खेती में सिंचाई का खर्च कम करने और पानी का बेहतर इस्तेमाल करने के लिए बिहार में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (सूक्ष्म सिंचाई) 2026-27 के तहत आवेदन शुरू किए गए हैं। इस योजना में किसानों को ड्रिप, मिनी/माइक्रो स्प्रिंकलर और पोर्टेबल स्प्रिंकलर जैसी सिंचाई तकनीक लगाने पर सरकारी सहायता दी जाएगी।
खास बात यह है कि लघु और सीमांत किसानों को ड्रिप तथा पोर्टेबल स्प्रिंकलर की Indicative Cost का 55% तक अनुदान मिलेगा। वहीं अन्य किसानों के लिए यह सहायता 45% तय की गई है। योजना का मकसद पानी की बचत के साथ फसल उत्पादन और किसानों की आय बढ़ाना है।
ड्रिप सिंचाई के लिए किसान न्यूनतम 0.5 एकड़ और अधिकतम 12.5 एकड़ तक अनुदान का लाभ ले सकते हैं। पोर्टेबल स्प्रिंकलर के लिए यह सीमा 1 एकड़ से 5 एकड़ तक रखी गई है।
किसान की श्रेणी के हिसाब से अनुदान इस तरह मिलेगा:
नलकूप, कुआं और तालाब के लिए भी सहायता:
योजना में सिर्फ सिंचाई यंत्र ही शामिल नहीं हैं। निजी नलकूप, कुआं और तालाब को भी अन्य हस्तक्षेप वाले घटक में रखा गया है।
इसमें सभी श्रेणी के किसानों को इकाई लागत का 50% सहायतानुदान दिया जाएगा। हालांकि, इसका लाभ लेने के लिए किसान का ड्रिप सिंचाई के लिए आवेदन करना जरूरी है।
जमीन के कागज के बिना नहीं मिलेगा लाभ:
योजना के लिए आवेदन करते समय जमीन से जुड़े दस्तावेज भी देने होंगे। किसान के पास पिछले दो वर्षों से अद्यतन LPC और ऑनलाइन या ऑफलाइन रसीद होनी चाहिए।
इसके अलावा 7 साल से अधिक का लीज पेपर भी नियमानुसार मान्य हो सकता है। इसके लिए ₹1,000 के गैर-न्यायिक स्टांप पर प्रथम श्रेणी के दंडाधिकारी के सामने जमीन देने वाले और लेने वाले के शपथ पत्र से जुड़े दस्तावेज जरूरी होंगे।
पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर मिलेगा अनुदान:
इस योजना में लाभ देने के लिए पहले आओ, पहले पाओ का नियम रखा गया है। इसलिए आवेदन करते समय किसान को जरूरी कागजात और दूसरी औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी।
कंपनी द्वारा पोर्टल पर अपलोड किए गए Estimate और Design पर किसान का हस्ताक्षर भी जरूरी होगा।
सिंचाई उपकरण चुनते समय इन चीजों का रखें ध्यान:
ड्रिप या स्प्रिंकलर सिस्टम लगवाते समय किसानों को उपलब्ध Optional Components का चुनाव भी ध्यान से करना होगा। इनमें हाइड्रो साइक्लोन फिल्टर, फर्टिलाइजर टैंक और वाइन्डर मशीन शामिल हैं।
किसान को अपनी जरूरत के हिसाब से इन विकल्पों का चयन करना होगा।
एक ही जमीन पर 7 साल बाद मिलेगा दोबारा लाभ:
अगर किसी किसान ने किसी भू-खंड पर इस योजना का लाभ पहले लिया है, तो उसी जमीन पर 7 साल पूरे होने के बाद ही दोबारा योजना का लाभ लिया जा सकेगा।
इसलिए आवेदन करने से पहले किसान को संबंधित जमीन पर पहले लिए गए लाभ की जानकारी जरूर देखनी चाहिए।
कार्यादेश मिलने के बाद 30 दिन में जमा करना होगा पैसा:
आवेदन स्वीकृत होने के बाद कार्यादेश जारी किया जाएगा। इसके बाद किसान को 30 दिनों के अंदर अपना कृषक अंश ऑनलाइन जमा करना अनिवार्य होगा।
यह राशि MIS Portal के Integrated Payment माध्यम से Bihar Horticulture Development Society, PMKSY Farmer Share के खाते में जमा करनी होगी। तय समय में किसान अंश जमा नहीं करने पर कार्यादेश अपने आप रद्द हो जाएगा।
काम पूरा होने के बाद खाते में आएगा अनुदान:
कार्यादेश में दी गई शर्तों के अनुसार सिंचाई का काम पूरा करना होगा। काम पूरा होने के बाद संबंधित एजेंसी या किसान को अनुदान की राशि DBT In Cash/In Kind के माध्यम से दी जाएगी।
यानी किसान को आवेदन से लेकर उपकरण की स्थापना और अनुदान मिलने तक योजना में तय प्रक्रिया का पालन करना होगा।
पानी बचाने के साथ खेती की लागत घटाना है उद्देश्य:
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का मुख्य फोकस खेती में पानी के इस्तेमाल को बेहतर बनाना है। सूक्ष्म सिंचाई का क्षेत्र बढ़ाकर जल उपयोग की क्षमता, फसल उत्पादकता और किसानों की आय बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।
ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी तकनीक अपनाने वाले किसान अपनी श्रेणी और निर्धारित क्षेत्र के अनुसार इस योजना में अनुदान का लाभ ले सकते हैं।
FAQs:
1. प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2026-27 में कितना अनुदान मिलेगा?
लघु एवं सीमांत किसानों को ड्रिप और पोर्टेबल स्प्रिंकलर की Indicative Cost का 55% तक अनुदान मिलेगा। अन्य किसानों के लिए यह सहायता 45% है।
2. बिहार में ड्रिप सिंचाई के लिए कितनी जमीन पर लाभ मिलेगा?
ड्रिप सिंचाई के लिए न्यूनतम 0.5 एकड़ और अधिकतम 12.5 एकड़ तक की जमीन पर अनुदान का लाभ लिया जा सकता है।
3. पोर्टेबल स्प्रिंकलर पर कितना अनुदान मिलेगा?
लघु एवं सीमांत किसानों को Indicative Cost का 55% और अन्य किसानों को 45% तक सहायता मिलेगी।
4. क्या नलकूप, कुआं और तालाब के लिए भी अनुदान मिलेगा?
हां, निजी नलकूप, कुआं और तालाब के लिए इकाई लागत का 50% सहायतानुदान दिया जा सकता है। इसके लिए ड्रिप सिंचाई के लिए आवेदन करना जरूरी है।
5. कार्यादेश मिलने के बाद किसान को क्या करना होगा?
कार्यादेश जारी होने के बाद किसान को 30 दिनों के अंदर अपना कृषक अंश ऑनलाइन जमा करना होगा। समय पर राशि जमा नहीं करने पर कार्यादेश रद्द हो सकता है।