मध्यप्रदेश आज आत्मनिर्भरता, कृषि समृद्धि और तेज आर्थिक विकास का सशक्त प्रतीक बन चुका है। यह परिवर्तन मध्यप्रदेश सरकार द्वारा संभव हो पाया है, आज मध्यप्रदेश न केवल विकास दर के मामले में अग्रणी राज्यों में शामिल है, बल्कि खाद्यान्न उत्पादन में भी देश में एक नई पहचान बना चुका है। यही कारण है कि भारत का हृदय प्रदेश अब देश का नया ‘फूड-बास्केट’ कहलाने लगा है।
मध्यप्रदेश सरकार ने कहा है कि कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों में प्रदेश ने जो असाधारण प्रगति की है, उसमें किसानों की भूमिका सबसे अहम है। बीते वर्षों में कृषि उत्पादन, सिंचाई विस्तार और किसानों की आय बढ़ाने के क्षेत्र में मिली उपलब्धियों ने मध्यप्रदेश को देश का नया फूड-बास्केट बना दिया है। राज्य की विकास दर अब डबल डिजिट में पहुंच चुकी है, जिसमें कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों का योगदान सबसे अधिक है। उन्होंने कहा कि सरकार ने खेती को लाभ का व्यवसाय बनाने का संकल्प लिया है। सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, पर्याप्त बिजली आपूर्ति, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी, भावांतर भुगतान योजना और कृषि यंत्रीकरण ने किसानों के जीवन में खुशहाली लाई है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि आज मध्यप्रदेश गेहूं, चना, मसूर, सोयाबीन और तिलहन उत्पादन में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो चुका है। पंजाब और हरियाणा जैसे परंपरागत कृषि सम्पन्न राज्यों को कई फसलों के उत्पादन में पीछे छोड़ना किसानों की मेहनत और सरकार की संवेदनशील नीतियों का परिणाम है। कृषि के साथ-साथ डेयरी, पशुपालन, मत्स्य पालन और खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्रों में भी प्रदेश ने नई ऊंचाइयां हासिल की हैं।
वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP), एग्रो व फूड प्रोसेसिंग इकाइयां और कोल्ड स्टोरेज चेन जैसे प्रयास किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने में सहायक सिद्ध हो रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है—हर खेत तक पानी, हर किसान तक प्रगति और हर घर तक समृद्धि।
कभी सीमित सिंचाई साधन, अस्थिर बिजली आपूर्ति और कमजोर अवसंरचना के कारण मध्यप्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था संघर्ष कर रही थी। किसानों की आय सीमित थी और ग्रामीण जीवन में अनेक कठिनाइयां थीं। लेकिन बीते दो दशकों में तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। सरकार ने कृषि और ग्रामीण विकास को नीति के केंद्र में रखकर ऐसे निर्णय लिए, जिनसे प्रदेश की दिशा और दशा दोनों बदल गईं। हालिया आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार मध्यप्रदेश ने लगभग 24 प्रतिशत की विकास दर दर्ज की है, जो राष्ट्रीय औसत से कहीं अधिक है।
आज मध्यप्रदेश गेहूं, धान, चना, मसूर, सरसों और सोयाबीन उत्पादन में अग्रणी है। गेहूं उत्पादन में प्रदेश देश का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य बन चुका है। दलहन और तिलहन उत्पादन ने किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की है। देश के कुल चना उत्पादन में मध्यप्रदेश का योगदान लगभग 30 प्रतिशत है। धान उत्पादन में भी बालाघाट, बैतूल, मंडला, सिवनी और डिंडोरी जैसे जिले नए केंद्र बनकर उभरे हैं, जहां से देश के विभिन्न हिस्सों में खाद्यान्न की आपूर्ति की जा रही है।
नया मध्यप्रदेश, नई पहचान: आज मध्यप्रदेश आत्मविश्वास के साथ विकास की नई कहानी लिख रहा है। गांव से शहर और खेत से बाजार तक परिवर्तन की लहर साफ दिखाई दे रही है। प्रदेश के किसान अब केवल अन्नदाता नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सक्रिय भागीदार बन चुके हैं। किसानों के लिए सोलर पंप जैसी योजनाएं ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में भी नया रास्ता खोल रही हैं। किसानों के परिश्रम और सरकार की किसान हितैषी नीतियों ने मध्यप्रदेश को उस मुकाम पर पहुंचा दिया है, जिसकी कल्पना कभी दूर की कौड़ी लगती थी।
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