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लोहड़ी 2026: खेतों से घरों तक खुशहाली, तिल, गुड़ और मूंगफली के साथ नई फसल का उत्सव है लोहड़ी

लोहड़ी
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लोहड़ी केवल एक पारंपरिक पर्व नहीं, बल्कि खेती और किसान जीवन से गहराई से जुड़ा उत्सव है। यह त्योहार अच्छी फसल के लिए प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और आने वाले कृषि वर्ष के लिए समृद्धि की कामना करने का अवसर देता है। खासतौर पर गेहूं की फसल से जुड़े क्षेत्रों में लोहड़ी का विशेष महत्व है, क्योंकि अच्छी पैदावार किसानों के लिए बेहतर आय की उम्मीद लेकर आती है। जनवरी की ठंडी रातों में पवित्र अग्नि के चारों ओर परिवार के सदस्य एकत्र होकर तिल, मूंगफली, रेवड़ी और गुड़ अर्पित करते हैं, जो खुशहाली और सम्पन्नता का प्रतीक माना जाता है।

खेतों से घरों तक खुशी: उत्तर भारत में लोहड़ी का रंग:

आज उत्तर भारत के कई राज्यों में लोहड़ी पूरे उत्साह के साथ मनाई जा रही है। यह पर्व सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि उस सांस्कृतिक आत्मा का प्रतीक है, जहां के खेत-खलिहान पूरे देश का पेट भरते हैं। विशेष रूप से पंजाब में हर घर में उत्सव का माहौल देखने को मिलता है। घर में नई बहू के आगमन या किसी नए मेहमान की खुशी को लोहड़ी के साथ दोहरे उल्लास में मनाया जाता है। कृषि के दृष्टिकोण से भी यह पर्व नई फसल की उम्मीदों और परिवार के साथ बिताए सुखद पलों का उत्सव बन जाता है।

सर्दियों के अंत और नई उम्मीदों की शुरुआत का पर्व:

हर साल 14 जनवरी को मनाई जाने वाली लोहड़ी सर्दियों के अंत और लंबे दिनों की शुरुआत का संकेत देती है। अलाव के चारों ओर घूमते हुए लोग न केवल पारंपरिक सामग्री अर्पित करते हैं, बल्कि यह विश्वास भी जताते हैं कि नया साल जीवन में नई उम्मीदें और खुशियां लेकर आएगा। लोहड़ी की शुभकामनाएं रिश्तों में अपनापन और गर्माहट घोलने का माध्यम बनती हैं। पंजाब, हरियाणा और दिल्ली सहित उत्तर भारत के कई हिस्सों में यह पर्व सामूहिक उल्लास और मेल-जोल का खास अवसर माना जाता है।

गेहूं की खुशहाली और प्रकृति के प्रति आभार का उत्सव लोहड़ी:

लोहड़ी का महत्व केवल रीति-रिवाजों तक सीमित नहीं है। यह अच्छी फसल के लिए प्रकृति को धन्यवाद देने और आने वाले मौसम में बेहतर उत्पादन की कामना करने का पर्व है। खेती से जुड़ा यह त्योहार विशेष रूप से गेहूं की फसल के महत्व को रेखांकित करता है। इस अवसर पर परिवार के बुजुर्ग मौसम, खेती और सामाजिक एकता से जुड़ी कहानियों के माध्यम से नई पीढ़ी को परंपराओं का महत्व समझाते हैं।

तिल, मूंगफली और गुड़ की मिठास: लोहड़ी का पारंपरिक उत्सव अलाव के चारों ओर होता है, जहां लोग तिल, मूंगफली और गुड़ अर्पित कर लोकगीत गाते हैं। बच्चों के लिए यह पर्व खास आकर्षण का केंद्र होता है। ढोल की थाप पर नृत्य, पड़ोसियों से मेल-मिलाप और मिठाइयों के बिना लोहड़ी का जश्न अधूरा माना जाता है। इस तरह लोहड़ी एकता, उम्मीद और खुशहाली का संदेश लेकर हर घर में उल्लास भर देती है।

FAQs:

1. लोहड़ी का त्योहार कब मनाया जाता है?
लोहड़ी हर साल 14 जनवरी को मनाया जाता है, जो सर्दियों के अंत और लंबे दिनों की शुरुआत का संकेत देता है।

2. लोहड़ी का कृषि जीवन में क्या महत्व है?
यह त्योहार किसानों द्वारा प्रकृति को धन्यवाद देने और अच्छी फसल की कामना करने का प्रतीक है।

3. लोहड़ी पर कौन-कौन से पारंपरिक खाद्य पदार्थ अर्पित किए जाते हैं?
तिल, मूंगफली, रेवड़ी और गुड़ लोहड़ी के मुख्य पारंपरिक खाद्य पदार्थ हैं।

4. Khetivyapar किसान समुदाय को कैसे सहायता करता है?
Khetivyapar किसानों को खेती से जुड़ी नवीनतम जानकारी, बाजार की अपडेट और तकनीकी सहायता प्रदान करता है।

5. लोहड़ी क्यों उत्तर भारत में खासतौर पर मनाई जाती है?
उत्तर भारत में गेहूं की खेती प्रमुख है और लोहड़ी नए कृषि सत्र की शुरुआत का प्रतीक है, इसलिए इसे यहां बड़े उत्साह से मनाया जाता है।

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