बिहार सरकार ने पशुपालन, डेयरी और गन्ना आधारित कृषि अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में 24 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इनमें पशुपालकों के बैंक लोन के ब्याज पर 100% सब्सिडी, कोसी क्षेत्र में डेयरी विकास की 8 परियोजनाएं और नवादा के वारिसलीगंज में ₹500 करोड़ से अधिक निवेश वाली नई चीनी मिल की स्थापना प्रमुख हैं।
कैबिनेट ने मुख्यमंत्री गो-धन विकास ऋण योजना को मंजूरी दी है। इसके तहत पात्र पशुपालकों को बैंक से लिए गए ऋण के ब्याज पर 100 प्रतिशत सब्सिडी दी जाएगी। यानी योजना के तहत लाभुकों को ब्याज का भुगतान नहीं करना होगा और उन्हें ऋण की मूल राशि चुकानी होगी। योजना के माध्यम से उन्नत नस्ल की गाय या भैंस के जरिए डेयरी गतिविधियों को बढ़ावा देने का प्रावधान बताया गया है।
इस योजना के लिए ₹1,600 करोड़ से अधिक की राशि मंजूर किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसका उद्देश्य दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के साथ पशुपालन और डेयरी को ग्रामीण आय एवं रोजगार से जोड़ना है। योजना की पात्रता, अधिकतम ऋण राशि और आवेदन प्रक्रिया से जुड़ी विस्तृत जानकारी संबंधित विभाग की ओर से जारी की जानी बाकी हो सकती है।
कैबिनेट ने कोसी क्षेत्र में डेयरी विकास की आठ परियोजनाओं को भी मंजूरी दी है। इनके लिए ₹126.07 करोड़ स्वीकृत किए गए हैं। इन परियोजनाओं के तहत 500 नई दुग्ध सहकारी समितियों के गठन के साथ डेयरी, मिल्क चिलिंग प्लांट और Bulk Milk Cooling Units (BMCUs) जैसी सुविधाओं के विकास पर काम किया जाएगा। इससे दूध के संग्रह, शीतकरण और डेयरी से जुड़ी आधारभूत व्यवस्था को मजबूत करने का लक्ष्य है।
बिहार सरकार ने नवादा जिले के वारिसलीगंज में नई चीनी मिल स्थापित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। परियोजना में ₹500 करोड़ से अधिक के निवेश की संभावना बताई गई है। नई मिल से नवादा के साथ नालंदा, शेखपुरा और जमुई के गन्ना किसानों को स्थानीय स्तर पर अपनी उपज बेचने का नया विकल्प मिल सकता है। मिल की स्थापना से गन्ने की खरीद, परिवहन, प्रसंस्करण और इससे जुड़े स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है।
पशु चिकित्सा सेवाओं को मजबूत करने की तैयारी:
कैबिनेट ने बिहार पशु चिकित्सा अवसंरचना एवं सेवा सुदृढ़ीकरण नीति को सैद्धांतिक मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य राज्य में पशुओं के इलाज और पशु चिकित्सा सेवाओं से जुड़े बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है। इससे पशुपालकों को बेहतर पशु स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाएगा।
किसानों और पशुपालकों के लिए क्या मायने रखता है?
इन फैसलों में कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े तीन प्रमुख क्षेत्र सामने आते हैं पशुपालन, डेयरी और गन्ना आधारित उद्योग। गो-धन ऋण योजना में ब्याज सब्सिडी, कोसी में डेयरी इंफ्रास्ट्रक्चर और वारिसलीगंज में नई चीनी मिल से संबंधित फैसले किसानों और पशुपालकों के लिए वित्तीय सहायता, दूध विपणन तथा कृषि-आधारित उद्योगों से जुड़े नए अवसरों की दिशा में नीतिगत कदम हैं। योजना और परियोजनाओं का वास्तविक लाभ पात्रता, क्रियान्वयन और संबंधित विभागों की आगे की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
FAQs:
1. मुख्यमंत्री गो-धन विकास ऋण योजना क्या है?
इस योजना के तहत पात्र पशुपालकों को बैंक ऋण के ब्याज पर 100 प्रतिशत सब्सिडी देने का प्रावधान है।
2. गो-धन ऋण योजना के लिए कितनी राशि मंजूर हुई है?
योजना के लिए ₹1,600 करोड़ से अधिक की राशि मंजूर किए जाने की जानकारी सामने आई है।
3. कोसी क्षेत्र में कितनी डेयरी परियोजनाओं को मंजूरी मिली है?
कैबिनेट ने कोसी क्षेत्र में डेयरी विकास की 8 परियोजनाओं को मंजूरी दी है।
4. नई चीनी मिल कहां स्थापित होगी?
नई चीनी मिल बिहार के नवादा जिले के वारिसलीगंज में स्थापित की जाएगी।
5. इन फैसलों से किसानों को क्या फायदा हो सकता है?
पशुपालकों को ब्याज सब्सिडी, डेयरी क्षेत्र में बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और गन्ना किसानों को स्थानीय स्तर पर उपज बेचने का विकल्प मिल सकता है।