मध्य प्रदेश सरकार ने धान उत्पादक किसानों के हित में बड़ा फैसला लेते हुए घोषणा की है कि अब धान की फसल को भी भावांतर भुगतान योजना का लाभ मिलेगा। इसके तहत किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और बाजार मूल्य के बीच के अंतर की राशि सरकार उपलब्ध कराएगी। राज्य स्तरीय धान महोत्सव में मुख्यमंत्री ने यह घोषणा करते हुए किसानों से फसल विविधीकरण, श्रीअन्न उत्पादन, पशुपालन और मत्स्य पालन को अपनाने का भी आह्वान किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महाकौशल क्षेत्र धान उत्पादन के लिए देशभर में अपनी विशेष पहचान रखता है। क्षेत्र की प्रसिद्ध छत्री धान को हाल ही में जीआई (Geographical Indication) टैग मिलने से इसकी पहचान राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मजबूत हुई है। उन्होंने घोषणा की कि अब धान उत्पादकों को भी भावांतर योजना के तहत सहायता मिलेगी, जिससे यदि बाजार में धान का मूल्य MSP से कम रहता है तो सरकार दोनों के बीच का अंतर किसानों के खातों में जमा करेगी।
कार्यक्रम के दौरान रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना के तहत प्रदेश के 3,941 किसानों के बैंक खातों में ₹2.84 करोड़ की बोनस राशि सीधे हस्तांतरित की गई। यह बोनस कोदो-कुटकी उत्पादकों को ₹1,000 प्रति क्विंटल की दर से दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार श्रीअन्न उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए समर्थन मूल्य के साथ बोनस की व्यवस्था भी कर रही है।
मुख्यमंत्री जनकल्याण (संबल) 2.0 योजना के अंतर्गत 16,754 से अधिक श्रमिक परिवारों को ₹365 करोड़ की सहायता राशि सिंगल क्लिक के माध्यम से हस्तांतरित की गई। इस योजना के तहत दुर्घटना में मृत्यु पर ₹4 लाख, सामान्य मृत्यु पर ₹2 लाख, स्थायी दिव्यांगता पर ₹1 लाख तक की सहायता साथ ही पात्र श्रमिक परिवारों को आयुष्मान भारत योजना के तहत ₹5 लाख तक के निःशुल्क उपचार की सुविधा भी मिल रही है।
कम पानी वाली फसलों को अपनाने की अपील:
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष मानसून पर अल नीनो का प्रभाव देखने को मिल सकता है। ऐसे में किसानों को ऐसी फसलों की ओर भी ध्यान देना चाहिए, जिनमें कम पानी की आवश्यकता होती है। उन्होंने विशेष रूप से किसानों से कोदो-कुटकी, ज्वार, बाजरा, मक्क, अन्य श्रीअन्न फसलों की खेती बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण और फसल विविधीकरण भविष्य की कृषि सुरक्षा के लिए आवश्यक हैं।
किसानों के लिए बिजली, सिंचाई और खाद व्यवस्था पर जोर:
किसान कल्याण वर्ष के दौरान किसानों को कई महत्वपूर्ण सुविधाएं दी जा रही हैं। किसानों को मात्र ₹5 में बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। वर्षा ऋतु के बाद सिंचाई के लिए दिन के समय बिजली उपलब्ध कराने की तैयारी है। खाद वितरण व्यवस्था को डिजिटल निगरानी के माध्यम से पारदर्शी बनाया जा रहा है।
गेहूं और सोयाबीन किसानों को भी मिल चुका है लाभ:
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस वर्ष प्रदेश ने गेहूं खरीद में नया रिकॉर्ड बनाया है। 13.46 लाख से अधिक किसानों से खरीद, 104 लाख मीट्रिक टन गेहूं की सरकारी खरीद, किसानों को ₹2,625 प्रति क्विंटल की दर से भुगतान, सोयाबीन उत्पादकों को भी भावांतर योजना के तहत सहायता मिली है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को खेत से बाजार तक बेहतर मूल्य दिलाने के लिए मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण और विपणन पर लगातार कार्य कर रही है।
FAQs:
1. धान को भावांतर भुगतान योजना का लाभ कैसे मिलेगा?
यदि बाजार में धान का मूल्य MSP से कम रहेगा, तो सरकार दोनों के बीच का अंतर किसानों के बैंक खाते में जमा करेगी।
2. भावांतर भुगतान योजना का उद्देश्य क्या है?
इस योजना का उद्देश्य किसानों को MSP से कम दाम मिलने पर आर्थिक नुकसान से बचाना और उनकी आय की सुरक्षा करना है।
3. श्रीअन्न उत्पादक किसानों को कितना बोनस मिला?
कोदो-कुटकी उत्पादकों को ₹1,000 प्रति क्विंटल की दर से बोनस दिया गया।
4. संबल 2.0 योजना के तहत क्या लाभ मिलते हैं?
योजना के तहत दुर्घटना में मृत्यु पर ₹4 लाख, सामान्य मृत्यु पर ₹2 लाख, स्थायी दिव्यांगता पर ₹1 लाख तक सहायता और आयुष्मान भारत के तहत ₹5 लाख तक का मुफ्त इलाज मिलता है।
5. किसानों से कम पानी वाली कौन-सी फसलें अपनाने की अपील की गई है?
सरकार ने किसानों से कोदो-कुटकी, ज्वार, बाजरा और मक्का जैसी कम पानी वाली श्रीअन्न फसलों की खेती बढ़ाने का आग्रह किया।