भावांतर भुगतान योजना 2025 के अंतर्गत सोयाबीन उत्पादक किसानों के लिए मॉडल रेट लगातार जारी किए जा रहे हैं। इसी क्रम में गुरुवार, 25 दिसंबर को सोयाबीन का मॉडल रेट 4,235 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया गया। यह दर उन किसानों पर लागू होगी, जिन्होंने अपनी उपज निर्धारित मंडी प्रांगणों में विक्रय की है।
राज्य सरकार द्वारा जारी मॉडल रेट के अनुसार ही किसानों को मिलने वाली भावांतर राशि की गणना की जाएगी। मॉडल रेट और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के बीच के अंतर का भुगतान सरकार द्वारा सीधे किसानों को किया जा रहा है, जिससे किसानों को बाजार मूल्य में गिरावट से राहत मिल सके।
भावांतर योजना के तहत सोयाबीन का पहला मॉडल रेट 7 नवंबर को 4,020 रुपये प्रति क्विंटल जारी किया गया था। इसके बाद नवंबर माह में कीमतों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई और 22 नवंबर को यह 4,285 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया। हालांकि माह के अंतिम दिनों में इसमें मामूली गिरावट आई।
दिसंबर माह में भी मॉडल रेट लगभग स्थिर रहा। 1 से 10 दिसंबर के दौरान दरें 4,210 से 4,240 रुपये प्रति क्विंटल के बीच रहीं। इसके बाद 11 से 24 दिसंबर तक मॉडल रेट में हल्का उतार-चढ़ाव देखा गया।
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि भावांतर योजना के अंतर्गत किसानों को सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य 5,328 रुपये प्रति क्विंटल हर हाल में दिया जाएगा। यदि मंडी में प्राप्त मॉडल रेट MSP से कम रहता है, तो अंतर राशि भावांतर भुगतान के माध्यम से किसानों के खातों में सीधे जमा की जाएगी।
किसानों की आय सुरक्षा की मजबूत पहल: भावांतर योजना किसानों को बाजार की अस्थिरता से सुरक्षा प्रदान करती है और उनकी आय को स्थिर बनाए रखने में अहम भूमिका निभा रही है। इससे किसानों को उचित मूल्य मिलने के साथ-साथ खेती के प्रति भरोसा भी मजबूत हो रहा है।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न):
Q1: भावांतर भुगतान योजना 2025 क्या है?
A1: यह योजना किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य और बाजार मूल्य के बीच के अंतर का भुगतान सरकार द्वारा सीधे देने की पहल है।
Q2: सोयाबीन का मॉडल रेट क्या होता है?
A2: मॉडल रेट वह दर होती है जिसे सरकार बाजार भाव के आधार पर निर्धारित करती है ताकि किसानों को उचित भुगतान मिल सके।
Q3: भावांतर भुगतान कब मिलेगा?
A3: भावांतर राशि का भुगतान मंडी में उपज बिक्री के बाद सीधे किसानों के बैंक खातों में किया जाता है।
Q4: MSP से कम भाव होने पर क्या होगा?
A4: यदि मंडी भाव MSP से कम रहता है, तो सरकार अंतर राशि को भावांतर भुगतान के जरिए सीधे किसानों को देती है।
Q5: Khetivyapar इस योजना में कैसे मदद करता है?
A5: Khetivyapar किसानों को योजना की जानकारी देता है और भावांतर भुगतान प्रक्रिया को समझने तथा लाभ उठाने में सहायता करता है।