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पीएम-कुसुम 2.0: अब खेती के साथ बिजली से भी होगी कमाई, फल-सब्जी किसानों के लिए बड़ा मौका

पीएम-कुसुम 2.0 योजना
पीएम-कुसुम 2.0 योजना

केंद्र सरकार किसानों की आमदनी बढ़ाने और खेती को ऊर्जा के क्षेत्र से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान यानी पीएम-कुसुम योजना के नए संस्करण “पीएम-कुसुम 2.0” को जल्द लॉन्च करने की तैयारी चल रही है। इस योजना का सबसे बड़ा लाभ फल, सब्जी और बागवानी करने वाले किसानों को मिलने की उम्मीद है। सरकार का उद्देश्य खेती के साथ सौर ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देकर किसानों के लिए अतिरिक्त आय का स्थायी स्रोत तैयार करना है।

सूत्रों के मुताबिक, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) इस योजना का कैबिनेट नोट तैयार कर रहा है। विभिन्न मंत्रालयों के साथ चर्चा पूरी होने के बाद अगले कुछ हफ्तों में इसे मंजूरी मिल सकती है। इसके बाद योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।

खेत में लगेगा सोलर प्लांट, नीचे होती रहेगी खेती:

पीएम-कुसुम 2.0 के तहत किसानों के खेतों में ऊंचे ढांचे पर सोलर पैनल लगाए जाएंगे। इन पैनलों से करीब 10 हजार मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। खास बात यह है कि पैनल इतनी ऊंचाई पर लगाए जाएंगे कि नीचे खेती का काम प्रभावित नहीं होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि टमाटर, बैंगन, पपीता, आम और कई बागवानी फसलें हल्की छाया में बेहतर उत्पादन देती हैं। ऐसे में किसान एक ही जमीन पर खेती और बिजली उत्पादन दोनों से कमाई कर सकेंगे।

खेती के साथ मिलेगी दोहरी आय:

एग्री-पीवी मॉडल के तहत सोलर पैनल कम से कम 2.1 मीटर ऊंचाई पर लगाए जाएंगे, ताकि फसलों को पर्याप्त धूप और नियंत्रित छाया मिल सके। इससे खेत की उत्पादकता बनी रहेगी और साथ ही बिजली उत्पादन भी जारी रहेगा। किसान अपनी फसल बेचने के साथ अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में बेचकर हर महीने अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकेंगे। माना जा रहा है कि बड़ी जोत वाले किसानों को इससे सालाना लाखों रुपये तक की अतिरिक्त कमाई हो सकती है।

डीजल पंपों से मिलेगी राहत:

इस योजना का एक प्रमुख उद्देश्य खेती में इस्तेमाल होने वाले डीजल पंपों पर निर्भरता कम करना भी है। सरकार सिंचाई व्यवस्था को सौर ऊर्जा आधारित बनाने पर जोर दे रही है। इससे किसानों को कम लागत में बिजली उपलब्ध होगी और सिंचाई आसान हो सकेगी। डीजल खर्च घटने से खेती की लागत कम होगी, समय पर सिंचाई संभव होगी और प्रदूषण में भी कमी आएगी। साथ ही राज्यों पर बिजली सब्सिडी का दबाव भी घट सकता है।

50 हजार करोड़ रुपये का बड़ा प्रस्ताव:

पीएम-कुसुम 2.0 का प्रस्तावित बजट करीब 50 हजार करोड़ रुपये बताया जा रहा है, जो मौजूदा योजना की तुलना में लगभग 45 प्रतिशत अधिक है। इस योजना में विकेंद्रीकृत सोलर प्लांट, फीडर लेवल सोलराइजेशन और बैटरी स्टोरेज सिस्टम पर विशेष फोकस रहेगा, ताकि रात के समय भी बिजली उपलब्ध कराई जा सके।

पिछली योजना से मिले अनुभव का होगा फायदा:

वर्ष 2019 में शुरू हुई पीएम-कुसुम योजना अपने निर्धारित लक्ष्यों तक पूरी तरह नहीं पहुंच सकी थी। कई राज्यों में वित्तीय समस्याएं, ग्रिड कनेक्टिविटी और जागरूकता की कमी जैसी चुनौतियां सामने आई थीं। हालांकि लाखों किसानों को इसका लाभ मिला, लेकिन लक्ष्य के मुकाबले सोलर क्षमता स्थापना कम रही। अब सरकार उन्हीं अनुभवों को ध्यान में रखते हुए पीएम-कुसुम 2.0 को अधिक प्रभावी, व्यावहारिक और किसान हितैषी बनाने की तैयारी कर रही है।

फल और सब्जी किसानों के लिए बन सकता है गेमचेंजर:

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि योजना समय पर लागू होती है, तो यह फल, सब्जी और बागवानी करने वाले किसानों के लिए आय बढ़ाने का बड़ा अवसर साबित हो सकती है। खेती के साथ बिजली उत्पादन का यह मॉडल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

FAQs:

1. PM-KUSUM 2.0 योजना क्या है?

PM-KUSUM 2.0 केंद्र सरकार की नई योजना है, जिसके तहत किसानों के खेतों में सोलर पैनल लगाकर बिजली उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा।

2. PM-KUSUM 2.0 से किसानों को क्या फायदा होगा?

किसान खेती के साथ बिजली उत्पादन करके अतिरिक्त आय कमा सकेंगे और सिंचाई खर्च भी कम होगा।

3. क्या सोलर पैनल लगने के बाद खेती प्रभावित होगी?

नहीं, सोलर पैनल ऊंचाई पर लगाए जाएंगे ताकि नीचे खेती का काम सामान्य रूप से चलता रहे।

4. किन किसानों को PM-KUSUM 2.0 से सबसे ज्यादा फायदा होगा?

फल, सब्जी और बागवानी करने वाले किसानों को इस योजना से सबसे अधिक लाभ मिलने की संभावना है।

5. PM-KUSUM 2.0 का बजट कितना है?

सरकार इस योजना के लिए लगभग 50 हजार करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार कर रही है।

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