नए साल 2026 की शुरुआत के साथ ही केंद्र सरकार ने उर्वरक सब्सिडी व्यवस्था में एक बड़ा और अहम बदलाव किया है। देश की सबसे बड़ी सब्सिडी योजनाओं में शामिल खाद सब्सिडी को अब पूरी तरह डिजिटल प्रणाली के तहत लाया गया है। लगभग ₹2 लाख करोड़ की सालाना उर्वरक सब्सिडी अब एकीकृत ई-बिल सिस्टम के माध्यम से प्रोसेस की जाएगी, जिससे भुगतान, निगरानी और पारदर्शिता में बड़ा सुधार होने की उम्मीद है।
जनवरी 2026 के पहले दिन उर्वरक विभाग ने ऑनलाइन सब्सिडी प्रोसेसिंग के लिए इस नई व्यवस्था की औपचारिक शुरुआत की। नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने इस डिजिटल सिस्टम का उद्घाटन किया। इस प्रणाली के लागू होने के बाद खाद कंपनियों के सब्सिडी क्लेम, भुगतान और निगरानी की पूरी प्रक्रिया एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगी।
केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा ने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया और विकसित भारत के विजन को मजबूत करती है। उन्होंने बताया कि उर्वरक सब्सिडी का डिजिटल रूपांतरण पारदर्शिता, जवाबदेही और कार्यकुशलता बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा सुधार है, जिसका सीधा लाभ खाद कंपनियों के साथ-साथ किसानों को भी मिलेगा।
उर्वरक सचिव रजत कुमार मिश्र ने कहा कि यह बदलाव केवल कागजी बिलों को खत्म करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे विभाग की पूरी वित्तीय कार्यप्रणाली आधुनिक बनेगी। अब कच्चे माल की आपूर्ति से लेकर अंतिम उत्पाद और सब्सिडी भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया को एक ही सिस्टम पर ऑनलाइन ट्रैक किया जा सकेगा। इससे न केवल निगरानी बेहतर होगी, बल्कि नीति निर्माण में भी सहूलियत मिलेगी।
नई व्यवस्था के तहत उर्वरक विभाग के इंटीग्रेटेड फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम को वित्त मंत्रालय के पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (PFMS) से जोड़ दिया गया है। मुख्य लेखा नियंत्रक संतोष कुमार के अनुसार, इस तकनीकी एकीकरण से सभी भुगतान सुरक्षित, ट्रेस योग्य और ऑडिट के लिहाज से अधिक मजबूत हो जाएंगे। हर लेनदेन का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा, जिससे किसी भी तरह की गड़बड़ी की संभावना काफी हद तक कम हो जाएगी।
संयुक्त सचिव (वित्त एवं लेखा) मनोज सेठी ने बताया कि ई-बिल सिस्टम के लागू होने से सब्सिडी भुगतान में होने वाली देरी की समस्या खत्म होगी। अब साप्ताहिक आधार पर सब्सिडी समय पर जारी की जा सकेगी। खाद कंपनियां अपने क्लेम ऑनलाइन जमा कर सकेंगी और रियल-टाइम में भुगतान की स्थिति भी देख पाएंगी।
मैन्युअल फॉलो-अप से मिलेगी मुक्ति: इस नई डिजिटल व्यवस्था से दफ्तरों के चक्कर लगाने और मैन्युअल फॉलो-अप की जरूरत भी खत्म हो जाएगी। कार्यक्रम में उर्वरक विभाग और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। एनआईसी द्वारा विकसित इस प्रणाली को मजबूत वित्तीय नियंत्रण और पारदर्शी प्रशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
FAQs:
Q1. उर्वरक सब्सिडी का नया डिजिटल सिस्टम कब लागू हुआ?
1 जनवरी 2026 से यह प्रणाली लागू हुई है।
Q2. ई-बिल सिस्टम से सबसे ज्यादा फायदा किसे होगा?
खाद कंपनियों और किसानों दोनों को।
Q3. क्या अब सब्सिडी भुगतान में देरी नहीं होगी?
हां, साप्ताहिक और समयबद्ध भुगतान संभव होगा।
Q4. PFMS से जुड़ने का क्या लाभ है?
भुगतान सुरक्षित, ट्रैक योग्य और पारदर्शी होंगे।
Q5. क्या किसानों को कोई अलग प्रक्रिया करनी होगी?
नहीं, किसानों को अप्रत्यक्ष रूप से समय पर खाद और बेहतर आपूर्ति का लाभ मिलेगा।