नया साल शुरू होते ही गेहूं मंडियों को लेकर किसानों और व्यापारियों की नज़र बाजार पर टिकी हुई है। आज 1 जनवरी 2026 है और ऐसे समय में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आने वाले दिनों में गेहूं के भाव बढ़ सकते हैं या अभी और दबाव बनेगा? नवंबर से दिसंबर 2025 के बीच देश की कई बड़ी मंडियों में आवक अचानक बढ़ने से कीमतों में हल्की नरमी देखने को मिली, लेकिन जनवरी की शुरुआत के साथ ही हालात बदलते नज़र आ रहे हैं। ठंड बढ़ने, किसानों द्वारा स्टॉक रोकने और सरकारी खरीद के संकेत मिलने के कारण बाजार में फिर से मजबूती की उम्मीद जताई जा रही है।
खास बात यह है कि जिन मंडियों में दिसंबर में भारी आवक के कारण दाम गिरे थे, वहां अब आवक धीमी पड़ने लगी है। ऐसे में जानकारों का मानना है कि जनवरी 2025 के दूसरे पखवाड़े से गेहूं के भाव में धीरे-धीरे सुधार देखने को मिल सकता है, खासकर अच्छी क्वालिटी वाले गेहूं में। हालांकि, यह बढ़त सीमित भी रह सकती है, क्योंकि स्टॉक अभी भी बाजार में मौजूद है। इस रिपोर्ट में हम आपको नवंबर बनाम दिसंबर 2025 के गेहूं भाव, आवक का पूरा विश्लेषण और आगे के संभावित रुझान आसान भाषा में बता रहे हैं, ताकि किसान सही समय पर सही फैसला ले सकें।
| राज्य | मंडी | किस्म | नवंबर भाव (₹/क्विंटल) | दिसंबर भाव (₹/क्विंटल) | भाव में बदलाव |
| उत्तर प्रदेश | लखनऊ मंडी | दारा | 2595 | 2592 | ↓ ₹3 गिरावट |
| उत्तर प्रदेश | मेरठ मंडी | दारा | 2609 | 2601 | ↓ ₹8 गिरावट |
| उत्तर प्रदेश | कानपुर (ग्रेन) मंडी | दारा | 2504 | 2386 | ↓ ₹118 गिरावट |
| उत्तर प्रदेश | वाराणसी मंडी | दारा | 2585 | 2594 | ↑ ₹9 बढ़ोतरी |
| उत्तर प्रदेश | रायबरेली मंडी | दारा | 2486 | 2538 | ↑ ₹52 बढ़ोतरी |
| दिल्ली | नजफगढ़ मंडी | दारा | 2579 | 2541 | ↓ ₹38 गिरावट |
| दिल्ली | नरेला मंडी | मैक्सिकन | 2647 | 2604 | ↓ ₹43 गिरावट |
| मध्य प्रदेश | भोपाल मंडी | गेहूं | 2580 | 2554 | ↓ ₹26 गिरावट |
| मध्य प्रदेश | उज्जैन मंडी | गेहूं | 2565 | 2545 | ↓ ₹20 गिरावट |
| महाराष्ट्र | मुंबई मंडी | अन्य | 4296 | 3950 | ↓ ₹346 गिरावट |
नवंबर–दिसंबर 2025: प्रमुख मंडियों में गेहूं की आवक में बदलाव
| राज्य | मंडी | किस्म | नवंबर आवक (क्विंटल) | दिसंबर आवक (क्विंटल) | आवक में बदलाव |
| उत्तर प्रदेश | लखनऊ मंडी | दारा | 9,055 | 5,078 | ↓ 3,977 |
| उत्तर प्रदेश | मेरठ मंडी | दारा | 1,309 | 1,321 | ↑ 12 |
| उत्तर प्रदेश | कानपुर (ग्रेन) मंडी | दारा | 13,743 | 1,00,524 | ↑ 86,781 |
