मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक में विपणन सत्र 2026-27 के लिए कच्चे जूट के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को मंजूरी दे दी गई है। सरकार के इस फैसले से जूट उत्पादक किसानों को बेहतर मूल्य सुरक्षा मिलने की उम्मीद है।
सरकार ने 2026-27 सीजन के लिए टीडी-3 ग्रेड के कच्चे जूट का एमएसपी 5,925 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। यह मूल्य जूट की अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत पर 61.8 प्रतिशत का लाभ सुनिश्चित करता है। यह निर्णय वर्ष 2018-19 के बजट में घोषित उस सिद्धांत के अनुरूप है, जिसके तहत एमएसपी को उत्पादन लागत के कम से कम 1.5 गुना पर निर्धारित किया जाता है।
नए विपणन सत्र के लिए घोषित एमएसपी, 2025-26 की तुलना में 275 रुपये प्रति क्विंटल अधिक है। यदि दीर्घकालिक दृष्टि से देखें तो वर्ष 2014-15 में कच्चे जूट का एमएसपी 2,400 रुपये प्रति क्विंटल था, जो अब बढ़कर 5,925 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। यानी पिछले वर्षों में इसमें 3,525 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि दर्ज की गई है, जो लगभग ढाई गुना बढ़ोतरी को दर्शाती है।
आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2014-15 से 2025-26 के बीच जूट किसानों को एमएसपी के रूप में कुल 1,342 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया, जबकि 2004-05 से 2013-14 के दौरान यह राशि 441 करोड़ रुपये थी। इससे स्पष्ट है कि हाल के वर्षों में जूट उत्पादकों को अधिक वित्तीय समर्थन मिला है।
मूल्य समर्थन संचालन की जिम्मेदारी: भारतीय जूट निगम (जेसीआई) मूल्य समर्थन संचालन के लिए केंद्र सरकार की नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करता रहेगा। इन परिचालनों में होने वाले किसी भी वित्तीय नुकसान की भरपाई पूरी तरह केंद्र सरकार द्वारा की जाएगी। सरकार का यह फैसला जूट किसानों की आय स्थिर रखने और उन्हें बाजार में उचित मूल्य दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
FAQs:
1. विपणन सत्र 2026-27 के लिए कच्चे जूट का एमएसपी कितना है?
टीडी-3 ग्रेड के कच्चे जूट का एमएसपी 5,925 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है।
2. उत्पादन लागत पर किसानों को कितना लाभ मिलेगा?
सरकार ने उत्पादन लागत पर 61.8% का लाभ सुनिश्चित किया है।
3. पिछले वर्ष की तुलना में एमएसपी में कितनी बढ़ोतरी हुई है?
2025-26 की तुलना में 275 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है।
4. एमएसपी पर खरीद की जिम्मेदारी किसकी है?
भारतीय जूट निगम (जेसीआई) मूल्य समर्थन संचालन की नोडल एजेंसी है।
5. क्या एमएसपी उत्पादन लागत के 1.5 गुना के सिद्धांत पर आधारित है?
हाँ, यह निर्णय 2018-19 के बजट में घोषित 1.5 गुना लागत सिद्धांत के अनुरूप है।