मध्यप्रदेश सरकार ने कहा है कि वर्ष 2026 को प्रदेश में कृषि वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। प्रदेश में उपलब्ध विविध जलवायु क्षेत्र, पर्याप्त सिंचाई सुविधाएं और मजबूत सड़क नेटवर्क का लाभ उठाते हुए किसानों की आय में वृद्धि और कृषि आधारित रोजगार सृजन को प्राथमिकता दी जाएगी। इन प्रयासों के माध्यम से “समृद्ध किसान–समृद्ध प्रदेश” के लक्ष्य को साकार किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह विचार कृषि वर्ष-2026 के अंतर्गत कृषि एवं इससे जुड़े विभागों द्वारा तैयार की गई कार्ययोजना की समीक्षा के दौरान समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में व्यक्त किए।
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि कृषि वर्ष-2026 के अंतर्गत शुरू की जाने वाली सभी गतिविधियों को तीन वर्षीय लक्ष्य के साथ क्रियान्वित किया जाए। किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन के लिए कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा दिया जाए। इसके साथ ही किसानों के क्षमता विकास हेतु प्रशिक्षण एवं अध्ययन भ्रमण कार्यक्रम, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना, उद्यानिकी का विस्तार और किसान उत्पादक संगठनों (FPO) के गठन पर विशेष ध्यान दिया जाए।
उन्होंने कहा कि किसानों को सस्ती ब्याज दरों पर ऋण उपलब्ध कराया जाए तथा माइक्रो इरीगेशन, बेहतर बाजार नेटवर्क और उपज के उचित मूल्य की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही पशुपालन, डेयरी और मछली पालन जैसी सहायक गतिविधियों के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जाए। मुख्यमंत्री ने जलवायु अनुकूल कृषि प्रबंधन, सतत कृषि, श्रीअन्न उत्पादन को बढ़ावा देने, जैव विविधता और परंपरागत कृषि ज्ञान के संरक्षण तथा प्राकृतिक और जैविक खेती को प्रोत्साहित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कृषि क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और डिजिटल तकनीकों को अपनाकर प्रदेश की राष्ट्रीय और वैश्विक पहचान मजबूत करने पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में अन्य राज्यों में हो रहे सफल नवाचारों से किसानों को अवगत कराया जाए। इसके साथ ही किसानों को कृषि में उन्नत राज्यों तथा इज़राइल और ब्राज़ील जैसे देशों की अध्ययन यात्राओं पर भेजा जाए, ताकि वे आधुनिक तकनीकों और नवाचारों को अपनाकर उत्पादन और आय बढ़ा सकें। “समृद्ध किसान–समृद्ध प्रदेश” के लक्ष्य को हासिल करने के लिए किसान कल्याण, सहकारिता, पशुपालन एवं डेयरी, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, राजस्व, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण, ऊर्जा, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा, मछुआ कल्याण, मत्स्य विकास और सिंचाई विभाग आपसी समन्वय से कार्य करेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भोपाल में आयोजित होने वाले गुलाब महोत्सव को अब पुष्प महोत्सव के रूप में मनाया जाए, जिसमें प्रदेश के विभिन्न जिलों में उत्पादित फूलों को शामिल किया जाए। साथ ही सभी जिलों में फूलों की खेती को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए। बैठक में जानकारी दी गई कि वर्ष 2028 में प्रस्तावित “इंटरनेशनल रोज़ कॉम्पीटिशन” भोपाल में आयोजित किया जाना है। वहीं सिंहस्थ-2028 को ध्यान में रखते हुए उज्जैन जिले में 100 एकड़ क्षेत्र में फूलों की खेती को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने पराली निष्पादन के लिए प्रभावी प्रयास करने तथा एफपीओ को दुग्ध उत्पादन गतिविधियों से जोड़ने के निर्देश भी दिए। इसके साथ ही सहकारिता आधारित कृषि स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया।
बैठक में बताया गया कि प्रदेश की मंडियों के आधुनिकीकरण के लिए विशेष गतिविधियां संचालित की जाएंगी। वर्ष 2025-26 में 20, वर्ष 2026-27 में 19 और वर्ष 2027-28 में 42 मंडियों को e-NAM (राष्ट्रीय कृषि बाजार) से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मंडियों के आधुनिकीकरण से साफ, ग्रेडेड और पैक्ड उपज उपलब्ध होगी, जिससे उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार होगा और प्रदेश के कृषि उत्पादों की राष्ट्रीय बाजारों में भागीदारी बढ़ेगी। इससे किसानों को प्रतिस्पर्धी और बेहतर मूल्य प्राप्त होंगे तथा उनकी आय में वृद्धि सुनिश्चित होगी।
बैठक में यह भी बताया गया कि मंडियों में पारदर्शी नीलामी व्यवस्था, अनियमितताओं की रोकथाम, पुराने प्रांगणों का सुव्यवस्थित विकास, अतिक्रमण से होने वाले नुकसान की रोकथाम और नवाचार के माध्यम से कार्यकुशलता बढ़ाने के प्रयास किए जाएंगे। इसके अलावा कृषि अवसंरचना निधि (AIF) योजना के तहत केंद्र सरकार के सहयोग से फसलोत्तर प्रबंधन, कृषि अवसंरचनाओं और परिसंपत्तियों के निर्माण व विकास के लिए भी कार्य किए जाएंगे।
FAQ:
1. कृषि वर्ष 2026 में मध्यप्रदेश सरकार की मुख्य प्राथमिकताएं क्या हैं?
किसानों की आय बढ़ाना, कृषि आधारित रोजगार सृजन, कृषि यंत्रीकरण, और मंडियों का आधुनिकीकरण प्रमुख प्राथमिकताएं हैं।
2. किसान उत्पादक संगठन (FPO) क्या है और इसका महत्व क्या है?
FPO किसानों का समूह होता है जो सामूहिक रूप से कृषि उत्पादों की पैदावार, प्रसंस्करण और बिक्री करता है, जिससे बेहतर मूल्य और संसाधन मिलते हैं।
3. Khetivyapar किस प्रकार किसानों की मदद करता है?
Khetivyapar किसानों को कृषि संबंधित सेवाएं, प्रशिक्षण, कर्ज और बाजार से जोड़ने का काम करता है।
4. e-NAM से किसानों को क्या लाभ होगा?
e-NAM से मंडियों का डिजिटल जुड़ाव होता है जिससे किसान अपनी उपज को बेहतर कीमत और व्यापक बाजार तक पहुंचा सकते हैं।
5. मध्यप्रदेश में फूलों की खेती को कैसे बढ़ावा दिया जा रहा है?
फूलों की खेती को विभिन्न जिलों में प्रोत्साहित किया जा रहा है और पुष्प महोत्सव जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर मिलें।