फरवरी के दौरान तापमान में बदलाव के साथ अरहर की फसल पर हानिकारक कीटों का प्रकोप बढ़ने लगता है। यदि समय रहते नियंत्रण न किया जाए तो फलियां कमजोर हो जाती हैं और दानों की गुणवत्ता घट जाती है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार इस अवधि में विशेष रूप से फल मक्खी, फली बेधक और पत्ती लपेटक कीट सक्रिय हो जाते हैं, जो सीधे उत्पादन को प्रभावित करते हैं। सही समय पर पहचान और प्रबंधन से नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है।
फल मक्खी का हमला होने पर फलियों की सतह पर सुई की नोक जैसे छोटे छेद दिखाई देते हैं। प्रभावित हिस्सों पर भूरे या काले धब्बे बन जाते हैं और लार्वा अंदर घुसकर दानों को खाता है, जिससे वे सिकुड़कर खराब हो जाते हैं। संक्रमित फलियां अंदर से सड़ सकती हैं और समय से पहले गिर भी जाती हैं।
बचाव उपाय: फूल आने पर क्वीनालफॉस 3 मि.ली. प्रति लीटर पानी। जैविक विकल्प: 2% नीम तेल घोल का छिड़काव।
यह कीट फलियों में गोल छेद बनाकर अंदर प्रवेश करता है और दानों को खा जाता है। कई बार लार्वा का सिर फली के अंदर और पिछला भाग बाहर दिखाई देता है, जो इसकी प्रमुख पहचान है। यह फूल और कलियों को भी नुकसान पहुंचाता है, जिससे फलियां बनना रुक जाता है। प्रकोप बढ़ने पर पैदावार में 60–90% तक कमी हो सकती है।
बचाव उपाय: प्रति एकड़ 12–15 फेरोमोन ट्रैप लगाएं। इंटरक्रॉपिंग के रूप में ज्वार या सूरजमुखी की बुवाई करें।
इस कीट के प्रभाव से पत्तियां जाले जैसी संरचना में लिपट जाती हैं और आपस में चिपक जाती हैं। बाद में कीट इन्हें खाकर जालीदार बना देता है। ऊपर की पत्तियों पर हल्के पीले रंग की छोटी सुंडी दिखाई देना इसका प्रमुख संकेत है। इससे पौधों की वृद्धि रुक जाती है और फसल कमजोर हो जाती है।
बचाव उपाय: संक्रमित पत्तियां तोड़कर नष्ट करें ताकि फैलाव रुके। शुरुआती अवस्था में नीम तेल का छिड़काव।
FAQs:
1. अरहर की फसल में फल मक्खी कब अधिक सक्रिय होती है?
फूल और फली बनने की अवस्था में फल मक्खी का प्रकोप ज्यादा होता है।
2. फली बेधक कीट से कितना नुकसान हो सकता है?
गंभीर प्रकोप में 60–90% तक पैदावार घट सकती है।
3. पत्ती लपेटक कीट की शुरुआती पहचान कैसे करें?
पत्तियों का जाले की तरह लिपटना और हल्की पीली सुंडी दिखना प्रमुख संकेत है।
4. क्या नीम तेल प्रभावी है?
हाँ, शुरुआती अवस्था में 2% नीम तेल का छिड़काव काफी लाभकारी है।
5. फेरोमोन ट्रैप क्यों जरूरी है?
फेरोमोन ट्रैप से फली बेधक कीट की निगरानी और नियंत्रण में मदद मिलती है।