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MP GI Tag: एक साथ 12 उद्यानिकी फसलों को मिला GI टैग: मध्य प्रदेश ने रचा इतिहास, 2030 तक 30 लाख हेक्टेयर होगा उद्यानिकी क्षेत्र

मध्य प्रदेश जीआई टैग
मध्य प्रदेश जीआई टैग

मध्य प्रदेश ने उद्यानिकी क्षेत्र में एक नई उपलब्धि हासिल करते हुए देश में पहली बार एक साथ 12 उद्यानिकी उत्पादों के लिए भौगोलिक संकेतक (Geographical Indication-GI) टैग प्राप्त किया है। यह उपलब्धि न केवल राज्य की समृद्ध कृषि विरासत को नई पहचान देती है, बल्कि किसानों को बेहतर बाजार, प्रीमियम मूल्य और निर्यात के नए अवसर भी प्रदान करेगी।

राज्य सरकार ने वर्ष 2030 तक प्रदेश में उद्यानिकी फसलों का रकबा 28 लाख हेक्टेयर से बढ़ाकर 30 लाख हेक्टेयर करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस दिशा में किसानों को पारंपरिक खेती के साथ उच्च मूल्य वाली उद्यानिकी फसलों की ओर प्रोत्साहित किया जा रहा है।

इन 12 उद्यानिकी उत्पादों को मिला GI टैग:

  1. गुना का कुम्भराज धनिया 
  2. नरसिंहपुर बरमान घाट का बैंगन 
  3. बैतूल का गजरिया आम 
  4. खरगोन की लाल मिर्च 
  5. मांडू की खुरासानी इमली 
  6. जबलपुर की हरी मटर 
  7. सिवनी का सीताफल 
  8. मालवा का आलू 
  9. मालवा का गराडू 
  10. नरसिंहपुर का गुड़ 
  11. जबलपुर का सिंघाड़ा 
  12. आलीराजपुर का नूरजहां आम 

इसके अलावा इंदौरी जीरावन, रतलाम-सैलाना बालम ककड़ी, छतरपुर का पान और बुरहानपुर का केला सहित कई अन्य विशिष्ट उत्पादों को भी पहचान दिलाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।

2030 तक उद्यानिकी क्षेत्र विस्तार का लक्ष्य:

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन और खाद्य प्रसंस्करण को कृषि विकास का प्रमुख आधार बताया है। राज्य सरकार की कार्ययोजना के अनुसार वर्ष 2030 तक उद्यानिकी फसलों का कुल क्षेत्रफल बढ़ाकर 30 लाख हेक्टेयर किया जाएगा। सरकार का मानना है कि उद्यानिकी फसलें किसानों को पारंपरिक खेती की तुलना में अधिक लाभ, बेहतर बाजार और वर्षभर आय का अवसर प्रदान कर सकती हैं।

GI टैग से किसानों को क्या होंगे फायदे?

  1. उत्पाद को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग पहचान मिलेगी। 
  2. किसानों को बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ेगी। 
  3. नकली उत्पादों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। 
  4. निर्यात के नए अवसर विकसित होंगे। 
  5. स्थानीय कृषि उत्पादों की ब्रांड वैल्यू मजबूत होगी। 

कुम्भराज धनिया बना वैश्विक पहचान का प्रतीक:

गुना जिले का कुम्भराज धनिया लगभग छह दशकों से अपनी विशेष गुणवत्ता और सुगंध के लिए प्रसिद्ध है। इसमें आवश्यक तेल की मात्रा अधिक होने के कारण इसका स्वाद और खुशबू अन्य किस्मों से अलग मानी जाती है। गुना में प्रतिवर्ष लगभग 32 हजार मीट्रिक टन धनिया का उत्पादन होता है, जो देश के कुल उत्पादन का लगभग 20 से 25 प्रतिशत हिस्सा माना जाता है। यह धनिया कई देशों में निर्यात भी किया जाता है।

