किसानों के लिए अच्छी खबर है। राज्य सरकार ने एकीकृत बागवानी विकास मिशन (MIDH) के तहत कम लागत/छोटे पैमाने पर मशरूम उत्पादन इकाई (वित्तीय वर्ष 2025-26) के लिए ऑनलाइन आवेदन शुरू कर दिए हैं। इस योजना का उद्देश्य किसानों को मशरूम उत्पादन के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाना और अतिरिक्त आमदनी का स्रोत उपलब्ध कराना है।
सरकार ने बताया है कि यह योजना राज्य के 28 जिलों में लागू की जाएगी, जिनमें औरंगाबाद, बेगूसराय, भागलपुर, भोजपुर, बक्सर, दरभंगा, गया, पूर्वी चंपारण, जमुई, जहानाबाद, कैमूर, कटिहार, खगड़िया, किशनगंज, लखीसराय, मुजफ्फरपुर, नालंदा, नवादा, पटना, पूर्णिया, रोहतास, समस्तीपुर, सरन, शेखपुरा, सीतामढ़ी, सिवान, वैशाली और पश्चिम चंपारण शामिल हैं। राज्य सरकार का कहना है कि इस योजना के माध्यम से ग्रामीण युवाओं और किसानों को मशरूम उत्पादन जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों की ओर आकर्षित किया जाएगा।
मशरूम उत्पादन इकाई की कुल लागत ₹2 लाख प्रति यूनिट तय की गई है। सरकार किसानों को 50% यानी ₹1 लाख प्रति यूनिट की सब्सिडी देगी।
यह इकाई 200 वर्गफीट क्षेत्रफल में बनाई जाएगी।
किसान अधिकतम 5 यूनिट तक का लाभ ले सकेंगे।
प्रशिक्षण अनिवार्य, तभी मिलेगा लाभ:
योजना के तहत आवेदन करने वाले किसानों के लिए यह जरूरी है कि उन्होंने मशरूम उत्पादन का कम से कम 2 दिनों का प्रशिक्षण प्राप्त किया हो।
इसके अलावा, किसान का DBT पोर्टल पर पंजीकरण भी अनिवार्य किया गया है, ताकि अनुदान की राशि सीधे उनके बैंक खाते में हस्तांतरित की जा सके।
आवेदन प्रक्रिया और भुगतान व्यवस्था:
मशरूम यूनिट की स्थापना से पहले प्रखंड उद्यान पदाधिकारी द्वारा स्थल निरीक्षण और अनुशंसा की जाएगी।
इसके बाद पात्र किसानों को एकमुश्त अनुदान राशि उनके बैंक खाते में DBT के माध्यम से प्रदान की जाएगी।
आवेदन करने से पहले किसान अपने DBT पंजीकृत बैंक खाते की जानकारी की जांच अवश्य कर लें, ताकि भुगतान में किसी प्रकार की दिक्कत न हो।
आत्मनिर्भर किसान बनने की दिशा में बड़ा कदम:
राज्य सरकार का मानना है कि यह योजना किसानों को मशरूम उत्पादन जैसी आधुनिक कृषि गतिविधियों से जोड़कर आय दोगुनी करने में मदद करेगी। कम लागत, उच्च मुनाफा और सरकारी अनुदान इन तीनों के संयोजन से यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देने में सहायक साबित हो सकती है।
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