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रासायनिक खेती छोड़ प्राकृतिक खेती की ओर क्यों बढ़ रहे हैं किसान?

प्राकृतिक खेती
प्राकृतिक खेती

रासायनिक खेती को छोड़कर प्राकृतिक खेती अपनाने की दिशा में किसान तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। सीमित संसाधनों और घर पर तैयार किए गए जैविक उर्वरकों के उपयोग से भी बेहतर, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन संभव हो रहा है। प्राकृतिक खेती की सकारात्मक परिणामों को देखकर क्षेत्र के अन्य किसान भी रासायनिक खाद और कीटनाशकों से दूरी बनाकर टिकाऊ खेती की ओर प्रेरित हो रहे हैं। कृषि विभाग के सहयोग से कला बाई आज स्थानीय किसानों के लिए एक ‘फार्म गुरु’ की भूमिका निभा रही हैं और प्राकृतिक खेती के प्रसार में सक्रिय योगदान दे रही हैं।

कम लागत, अधिक लाभ और पर्यावरण संरक्षण:

प्राकृतिक खेती न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि किसानों को कम लागत में पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण उपज उपलब्ध कराने का प्रभावी माध्यम भी है। इस पद्धति से रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर निर्भरता कम होती है, मिट्टी की जैविक उर्वरता बढ़ती है और जल संरक्षण को बढ़ावा मिलता है। किसान घनजीवामृत, जीवामृत, बीजामृत, नीमास्त्र, वर्मी कम्पोस्ट, मल्चिंग और मिश्रित फसल प्रणाली जैसी तकनीकों को अपनाकर खेती को अधिक टिकाऊ बना रहे हैं। इन उपायों से फसलों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ी है और उत्पादन लागत में लगभग 30 से 40 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई है।

लागत घटी, उपज और गुणवत्ता में सुधार:

किसान का कहना है कि पहले रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर प्रति एकड़ 8 से 10 हजार रुपये तक खर्च आता था, जबकि अब घरेलू स्तर पर तैयार घनजीवामृत और नीमास्त्र के उपयोग से यह लागत घटकर मात्र 1,500 से 2,000 रुपये प्रति एकड़ रह गई है। इसके साथ ही उपज में 10 से 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है और फसल की गुणवत्ता भी पहले की तुलना में बेहतर हुई है। उनकी सफलता को देखकर आसपास के कई किसान प्राकृतिक खेती की जानकारी लेकर इस पद्धति को अपनाने लगे हैं।

गोबर गैस संयंत्र से खाद और ऊर्जा का दोहरा फायदा:

गोबर गैस संयंत्र स्वच्छ ऊर्जा के साथ-साथ जैविक खाद का भी महत्वपूर्ण स्रोत बनकर उभर रहा है। कृषि विभाग की योजना के तहत स्थापित गैस संयंत्र से निकलने वाली स्लरी का उपयोग जबलपुर जिले की सिहोरा तहसील के ग्राम फनवानी के किसान पूरी तरह जैविक खाद के रूप में कर रहे हैं। यह स्लरी नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश से भरपूर होती है, जिससे मिट्टी की उर्वरता में उल्लेखनीय सुधार होता है और रासायनिक खाद की आवश्यकता काफी हद तक समाप्त हो जाती है।

FAQs:

Q1. प्राकृतिक खेती क्या है?
प्राकृतिक खेती वह पद्धति है जिसमें रासायनिक खाद और कीटनाशकों का उपयोग नहीं किया जाता।

Q2. प्राकृतिक खेती में लागत कितनी कम होती है?
इससे खेती की लागत लगभग 30–40% तक कम हो जाती है।

Q3. क्या प्राकृतिक खेती से उपज घटती है?
नहीं, सही तकनीक अपनाने पर उपज 10–15% तक बढ़ सकती है।

Q4. प्राकृतिक खेती में कौन-कौन से इनपुट उपयोग होते हैं?
घनजीवामृत, जीवामृत, बीजामृत, नीमास्त्र और वर्मी कम्पोस्ट प्रमुख हैं।

Q5. प्राकृतिक खेती की जानकारी कहां से लें?
कृषि विभाग और Khetivyapar जैसे भरोसेमंद प्लेटफॉर्म से मार्गदर्शन लिया जा सकता है।

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