रबी सीजन की शुरुआत होते ही देशभर में किसान गेहूं की बुवाई की तैयारी में जुट जाते हैं। हर वर्ष किसान इस बात को लेकर चिंतित रहते हैं कि कौन-सी किस्म उन्हें अधिक उपज, बेहतर दाना गुणवत्ता और कम रोग समस्या के साथ अधिक लाभ देगी। विशेषज्ञों के अनुसार, फसल की सफलता काफी हद तक सही किस्म के चयन पर निर्भर करती है, क्योंकि जलवायु और मिट्टी दोनों ही गेहूं की ग्रोथ और उपज को प्रभावित करते हैं।
इसी को ध्यान में रखते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने इस सीजन के लिए पांच हाई-यील्ड और रोग-प्रतिरोधी गेहूं किस्मों की पहचान की है। इन किस्मों से किसानों को औसतन 45–50 क्विंटल/हेक्टेयर, जबकि अनुकूल परिस्थितियों में 60–70 क्विंटल/हेक्टेयर तक उपज मिल सकती है।
ये किस्में न केवल अधिक उत्पादन देने वाली हैं, बल्कि इनका दाना उच्च गुणवत्ता वाला, चपाती और प्रोसेसिंग के लिए भी उत्तम माना जाता है। आइए जानते हैं इन पांच प्रमुख किस्मों की खूबियों के बारे में
1. मुक्तिनाथ 3170:
मुक्तिनाथ 3170 एक कठोर दानों वाली किस्म है, जो पिसाई और प्रोसेसिंग के लिए बेहतरीन मानी जाती है।
मुख्य विशेषताएं:
2. जीडब्ल्यू 451 (GW 451):
गुजरात के गर्म क्षेत्रों में लोकप्रिय यह किस्म आटा और सेमोलिना उद्योग के लिए पसंद की जाती है।
मुख्य विशेषताएं:
3. एचआई (HI) 1633 / पूसा गेहूं 1633:
यह किस्म उच्च प्रोटीन और बेहतरीन चपाती गुणवत्ता के लिए किसानों की पहली पसंद बनी हुई है।
मुख्य विशेषताएं:
4. करन नरेंद्र (Karan Narendra / DBW 222):
पूर्वी भारत के आर्द्र और नमी वाले क्षेत्रों के लिए उत्कृष्ट किस्म।
मुख्य विशेषताएं:
5. पीबीडब्ल्यू (PBW) 826 — टॉप हाई-यील्डिंग वैरायटी:
यह किस्म इस वर्ष सबसे अधिक पसंद की जा रही है, क्योंकि इसकी उपज क्षमता रिकॉर्ड स्तर पर है।
मुख्य विशेषताएं:
किसान कैसे चुनें सही गेहूं की किस्म?
विशेषज्ञ निम्न बातों पर विशेष ध्यान देने की सलाह देते हैं—
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