भारत सरकार कृषि क्षेत्र को पूरी तरह डिजिटल और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। इसी कड़ी में 20 जुलाई, 2026 तक देशभर में 10.18 करोड़ से अधिक यूनिक Farmer ID तैयार की जा चुकी हैं। इन डिजिटल पहचान पत्रों का उद्देश्य किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ पारदर्शी और तेज़ी से उपलब्ध कराना, सब्सिडी का प्रत्यक्ष हस्तांतरण (DBT) सुनिश्चित करना तथा कृषि सेवाओं को एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ना है।
देशभर में Farmer ID तैयार करने का अभियान तेजी से जारी है। अब तक 10.18 करोड़ से अधिक किसानों का डिजिटल पंजीकरण किया जा चुका है। यह यूनिक आईडी किसानों की पहचान को एकीकृत कर विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ एक ही डिजिटल प्रोफाइल के माध्यम से उपलब्ध कराने में मदद करेगी। इस व्यवस्था से किसानों को बार-बार अलग-अलग दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता कम होगी और योजनाओं का लाभ समय पर मिल सकेगा।
सरकार का मानना है कि डिजिटल पहचान के जरिए लाभार्थियों की सटीक पहचान होगी, जिससे योजनाओं का संचालन अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेगा।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में अब सैटेलाइट इमेजरी और रिमोट सेंसिंग तकनीक का व्यापक उपयोग किया जा रहा है, जिससे फसल नुकसान का आकलन अधिक तेज़ और सटीक हो रहा है।
YES-TECH से होगी वैज्ञानिक उपज का आकलन:
Yield Estimation System based on Technology (YES-TECH) के माध्यम से सैटेलाइट डेटा और आधुनिक फसल उपज मॉडल का उपयोग कर बीमा इकाई स्तर पर उपज का वैज्ञानिक अनुमान लगाया जा रहा है। इससे पारंपरिक क्रॉप कटिंग प्रयोगों (CCE) को बेहतर तकनीकी समर्थन मिल रहा है और स्थानीय स्तर पर उपज का अधिक सटीक मूल्यांकन संभव हो रहा है।
Smart Sampling से तेज होंगे Crop Cutting Experiments:
अब खेतों का चयन केवल यादृच्छिक तरीके से नहीं किया जाएगा। सैटेलाइट आधारित वनस्पति सूचकांक फसलों की वास्तविक स्थिति का विश्लेषण कर उन क्षेत्रों की पहचान करेंगे, जहां क्रॉप कटिंग प्रयोग करना अधिक उपयुक्त होगा। इससे समय की बचत होगी और मानवीय त्रुटियां भी कम होंगी।
बीमा विवादों का होगा तेज समाधान:
रिमोट सेंसिंग आधारित टाइम-सीरीज़ सैटेलाइट इमेजरी की मदद से विभिन्न मौसमों में फसलों की स्थिति का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन किया जा सकेगा। इससे राज्य सरकारों और बीमा कंपनियों के बीच क्षेत्रफल एवं उपज से जुड़े विवादों के समाधान में तेजी आएगी तथा दावा निपटान की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी।
बाढ़ और सूखे में तुरंत होगा नुकसान का आकलन:
बाढ़, सूखा या अन्य प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति में मल्टी-टेम्पोरल सैटेलाइट इमेजरी और Krishi Decision Support System (DSS) के माध्यम से प्रभावित क्षेत्रों का तेजी से आकलन किया जा रहा है। इससे नुकसान का मूल्यांकन पहले की तुलना में कम समय में संभव हो रहा है।
ड्रोन तकनीक को बढ़ावा देने के लिए बढ़ रही सरकारी सहायता:
सरकार कृषि कार्यों में ड्रोन के उपयोग को भी लगातार प्रोत्साहित कर रही है। सब-मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन (SMAM) के तहत कृषि स्नातकों तथा पूर्वोत्तर राज्यों के लघु एवं सीमांत किसानों को किसान ड्रोन खरीदने पर 50 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। अन्य किसानों के लिए ड्रोन खरीदने तथा कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करने पर 40 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। अब तक इस योजना के तहत 2,122 कृषि ड्रोन वितरित या स्वीकृत किए जा चुके हैं।
'नमो ड्रोन दीदी' योजना से महिला स्वयं सहायता समूह होंगे सशक्त:
महिलाओं को कृषि तकनीक से जोड़ने के उद्देश्य से संचालित नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत चयनित महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को 15 दिवसीय व्यापक ड्रोन प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस प्रशिक्षण में ड्रोन संचालन के साथ ड्रोन पायलट लाइसेंस प्राप्त करने की प्रक्रिया भी शामिल है। देशभर में वर्तमान में 274 DGCA-अनुमोदित RPTOs इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों का संचालन कर रहे हैं। योजना के तहत अब तक 1,094 ड्रोन चयनित महिला स्वयं सहायता समूहों को उपलब्ध कराए जा चुके हैं।
FAQs:
1. Farmer ID क्या है?
Farmer ID किसानों की एक यूनिक डिजिटल पहचान है, जिसके माध्यम से उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ एक ही डिजिटल प्रोफाइल से मिल सकेगा।
2. देश में अब तक कितनी Farmer ID बनाई गई हैं?
20 जुलाई 2026 तक देशभर में 10.18 करोड़ से अधिक Farmer ID तैयार की जा चुकी हैं।
3. Farmer ID से किन योजनाओं का लाभ मिलेगा?
Farmer ID के जरिए PM-KISAN, PMFBY, MSP, DBT, कृषि ऋण, बीज-उर्वरक वितरण और प्राकृतिक आपदा राहत जैसी योजनाओं का लाभ मिलेगा।
4. YES-TECH और Smart Sampling क्या हैं?
YES-TECH सैटेलाइट आधारित फसल उपज आकलन प्रणाली है, जबकि Smart Sampling सैटेलाइट डेटा की मदद से Crop Cutting Experiments के लिए उपयुक्त खेतों का चयन करती है।
5. किसानों को ड्रोन पर कितनी सब्सिडी मिलती है?
SMAM योजना के तहत पात्र किसानों को कृषि ड्रोन खरीदने पर 40% से 50% तक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है।