उत्तर प्रदेश में गोसंरक्षण और प्राकृतिक खेती को नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो गई है। राज्य की योगी सरकार अब गोबर आधारित जैविक खाद को बड़े स्तर पर बढ़ावा देने जा रही है। इस योजना के तहत प्रदेश के करीब 7,500 गो आश्रय स्थलों में गोबर से जैविक खाद तैयार की जाएगी और किसानों को इसे सब्सिडी पर उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे खेती की लागत कम होगी, मिट्टी की सेहत सुधरेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।
सरकार इस योजना को केवल गोसंरक्षण तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि इसे किसानों की आय बढ़ाने, महिला सशक्तीकरण और गांवों में रोजगार सृजन से जोड़कर एक बड़े ग्रामीण विकास मॉडल के रूप में विकसित कर रही है। तैयार की जाने वाली जैविक खाद को 50 किलो के पैकेट में बाजार और किसानों तक पहुंचाया जाएगा, ताकि इसका उपयोग आसान हो सके।
जैविक खाद की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों और संबंधित एजेंसियों की मदद ली जाएगी। ये संस्थान खाद की टेस्टिंग, प्रमाणन और खरीद प्रक्रिया में सहयोग करेंगे। इससे किसानों को भरोसेमंद और गुणवत्तापूर्ण जैविक खाद उपलब्ध हो सकेगी। सरकार गोबर से खाद तैयार करने के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम भी शुरू करेगी। गांवों में प्रशिक्षकों की टीम तैयार की जाएगी, जो पशुपालकों, स्वयं सहायता समूहों और युवाओं को जैविक खाद निर्माण की तकनीक सिखाएगी। इससे ग्रामीण युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे।
उत्तर प्रदेश गोसेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता के अनुसार, पहली बार गोबर को बड़े आर्थिक संसाधन के रूप में विकसित करने की दिशा में ठोस पहल की जा रही है। उनका कहना है कि गोबर आधारित जैविक खाद के निर्माण, पैकेजिंग, परिवहन और विपणन से ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े स्तर पर रोजगार पैदा होंगे। उन्होंने बताया कि इससे पशुपालकों की अतिरिक्त आय बढ़ेगी और गांवों में आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी। खासकर महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों को इस योजना से सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
देशभर में प्राकृतिक खेती और ऑर्गेनिक उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे समय में यूपी सरकार की यह पहल किसानों के लिए एक बेहतर विकल्प बन सकती है। जैविक खाद के इस्तेमाल से किसानों की रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी और खेती अधिक टिकाऊ बन सकेगी।
सरकार ने गोसंरक्षण अभियान के लिए करीब 2,000 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। वहीं बड़े गोसंरक्षण केंद्रों की स्थापना के लिए अलग से 100 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। आने वाले समय में हर जिले में कम से कम एक आत्मनिर्भर गोसंरक्षण केंद्र विकसित करने की योजना है।
प्रदेश के करीब 7,500 गो आश्रय स्थलों में वर्तमान में लगभग 12.5 लाख गोवंश संरक्षित हैं। सरकार अब इन गोशालाओं को जैविक खाद उत्पादन केंद्रों के रूप में विकसित करेगी। गोबर और गोमूत्र आधारित प्राकृतिक खेती मॉडल के जरिए किसानों की लागत घटाने और आय बढ़ाने की रणनीति बनाई गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, एक गाय से प्रतिदिन करीब 10 किलोग्राम गोबर और लगभग 5 लीटर गोमूत्र प्राप्त होता है। इन संसाधनों का उपयोग जैविक खाद, प्राकृतिक कीटनाशक और अन्य गो आधारित उत्पाद तैयार करने में किया जाएगा।
डीबीटी से बढ़ी पारदर्शिता: मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के तहत अब तक लगभग सवा लाख पशुपालकों को 1.80 लाख से अधिक गोवंश सौंपे जा चुके हैं। सरकार गोवंश के भरण-पोषण के लिए प्रति गोवंश 50 रुपये प्रतिदिन की सहायता राशि सीधे डीबीटी के माध्यम से पशुपालकों के बैंक खातों में भेज रही है।
FAQs:
1. गोबर आधारित जैविक खाद योजना क्या है?
यह उत्तर प्रदेश सरकार की योजना है, जिसके तहत गो आश्रय स्थलों में गोबर से जैविक खाद तैयार कर किसानों को उपलब्ध कराई जाएगी।
2. किसानों को इस योजना से क्या लाभ होगा?
किसानों की खेती लागत कम होगी, मिट्टी की गुणवत्ता सुधरेगी और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिलेगा।
3. जैविक खाद कहां तैयार की जाएगी?
प्रदेश के लगभग 7,500 गो आश्रय स्थलों में गोबर आधारित जैविक खाद तैयार की जाएगी।
4. क्या किसानों को सब्सिडी मिलेगी?
हाँ, सरकार किसानों को सब्सिडी पर जैविक खाद उपलब्ध कराने की तैयारी कर रही है।
5. Khetivyapar के अनुसार योजना का सबसे बड़ा फायदा क्या है?
Khetivyapar के अनुसार, यह योजना किसानों की आय बढ़ाने, रोजगार सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद करेगी।