्ञानिकों और विद्यार्थियों ने भी भाग लिया।
मंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालय ने प्राकृतिक खेती, डिजिटल कृषि और दीक्षारंभ जैसे नवाचारों के माध्यम से देश को नई दिशा दी है। उन्होंने विश्वास जताया कि मखाना अनुसंधान के क्षेत्र में भी यह संस्थान अग्रणी भूमिका निभाएगा। उनके अनुसार, यह उत्कृष्ट केंद्र मखाना के उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने में अहम योगदान देगा, जिससे किसानों और उद्यमियों दोनों को लाभ होगा।
बागवानी आयुक्त डॉ. प्रभात कुमार ने विश्वविद्यालय के नेतृत्व और नवाचारों की सराहना करते हुए कहा कि यहां किए जा रहे कार्यों की चर्चा राष्ट्रीय स्तर पर हो रही है। उन्होंने वैज्ञानिकों से मिलकर संस्थान को और उत्कृष्ट बनाने का आह्वान किया। राष्ट्रीय संगोष्ठी को उन्होंने ज्ञान एवं अनुभव साझा करने का प्रभावी मंच बताया, जिससे मखाना उद्योग के लिए नए समाधान सामने आएंगे।
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पी. एस. पांडेय ने बताया कि मखाना से जुड़े अनुसंधान को गति देने के लिए 17 विशेषज्ञ वैज्ञानिकों की टीम बनाई गई है। इस टीम में कृषि वैज्ञानिकों के साथ कृषि अभियांत्रिकी, प्रबंधन, विपणन और विस्तार सेवाओं से जुड़े विशेषज्ञ भी शामिल हैं। यह टीम बीज उत्पादन, किसानों के प्रशिक्षण, आधुनिक कृषि यंत्रों के विकास, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और निर्यात जैसे सभी पहलुओं पर समन्वित रूप से कार्य करेगी, ताकि मखाना की पूरी मूल्य श्रृंखला को मजबूत किया जा सके।
उत्पादन दोगुना करने का लक्ष्य:
निदेशक अनुसंधान डॉ. ए. के. सिंह ने कहा कि यह केंद्र उन्नत अनुसंधान को बढ़ावा देगा, जिसमें किस्म सुधार, उन्नत उत्पादन तकनीक और फसल कटाई के बाद प्रबंधन जैसे विषय शामिल होंगे। इससे मखाना की गुणवत्ता और उपज में वृद्धि होगी तथा किसानों की आय में सुधार होगा। उन्होंने बताया कि कुलपति ने मखाना की उत्पादकता को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए सभी वैज्ञानिकों को समन्वित और निरंतर प्रयास करने होंगे।
FAQs:
Q1. मखाना अनुसंधान एवं विकास केंद्र कहाँ स्थापित किया गया है?
उत्तर: यह केंद्र Dr. Rajendra Prasad Central Agricultural University, पूसा (बिहार) में स्थापित किया गया है।
Q2. इस केंद्र का उद्घाटन किसने किया?
उत्तर: केंद्रीय राज्य मंत्री Ramnath Thakur ने इसका उद्घाटन किया।
Q3. किसानों को इस केंद्र से क्या लाभ मिलेगा?
उत्तर: किसानों को उन्नत बीज, उत्पादन तकनीक, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और निर्यात संबंधी प्रशिक्षण मिलेगा।
Q4. कितने वैज्ञानिकों की टीम बनाई गई है?
उत्तर: मखाना अनुसंधान के लिए 17 विशेषज्ञ वैज्ञानिकों की टीम गठित की गई है।
Q5. इस केंद्र का मुख्य लक्ष्य क्या है?
उत्तर: मखाना की उत्पादकता दोगुनी करना और किसानों की आय बढ़ाना इसका मुख्य लक्ष्य है।