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MP Monsoon Update: कहीं 64% ज्यादा बारिश तो 54% की कमी, भोपाल समेत जिलों में मानसून का बड़ा अंतर

मध्य प्रदेश में बारिश का इंतजार करते किसान; कई जिलों में अब भी सामान्य से कम बारिश।
मध्य प्रदेश में बारिश का इंतजार करते किसान; कई जिलों में अब भी सामान्य से कम बारिश।

मध्य प्रदेश में इस मानसून बारिश का वितरण बेहद असमान रहा है। राजधानी भोपाल में सामान्य से करीब 14% अधिक बारिश दर्ज की गई है, जबकि प्रदेश के 30 जिलों में बारिश अब भी सामान्य से कम है। कुछ जिलों में बारिश की कमी 50% से अधिक है, तो कुछ इलाकों में सामान्य से 60% से ज्यादा बारिश रिकॉर्ड की गई है। ऐसे में मध्य प्रदेश में मानसून की तस्वीर एक जैसी नहीं, बल्कि जिले-दर-जिले काफी अलग नजर आ रही है।

भोपाल में सामान्य से 14% ज्यादा बारिश:

भोपाल में इस मानसून अब तक अच्छी बारिश हुई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, भोपाल जिले में करीब 38.3 इंच और राजधानी शहर में लगभग 43 इंच बारिश दर्ज की गई है। जिले की सामान्य मानसूनी बारिश करीब 33.4 इंच है। इस हिसाब से भोपाल जिले में सामान्य से लगभग 4.9 इंच यानी 14% अधिक बारिश हो चुकी है। लगातार बारिश के कारण शहर और आसपास के क्षेत्रों में कई बार मौसम में तेजी से बदलाव देखने को मिला है।

MP के 30 जिलों में बारिश सामान्य से कम:

जहां भोपाल में बारिश ने सामान्य आंकड़ा पार कर लिया है, वहीं प्रदेश के कई जिलों में मानसून की रफ्तार कमजोर रही है। रिपोर्ट के मुताबिक मध्य प्रदेश में कुल मिलाकर बारिश सामान्य से करीब 6% कम दर्ज की गई है और लगभग 30 जिलों में बारिश की कमी बनी हुई है। बारिश की कमी सभी जिलों में समान नहीं है। कुछ जिलों में सामान्य के मुकाबले कमी काफी अधिक है, जबकि कई इलाकों में मानसून ने सामान्य से ज्यादा पानी बरसाया है।

कुछ जिलों में सामान्य से 60% से ज्यादा बारिश:

दूसरी तरफ, प्रदेश के कुछ जिलों में मानसून ने सामान्य आंकड़े को काफी पीछे छोड़ दिया है। रिपोर्ट में खरगोन और निवाड़ी में सामान्य से करीब 64% अधिक बारिश दर्ज होने का उल्लेख है। वहीं सतना में भी सामान्य से काफी अधिक बारिश हुई है। इस तरह एक ही राज्य में कहीं बारिश की कमी है तो कहीं अत्यधिक बारिश की स्थिति बनी हुई है। इससे जलभराव, फसल नुकसान और मिट्टी की नमी से जुड़ी समस्याएं अलग-अलग क्षेत्रों में अलग रूप ले सकती हैं।

एक ही राज्य में कहीं ज्यादा पानी, कहीं भारी कमी:

मध्य प्रदेश में इस बार मानसून की सबसे बड़ी विशेषता बारिश की कुल मात्रा से ज्यादा उसका असमान वितरण है। जिन क्षेत्रों में बारिश कराने वाले मौसम सिस्टम लंबे समय तक सक्रिय रहे, वहां ज्यादा पानी गिरा। वहीं इन सिस्टम से दूर रहने वाले क्षेत्रों में बारिश का दौर कमजोर रहा। यही वजह है कि प्रदेश का औसत आंकड़ा सामान्य के आसपास होने के बावजूद अलग-अलग जिलों की वास्तविक स्थिति काफी अलग है।

किसानों के लिए क्या मायने रखता है?

बारिश की असमानता का सीधा असर खेती पर पड़ सकता है। जहां ज्यादा बारिश हुई है, वहां किसानों को खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने और फसल में जलभराव रोकने पर ध्यान देना चाहिए। वहीं कम बारिश वाले जिलों में किसानों को मिट्टी की उपलब्ध नमी के अनुसार सिंचाई और फसल प्रबंधन की योजना बनानी चाहिए। पूरे प्रदेश की औसत बारिश देखकर अपने जिले की स्थिति का अनुमान लगाना सही नहीं होगा। किसानों को अपने जिले और ब्लॉक के स्थानीय मौसम पूर्वानुमान के आधार पर खेती से जुड़े फैसले लेने चाहिए।

FAQs:

1. मध्य प्रदेश में इस मानसून बारिश कितनी हुई है?
मध्य प्रदेश में कुल बारिश सामान्य से करीब 6% कम बताई गई है, लेकिन अलग-अलग जिलों में बारिश का वितरण काफी असमान रहा है।

2. भोपाल में सामान्य से कितनी ज्यादा बारिश हुई है?
भोपाल जिले में सामान्य से करीब 14% अधिक बारिश दर्ज की गई है।

3. मध्य प्रदेश में कितने जिलों में बारिश सामान्य से कम है?
करीब 30 जिलों में बारिश सामान्य से कम बनी हुई है।

4. किन जिलों में सामान्य से 60% से ज्यादा बारिश हुई है?
खरगोन और निवाड़ी में सामान्य से करीब 64% अधिक बारिश दर्ज होने की जानकारी है।

5. कम बारिश वाले जिलों में किसानों को क्या करना चाहिए?
किसानों को मिट्टी की नमी देखकर सिंचाई की योजना बनानी चाहिए और अपने जिले के स्थानीय मौसम पूर्वानुमान के आधार पर फसल प्रबंधन करना चाहिए।

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