संभावित एल नीनो प्रभाव और दक्षिण-पश्चिम मानसून की स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने किसानों के हितों की सुरक्षा के लिए व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसानों को घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि केंद्र और राज्य सरकारें पूरी सतर्कता के साथ सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर रही हैं।
केंद्रीय मंत्री ने उन राज्यों और जिलों में विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं, जहां सामान्य से कम वर्षा, लंबे शुष्क दौर या एल नीनो का अधिक प्रभाव पड़ने की संभावना है। उन्होंने कहा कि जिला स्तर तक आकस्मिक कार्ययोजनाओं को सक्रिय किया जाए और इन्हें केवल कागजी दस्तावेज न मानकर जमीनी स्तर पर प्रभावी रूप से लागू किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्थानीय परिस्थितियों, जल संसाधनों, फसल पैटर्न, बीज उपलब्धता और वर्षा की स्थिति को ध्यान में रखते हुए क्षेत्र विशेष के लिए व्यावहारिक रणनीति तैयार की जाए।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार का मुख्य उद्देश्य किसानों तक समय पर सलाह, गुणवत्तापूर्ण बीज और आवश्यक संसाधन पहुंचाना है। जहां आवश्यकता हो, वहां वैकल्पिक फसलों, देरी से बुवाई की रणनीतियों और सूखा सहनशील किस्मों को बढ़ावा दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि किसानों तक मोबाइल संदेश, कृषि परामर्श, मौसम चेतावनी और फसल संबंधी जानकारी तेजी से पहुंचाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म और संचार व्यवस्था को और मजबूत बनाया जाएगा।
बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार देश के प्रमुख जलाशयों में वर्तमान जल स्तर सामान्य से बेहतर स्थिति में है। उपलब्ध आकलन के मुताबिक जलाशयों में जल भंडारण इस अवधि के सामान्य स्तर का लगभग 127 प्रतिशत है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह स्थिति खरीफ सीजन के दौरान सिंचाई आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और खेतों में नमी की कमी के जोखिम को काफी हद तक कम करेगी।
बैठक में बताया गया कि खरीफ और रबी दोनों मौसमों के लिए बीजों की उपलब्धता आवश्यकता से अधिक है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए राष्ट्रीय बीज रिजर्व की व्यवस्था भी की गई है। शिवराज सिंह चौहान ने बीजों की गुणवत्ता पर विशेष जोर देते हुए कहा कि किसानों तक केवल प्रमाणित और उच्च गुणवत्ता वाले बीज ही पहुंचने चाहिए। साथ ही, कम अवधि और कम पानी में तैयार होने वाली फसल किस्मों की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाए।
ग्रामीण विकास तंत्र की भूमिका पर चर्चा करते हुए केंद्रीय मंत्री ने खेतों में नमी संरक्षण, जल संचयन, फार्म पॉन्ड निर्माण और स्थानीय जल संरचनाओं को मजबूत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रभावी जल प्रबंधन और वैज्ञानिक तकनीकों के उपयोग से कम वर्षा की स्थिति में भी फसलों को काफी हद तक सुरक्षित रखा जा सकता है।
कीट एवं रोग प्रबंधन की अग्रिम तैयारी:
बैठक में बदलते मौसम के कारण बढ़ने वाले कीटों और रोगों पर भी चर्चा हुई। केंद्रीय मंत्री ने निर्देश दिए कि संभावित रोगों और कीट प्रकोप की पहले से पहचान कर निगरानी व्यवस्था मजबूत की जाए तथा राज्यों और किसानों को समय पर उपचार संबंधी सलाह उपलब्ध कराई जाए।
विभागों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता: शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मौसम, जल, बीज, सिंचाई, फसल प्रबंधन और ग्रामीण विकास से जुड़े विभागों को अलग-अलग नहीं बल्कि एकीकृत रणनीति के तहत काम करना होगा। साझा आंकड़ों, संयुक्त समीक्षा और बेहतर समन्वय से ही राज्यों और जिलों में प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकती है।
FAQs:
1. एल नीनो प्रभाव क्या होता है?
एल नीनो प्रभाव एक जलवायु घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर के तापमान में वृद्धि के कारण दुनिया के कई हिस्सों में मौसम प्रभावित होता है और भारत में मानसून कमजोर पड़ सकता है।
2. दक्षिण-पश्चिम मानसून का किसानों पर क्या असर पड़ता है?
दक्षिण-पश्चिम मानसून भारत की अधिकांश खेती के लिए मुख्य जल स्रोत है। इसकी अच्छी वर्षा से फसल उत्पादन बेहतर होता है।
3. सरकार किसानों के लिए कौन-कौन सी तैयारियां कर रही है?
सरकार बीज उपलब्धता, जल संरक्षण, वैकल्पिक फसल रणनीति, मौसम सलाह और सिंचाई प्रबंधन जैसी तैयारियां कर रही है।
4. राष्ट्रीय बीज रिजर्व क्या है?
राष्ट्रीय बीज रिजर्व आपातकालीन परिस्थितियों में किसानों को पर्याप्त मात्रा में गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने की व्यवस्था है।
5. Khetivyapar किसानों की कैसे मदद करता है?
Khetivyapar किसानों को कृषि समाचार, मौसम अपडेट, सरकारी योजनाओं, मंडी भाव और आधुनिक खेती तकनीकों की जानकारी प्रदान करता है।