| उत्तर प्रदेश | वाराणसी मंडी | दारा | 8,902 | 10,357 | ↑ 1,455 |
| उत्तर प्रदेश | रायबरेली मंडी | दारा | 7,915 | 19,039 | ↑ 11,124 |
| दिल्ली | नजफगढ़ मंडी | दारा | 99 | 362 | ↑ 263 |
| दिल्ली | नरेला मंडी | मैक्सिकन | 95 | 115 | ↑ 20 |
| मध्य प्रदेश | भोपाल मंडी | गेहूं | 87 | 1,221 | ↑ 1,134 |
| मध्य प्रदेश | उज्जैन मंडी | गेहूं | 4,967 | 4,927 | ↓ 40 |
नवंबर–दिसंबर के मंडी आंकड़े क्या कह रहे हैं? जनवरी में गेहूं के भाव बढ़ेंगे या दबाव में रहेंगे:
नवंबर से दिसंबर 2025 के दौरान देश की प्रमुख गेहूं मंडियों में भावों में हल्की नरमी और आवक में तेज़ बढ़ोतरी देखने को मिली। उत्तर प्रदेश की बात करें तो लखनऊ मंडी में गेहूं का भाव नवंबर में ₹2,595 था, जो दिसंबर में हल्का गिरकर ₹2,592 रह गया, वहीं आवक 9,055 टन से घटकर 5,078 टन पर आ गई। मेरठ में भाव ₹2,609 से घटकर ₹2,601 हुआ, जबकि आवक लगभग स्थिर रही।
कानपुर (ग्रेन) मंडी में सबसे बड़ा बदलाव देखने को मिला, जहां गेहूं का भाव ₹2,504 से गिरकर ₹2,386 हो गया, लेकिन आवक में जबरदस्त उछाल आया — नवंबर के 13,743 टन से बढ़कर दिसंबर में 1,00,524 टन पहुंच गई। इसी तरह रायबरेली में भाव ₹2,486 से बढ़कर ₹2,538 हुआ, लेकिन आवक 7,915 टन से बढ़कर 19,039 टन हो गई।
दिल्ली की मंडियों में नजफगढ़ में भाव ₹2,579 से गिरकर ₹2,541 रहा, जबकि आवक 99 टन से बढ़कर 362 टन हो गई। नरेला मंडी में मैक्सिकन गेहूं का भाव ₹2,647 से घटकर ₹2,604 हो गया, वहीं आवक मामूली रूप से बढ़ी।
मध्य प्रदेश में भोपाल और उज्जैन दोनों मंडियों में गेहूं के भाव ₹15–₹20 प्रति क्विंटल तक गिरे, जबकि भोपाल में आवक 87 टन से बढ़कर 1,221 टन हो गई।
वहीं महाराष्ट्र की मुंबई APMC में गेहूं का भाव नवंबर के ₹4,296 से गिरकर दिसंबर में ₹3,950 हो गया, हालांकि आवक 9,730 टन से बढ़कर 13,287 टन पहुंच गई।
कुल मिलाकर, दिसंबर में अधिकांश मंडियों में आवक बढ़ने के कारण गेहूं के दामों पर दबाव बना, जबकि जिन मंडियों में आवक सीमित रही, वहां भाव अपेक्षाकृत स्थिर या मामूली मजबूत रहे।
किसानों के लिए सुझाव:
जनवरी 2025 के आसपास गेहूं के भाव अचानक बढ़ने की संभावना कम है, लेकिन यदि आप थोड़ा इंतजार कर सकते हैं और भंडारण की सुविधा है, तो जनवरी के अंत या फरवरी में बेहतर भाव मिलने की उम्मीद की जा सकती है। आगे की चाल पूरी तरह से आवक, सरकारी खरीद और बाजार मांग पर निर्भर करेगी — और हम आपको इसकी हर अपडेट सबसे पहले देते रहेंगे।