कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार 22 मई 2026 तक देश में कुल 86.02 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई पूरी हो चुकी है। यह पिछले वर्ष की समान अवधि के 83.50 लाख हेक्टेयर की तुलना में 2.52 लाख हेक्टेयर अधिक है। विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर सिंचाई सुविधाओं, आधुनिक खेती तकनीकों और बाजार की बढ़ती मांग के कारण किसानों का रुझान अब फसल विविधीकरण की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस बार धान की बुवाई में हल्की गिरावट दर्ज की गई है। 22 मई तक धान का कुल रकबा 31.05 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 32.42 लाख हेक्टेयर था। यानी करीब 1.36 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है। हालांकि धान के मुकाबले दालों, तिलहनों और श्रीअन्न (मोटे अनाज) की खेती में अच्छी तेजी देखने को मिली है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि कम पानी वाली और बेहतर लाभ देने वाली फसलों की ओर किसानों का झुकाव लगातार बढ़ रहा है।
इस बार दालों की कुल बुवाई 27.91 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 0.65 लाख हेक्टेयर अधिक है। खास बात यह रही कि उड़द की खेती में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई। उड़द का रकबा पिछले साल की तुलना में 1.02 लाख हेक्टेयर बढ़ा है। वहीं मूंग के क्षेत्र में हल्की गिरावट देखने को मिली, लेकिन कुल मिलाकर दलहन फसलों की स्थिति सकारात्मक बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि दालों की बढ़ती मांग और बेहतर बाजार मूल्य किसानों को आकर्षित कर रहे हैं।
मोटे अनाज यानी श्रीअन्न की खेती में इस बार उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कुल रकबा 16.01 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष से 1.77 लाख हेक्टेयर अधिक है। सबसे ज्यादा तेजी मक्का की खेती में देखने को मिली है। मक्का का क्षेत्रफल 10 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जो पिछले साल की तुलना में 1.50 लाख हेक्टेयर ज्यादा है। बाजरा और ज्वार के रकबे में भी हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों के अनुसार पोषक अनाजों की बढ़ती मांग और सरकार की श्रीअन्न प्रोत्साहन योजनाओं का असर किसानों के फैसलों में साफ दिखाई दे रहा है।
तिलहन फसलों में भी बढ़ी किसानों की दिलचस्पी:
तिलहन फसलों का कुल रकबा 11.04 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 1.47 लाख हेक्टेयर अधिक है। इसमें सबसे ज्यादा बढ़ोतरी मूंगफली की खेती में दर्ज की गई है। मूंगफली का क्षेत्रफल 1.31 लाख हेक्टेयर बढ़ा है। इसके अलावा सूरजमुखी और तिल की खेती में भी हल्की बढ़ोतरी देखने को मिली है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि खाद्य तेलों की बढ़ती मांग और बेहतर बाजार भाव के कारण किसान तिलहन फसलों की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं।
खेती में बदल रहा फसल पैटर्न:
कृषि क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि इस बार के आंकड़े खेती में बदलते फसल पैटर्न की ओर संकेत कर रहे हैं। किसान अब पारंपरिक फसलों के साथ-साथ कम लागत और अधिक लाभ देने वाली वैकल्पिक फसलों को भी प्राथमिकता दे रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक यदि मौसम अनुकूल बना रहा और किसानों को समय पर सिंचाई व उर्वरकों की उपलब्धता मिलती रही, तो इस बार गर्मियों की फसलों का उत्पादन बेहतर रहने की संभावना है। इससे किसानों की आय बढ़ने के साथ देश की खाद्य और पोषण सुरक्षा को भी मजबूती मिल सकती है।
FAQs:
1. 2026 में गर्मियों की फसलों की कुल बुवाई कितनी हुई है?
22 मई 2026 तक देश में कुल 86.02 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गर्मियों की फसलों की बुवाई पूरी हो चुकी है।
2. इस बार किस फसल की खेती में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी हुई है?
मक्का और उड़द की खेती में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
3. धान की बुवाई में गिरावट क्यों आई?
कम पानी उपलब्धता, बढ़ती लागत और वैकल्पिक फसलों से अधिक लाभ मिलने के कारण धान की बुवाई में कमी आई है।
4. तिलहन फसलों में कौन-सी फसल सबसे आगे रही?
मूंगफली की खेती में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
5. क्या इस बार किसानों की आय बढ़ने की संभावना है?
विशेषज्ञों के अनुसार यदि मौसम अनुकूल रहा तो बेहतर उत्पादन के कारण किसानों की आय बढ़ सकती है।