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मानसून के बाद 3 चक्रवाती सिस्टम का अनुमान, PDI 83% ज्यादा; MP समेत कई राज्यों में बारिश

मानसून के बाद सक्रिय हो रहे 3 चक्रवाती सिस्टम के चलते कई राज्यों में बारिश का अलर्ट।
मानसून के बाद सक्रिय हो रहे 3 चक्रवाती सिस्टम के चलते कई राज्यों में बारिश का अलर्ट।

मानसून की विदाई के बाद मौसम एक बार फिर करवट ले सकता है। अक्टूबर से दिसंबर 2026 के दौरान उत्तर भारतीय महासागर में करीब तीन उष्णकटिबंधीय चक्रवाती सिस्टम बनने का मौसमी अनुमान सामने आया है। आकलन में इस अवधि की संभावित चक्रवाती गतिविधि का Power Dissipation Index (PDI) पिछले 44 वर्षों के औसत से करीब 83% अधिक रहने का संकेत है।

अक्टूबर-दिसंबर में चक्रवाती गतिविधि बढ़ने का अनुमान:

उत्तर भारतीय महासागर में अक्टूबर से दिसंबर आम तौर पर चक्रवात बनने का महत्वपूर्ण समय माना जाता है। ISRO के आकलन में 2026 के पोस्ट-मानसून सीजन के लिए लगभग तीन ट्रॉपिकल साइक्लोन का अनुमान सामने आया है। रिपोर्टों के अनुसार, इस अवधि के लिए अनुमानित PDI करीब 13.06 × 10⁶ knots³ है, जबकि 1982-2025 के 44 वर्षों का औसत लगभग 7.15 × 10⁶ knots³ बताया गया है। इस अंतर के कारण मौसमी चक्रवाती गतिविधि की संभावित कुल ऊर्जा सामान्य औसत से काफी अधिक रहने का संकेत मिलता है।

PDI क्या बताता है?

Power Dissipation Index यानी PDI उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की गतिविधि और उनसे जुड़ी कुल ऊर्जा का आकलन करने वाला सूचकांक है। इसमें तूफान की तीव्रता और उसके सक्रिय रहने की अवधि जैसे कारकों का योगदान होता है। इसलिए PDI में 83 प्रतिशत की बढ़ोतरी को सीधे "83 प्रतिशत ज्यादा चक्रवात" या "83 प्रतिशत ज्यादा तेज हवाएं" नहीं समझना चाहिए। यह पूरे सीजन की संभावित चक्रवाती ऊर्जा से जुड़ा संकेतक है।

क्या तीनों चक्रवात भारत से टकराएंगे?

अभी ऐसा कहना सही नहीं होगा। मौसमी पूर्वानुमान यह निर्धारित नहीं करता कि कोई चक्रवात किस तारीख को बनेगा, किस दिशा में आगे बढ़ेगा या किस तटीय क्षेत्र में लैंडफॉल करेगा। किसी सिस्टम के बनने के बाद उसकी वास्तविक स्थिति, समुद्र की सतह का तापमान, हवाओं की दिशा और ऊपरी वायुमंडलीय परिस्थितियों के आधार पर उसके मार्ग और तीव्रता का पूर्वानुमान लगाया जाता है। उत्तर भारतीय महासागर में बंगाल की खाड़ी और अरब सागर दोनों चक्रवाती गतिविधि के क्षेत्र हैं। 

चक्रवात की स्थिति बनने पर क्या हो सकते हैं प्रभाव?

यदि कोई मजबूत चक्रवाती सिस्टम तटीय क्षेत्र के करीब आता है, तो उसके प्रभाव में भारी या बहुत भारी बारिश, तेज हवाएं, समुद्र में ऊंची लहरें और तटीय इलाकों में जलभराव जैसी स्थितियां बन सकती हैं। निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है और सड़क, रेल, बिजली तथा संचार सेवाओं पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि, इन प्रभावों की वास्तविक तीव्रता चक्रवात के बनने और उसके मार्ग स्पष्ट होने के बाद ही बेहतर तरीके से आंकी जा सकेगी।

अभी देश के कई हिस्सों में बारिश का दौर:

हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में 17-20 सितंबर के दौरान कुछ स्थानों पर बारिश हो सकती है। पंजाब में 18-19 सितंबर, पश्चिमी राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 17-19 सितंबर तथा पूर्वी उत्तर प्रदेश में 17-21 सितंबर तक छिटपुट बारिश की संभावना है। 17 सितंबर को पंजाब तथा हरियाणा-चंडीगढ़-दिल्ली में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं। हवा की गति 40-50 किमी प्रति घंटे तक और झोंकों के साथ 60 किमी प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना है। पूर्वी राजस्थान में 17-19 सितंबर के दौरान 30-40 किमी प्रति घंटे की हवाएं चल सकती हैं, जिनके झोंके 50 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं।

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मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में मौसम सक्रिय:

मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी अगले कुछ दिनों तक मौसम सक्रिय रह सकता है। पश्चिमी मध्य प्रदेश में 17 सितंबर तथा 20-22 सितंबर को कुछ स्थानों पर बारिश की संभावना है। वहीं 18-19 सितंबर को पश्चिमी मध्य प्रदेश में कई स्थानों पर बारिश हो सकती है। पूर्वी मध्य प्रदेश में 17-18 सितंबर को कई स्थानों पर बारिश तथा 19-22 सितंबर के दौरान कुछ स्थानों पर बारिश होने की संभावना है।
विदर्भ में 17-21 सितंबर तक कुछ स्थानों पर बारिश और 22 सितंबर को कई स्थानों पर बारिश हो सकती है। छत्तीसगढ़ में 17-18 सितंबर को कुछ स्थानों पर तथा 19-22 सितंबर के दौरान कई स्थानों पर बारिश की संभावना है।

FAQs:

1. 2026 में कितने चक्रवात बनने का अनुमान है?

अक्टूबर से दिसंबर 2026 के दौरान उत्तर भारतीय महासागर में करीब तीन उष्णकटिबंधीय चक्रवाती सिस्टम बनने का मौसमी अनुमान सामने आया है।

2. PDI 83% ज्यादा होने का क्या मतलब है?

PDI में करीब 83% की बढ़ोतरी का मतलब यह नहीं है कि चक्रवातों की संख्या 83% ज्यादा होगी। यह पूरे सीजन की संभावित चक्रवाती ऊर्जा और गतिविधि से जुड़ा सूचकांक है।

3. क्या 2026 के अनुमानित तीनों चक्रवात भारत से टकराएंगे?

ऐसा अभी नहीं कहा जा सकता। मौसमी पूर्वानुमान केवल संभावित गतिविधि का संकेत देता है। चक्रवात बनने के बाद ही उसके रास्ते और लैंडफॉल की बेहतर जानकारी मिलती है।

4. उत्तर भारतीय महासागर में चक्रवात कहां बन सकते हैं?

उत्तर भारतीय महासागर में बंगाल की खाड़ी और अरब सागर दोनों प्रमुख चक्रवाती गतिविधि वाले क्षेत्र हैं।

5. चक्रवात आने पर भारत में क्या असर हो सकता है?

मजबूत चक्रवात के तटीय क्षेत्र के करीब आने पर भारी बारिश, तेज हवाएं, ऊंची समुद्री लहरें, जलभराव और निचले इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति बन सकती है। प्रभावित क्षेत्रों में बिजली, सड़क और संचार सेवाओं पर भी असर पड़ सकता है।

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