क्षेत्रीय विशेषताओं ने दिलाई अलग पहचान:

  1. राज्य के विभिन्न क्षेत्रों की जलवायु, मिट्टी और पारंपरिक खेती की पद्धतियों ने कई उत्पादों को विशिष्ट बनाया है।
  2. बरमान घाट का बैंगन नर्मदा की रेतीली मिट्टी में उगने के कारण अपने विशेष स्वाद के लिए जाना जाता है। 
  3. बैतूल का गजरिया आम अपनी गुणवत्ता और प्रसंस्करण क्षमता के कारण प्रसिद्ध है। 
  4. खरगोन की लाल मिर्च देश के प्रमुख मसाला उत्पादों में शामिल है और इसका निर्यात कई देशों तक होता है। 
  5. मांडू की खुरासानी इमली ऐतिहासिक और वनस्पति दृष्टि से बेहद अनूठी मानी जाती है। 
  6. सिवनी का सीताफल अपने बड़े आकार और स्वाद के कारण बाजार में अलग पहचान रखता है। 

मालवा और महाकौशल के उत्पादों को मिलेगा नया बाजार:

मालवा क्षेत्र का आलू और गराडू अपनी गुणवत्ता के कारण लंबे समय से किसानों की आय का महत्वपूर्ण स्रोत रहे हैं। वहीं जबलपुर की हरी मटर और सिंघाड़ा, नरसिंहपुर का गुड़ तथा आलीराजपुर का विशाल नूरजहां आम अब GI टैग के जरिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में नई पहचान बना सकेंगे।

विशेष रूप से नूरजहां आम अपने असाधारण आकार के लिए जाना जाता है। इसका एक फल तीन से साढ़े तीन किलोग्राम तक वजन का हो सकता है, जिससे यह देश की सबसे अनोखी आम की किस्मों में शामिल है।

अन्य उत्पादों के लिए भी भेजे गए प्रस्ताव:

  1. उज्जैन की इमली 
  2. आलीराजपुर का अचारी आम 
  3. मालवा का सफेद प्याज 
  4. झाबुआ का दाल पानिया 
  5. मंदसौर का देशी जीरा 
  6. बुरहानपुर की जलेबी 
  7. अशोकनगर की खिरनी 

किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम: उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग का मानना है कि GI टैग केवल उत्पादों की पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह किसानों को अधिक लाभकारी खेती अपनाने, मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग और निर्यात से जोड़ने का प्रभावी माध्यम भी बनेगा। आधुनिक तकनीक, गुणवत्तायुक्त रोपण सामग्री, सूक्ष्म सिंचाई और खाद्य प्रसंस्करण के विस्तार के साथ यह पहल राज्य के किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

FAQs:

1. GI टैग क्या होता है?

GI (Geographical Indication) टैग किसी उत्पाद की भौगोलिक पहचान और विशेष गुणवत्ता का कानूनी प्रमाण होता है।

2. मध्य प्रदेश को कितने नए GI टैग मिले हैं?

मध्य प्रदेश को एक साथ 12 उद्यानिकी उत्पादों के लिए GI टैग प्राप्त हुआ है।

3. GI टैग मिलने से किसानों को क्या लाभ होगा?

बेहतर बाजार, प्रीमियम कीमत, नकली उत्पादों से सुरक्षा और निर्यात के नए अवसर मिलेंगे।

4. कौन-सा उत्पाद सबसे अधिक चर्चा में है?

गुना का कुम्भराज धनिया और आलीराजपुर का नूरजहां आम अपनी विशेष गुणवत्ता और पहचान के कारण सबसे अधिक चर्चा में हैं।

5. 2030 तक मध्य प्रदेश का क्या लक्ष्य है?

राज्य सरकार का लक्ष्य 2030 तक उद्यानिकी फसलों का क्षेत्रफल बढ़ाकर 30 लाख हेक्टेयर करना और किसानों की आय में वृद्धि करना है।

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