भारत में रंगों का सबसे बड़ा त्योहार Holi का है, जो वर्ष 2026 में पूरे उत्साह के साथ मनाया जाएगा। परंपरा के अनुसार यह पर्व फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। वर्ष 2026 में इस साल होलिका दहन 3 मार्च को और 4 मार्च को रंग वाली होली खेली जाएगी। यह पर्व केवल सामाजिक मेल-मिलाप और खुशियों का प्रतीक नहीं है, बल्कि किसानों के लिए नई फसल, नई उम्मीद और नई शुरुआत का भी संकेत देता है।
फाल्गुन का महीना कृषि के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। इस समय मौसम में हल्की गर्माहट शुरू हो जाती है, जिससे ग्रीष्मकालीन फसलों की बुवाई का अनुकूल समय होता है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार इस अवधि में मूंग, सूरजमुखी, मक्का और तरबूज-खरबूजे जैसी फसलों की बुवाई लाभदायक हो सकती है। सब्जियों में भिंडी, लौकी, करेला और खीरा की खेती भी किसानों को अच्छा मुनाफा दे सकती है। जिन क्षेत्रों में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है, वहां ग्रीष्मकालीन मक्का और दलहन फसलें बेहतर उत्पादन दे सकती हैं।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार वर्ष 2026 की होली कई राशियों के लिए शुभ संकेत लेकर आ रही है। मेष, सिंह और तुला राशि वालों के लिए नए कार्यों की शुरुआत का समय अनुकूल बताया जा रहा है। वहीं वृश्चिक और मकर राशि के जातकों को भूमि और निवेश से जुड़े मामलों में लाभ मिल सकता है। हालांकि विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि कोई भी बड़ा आर्थिक निर्णय सोच-समझकर ही लें। आइए जानते हैं राशि अनुसार कृषि विशेष भविष्यफल:
FAQs:
1. Holi 2026 कब है?
Holi 2026 में होलिका दहन 3 मार्च और रंग वाली होली 4 मार्च को मनाई जाएगी।
2. फाल्गुन में कौन-सी फसल बोना लाभदायक है?
मूंग, मक्का, सूरजमुखी और तरबूज-खरबूजे की ग्रीष्मकालीन फसल लाभदायक रहती है।
3. क्या होली के समय खेती की नई शुरुआत शुभ मानी जाती है?
हाँ, ज्योतिष मान्यता के अनुसार यह समय नई शुरुआत के लिए अनुकूल है।
4. सिंचाई सुविधा होने पर कौन-सी फसल बेहतर है?
ग्रीष्मकालीन मक्का और दलहन फसलें बेहतर उत्पादन देती हैं।
5. किसानों को Holi 2026 पर क्या ध्यान रखना चाहिए?
मौसम, बीज चयन, फसल बीमा और सरकारी योजना का लाभ लेना जरूरी है।