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रेशम की खेती से मालामाल हो रही महिलाएं, 42 बनीं 'लखपति दीदी', आप भी जानें कैसे!

रेशम उत्पादन
रेशम उत्पादन

कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री दिलीप जायसवाल ने कहा है कि प्रदेश में रेशम उत्पादन को बढ़ावा देकर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि बीते दो वर्षों में रेशम संचालनालय द्वारा निजी क्षेत्र में 231 एकड़ तथा शासकीय रेशम केंद्रों पर 200 एकड़ क्षेत्र में नवीन मलबरी पौधरोपण किया गया है। इसके माध्यम से प्रदेश के 3,600 मलबरी और 850 टसर कोकून उत्पादक किसानों को स्व-रोजगार से जोड़ा गया है।

रेशम उद्योग से 42 महिलाएं बनीं ‘लखपति दीदी:

राज्यमंत्री श्री जायसवाल ने जानकारी दी कि पिछले दो वर्षों में प्रदेश में 2.64 लाख किलोग्राम मलबरी कोकून तथा 31.51 लाख टसर कोकून का उत्पादन किया गया है। इस दौरान करीब 5,000 किसानों को नवीन कोकून उत्पादन तकनीकों का प्रशिक्षण देकर उनकी उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। उन्होंने बताया कि अब तक 42 महिलाओं को रेशम उत्पादन के माध्यम से ‘लखपति दीदी’ के रूप में चिन्हांकित किया गया है, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

उत्पादन बढ़ाने के लिए तय किए गए लक्ष्य:

राज्यमंत्री ने कहा कि आगामी तीन वर्षों में मलबरी कोकून उत्पादन को वर्तमान 1.50 लाख किलोग्राम से बढ़ाकर 4 लाख किलोग्राम तक ले जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वहीं, टसर कोकून उत्पादन को 40 लाख से बढ़ाकर 70 लाख तक करने की योजना है। इसके साथ ही मलबरी पौधरोपण के क्षेत्र में अतिरिक्त 3,500 एकड़ की वृद्धि की जाएगी।
उन्होंने बताया कि पचमढ़ी (जिला नर्मदापुरम) में रेशम इंटरप्रिटेशन सेंटर की शुरुआत की जाएगी। रेशम उत्पादों के विपणन के लिए ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से बिक्री शुरू की जाएगी। इसके अलावा ग्वालियर, जबलपुर और इंदौर में नए प्राकृतिक रेशम शोरूम भी प्रारंभ किए जाएंगे।

‘रेशम समृद्धि’ कार्य-योजना पर होगा फोकस:

राज्यमंत्री श्री जायसवाल ने बताया कि ‘रेशम समृद्धि कार्य-योजना’ के अंतर्गत आगामी तीन वर्षों में 6,200 हितग्राहियों को कौशल उन्नयन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रदेश में 150 एकड़ क्षेत्र में मलबरी पौधरोपण के लिए नर्सरी विकसित की जाएगी। साथ ही 3,500 एकड़ में नया मलबरी पौधरोपण और 16 नई बीज इकाइयों की स्थापना की जाएगी।

FAQ - रेशम उत्पादन और लखपति दीदी:

1. लखपति दीदी क्या है?
लखपति दीदी रेशम उत्पादन में सफलता पाने वाली महिलाएं हैं जिन्होंने कोकून उत्पादन से लाखों की आमदनी हासिल की है।

2. मलबरी और टसर कोकून में क्या अंतर है?
मलबरी और टसर दो प्रकार के रेशम कीट हैं जिनसे रेशम का उत्पादन होता है। मलबरी कोकून अधिक महीन और उच्च गुणवत्ता का रेशम देता है।

3. रेशम उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार की क्या योजना है?
सरकार ने ‘रेशम समृद्धि कार्य-योजना’ शुरू की है, जिसमें कौशल विकास, नर्सरी स्थापना, और पौधरोपण क्षेत्र विस्तार शामिल हैं।

4. किस तरह से महिलाएं लखपति दीदी बन सकती हैं?
सरकार द्वारा प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और विपणन सुविधा प्रदान कर महिलाएं कोकून उत्पादन में सफलता पा सकती हैं।

5. Khetivyapar ब्रांड का रेशम उत्पादन में क्या योगदान है?
Khetivyapar ग्रामीण किसानों और महिलाओं को प्रशिक्षण, तकनीकी मदद और बाज़ार तक पहुँच प्रदान करके आर्थिक सशक्तिकरण में मदद करता है।

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