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Mp News: गेहूं खरीदी में मध्यप्रदेश ने बनाया नया रिकॉर्ड, सीमांत और लघु किसानों को सबसे बड़ा फायदा

मध्यप्रदेश गेहूं उपार्जन 2026
मध्यप्रदेश गेहूं उपार्जन 2026

मध्यप्रदेश ने इस वर्ष गेहूं उपार्जन के मामले में नया रिकॉर्ड बनाते हुए देशभर में अपनी मजबूत स्थिति दर्ज कराई है। न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर राज्य में अब तक 13 लाख 36 हजार किसानों से 103 लाख 48 हजार मीट्रिक टन गेहूं खरीदा जा चुका है। खास बात यह है कि इसमें बड़ी हिस्सेदारी सीमांत और लघु किसानों की रही है। राज्य सरकार के अनुसार 8 लाख 9 हजार 990 छोटे और सीमांत किसानों से 32 लाख 14 हजार मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी की गई है। प्रदेश में गेहूं उपार्जन का कार्य अभी भी जारी है।

खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि कोविड-19 अवधि को छोड़ दें तो पिछले 10 वर्षों में यह सबसे बड़ा गेहूं उपार्जन माना जा रहा है। सरकार का दावा है कि किसानों को समय पर भुगतान और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के कारण इस बार खरीदी प्रक्रिया अधिक प्रभावी रही।

मुख्यमंत्री की लगातार मॉनिटरिंग से बढ़ी खरीदी की रफ्तार:

राज्य सरकार के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव लगातार गेहूं खरीदी प्रक्रिया की निगरानी कर रहे हैं। पहले प्रदेश के लिए 78 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदी का लक्ष्य तय किया गया था, लेकिन बाद में केंद्र सरकार ने इसे बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया। अब प्रदेश इस लक्ष्य को भी पार कर चुका है।

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मुख्यमंत्री ने कई खरीदी केंद्रों का औचक निरीक्षण कर वहां तौल व्यवस्था, बारदाने की उपलब्धता और किसानों के लिए जरूरी सुविधाओं की समीक्षा की। उन्होंने किसानों से सीधे बातचीत कर भुगतान और खरीदी प्रक्रिया की जानकारी भी ली। किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए जिन किसानों ने स्लॉट बुक करा लिए थे, उनके लिए खरीदी की अंतिम तारीख 23 मई से बढ़ाकर 28 मई कर दी गई।

किसानों को 22,842 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान:

सरकार ने जानकारी दी है कि अब तक किसानों को गेहूं उपार्जन के बदले 22,842.9 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का भुगतान किया जा चुका है। राज्य में किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य और 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस सहित कुल 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं खरीदा जा रहा है।

खरीदी प्रक्रिया को तेज और सुगम बनाने के लिए प्रत्येक उपार्जन केंद्र पर तौल कांटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 कर दी गई है। जिलों को जरूरत के अनुसार अतिरिक्त तौल कांटे बढ़ाने का अधिकार भी दिया गया है। किसानों की सुविधा के लिए तौल पर्ची जारी करने का समय शाम 6 बजे से बढ़ाकर रात 10 बजे तक कर दिया गया है, जबकि भुगतान संबंधी देयक जारी करने की प्रक्रिया रात 12 बजे तक जारी रखी जा रही है।

खरीदी केंद्रों पर बढ़ाई गई किसानों की सुविधाएं:

राज्य सरकार ने खरीदी केंद्रों पर किसानों के लिए पेयजल, छायादार बैठने की व्यवस्था और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं। इसके अलावा बारदाने, तौल कांटे, हम्माल, सिलाई मशीन, कंप्यूटर और गुणवत्ता परीक्षण उपकरणों की पर्याप्त व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है। सरकार का कहना है कि किसानों की उपज की समय पर तौल और सुरक्षित भंडारण के लिए सभी जरूरी इंतजाम किए गए हैं। उपज की सफाई के लिए पंखे और छलनी जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं, ताकि खरीदी प्रक्रिया में किसी प्रकार की परेशानी न हो।

किसानों के लिए सकारात्मक संकेत: विशेषज्ञों का मानना है कि रिकॉर्ड स्तर पर गेहूं उपार्जन और समय पर भुगतान से किसानों को आर्थिक मजबूती मिलेगी। साथ ही यह संकेत भी मिल रहा है कि बेहतर सरकारी व्यवस्था, समर्थन मूल्य और बोनस जैसी योजनाएं किसानों को अधिक उत्पादन के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं। राज्य में गेहूं खरीदी की यह सफलता आने वाले कृषि सीजन के लिए भी सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।

FAQs:

Q1. मध्यप्रदेश में इस वर्ष कितना गेहूं उपार्जन हुआ है?
A. अब तक 103 लाख 48 हजार मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी हो चुकी है।

Q2. कितने किसानों से गेहूं खरीदा गया है?
A. लगभग 13 लाख 36 हजार किसानों से MSP पर गेहूं खरीदी की गई है।

Q3. गेहूं का MSP और बोनस कितना है?
A. 2585 रुपये MSP और 40 रुपये बोनस सहित कुल 2625 रुपये प्रति क्विंटल।

Q4. किसानों को कितना भुगतान किया गया है?
A. अब तक 22,842.9 करोड़ रुपये से अधिक भुगतान किया गया है।

Q5. क्या गेहूं उपार्जन अभी भी जारी है?
A. हां, राज्य में गेहूं उपार्जन प्रक्रिया अभी भी जारी है।

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