मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को मजबूत करने और उनके कारोबार को नई दिशा देने के उद्देश्य से भोपाल में राज्य स्तरीय सम्मेलन आयोजित किया गया। भोपाल के State Agricultural Extension and Training Centre (SIET), बरखेड़ी कलां में आयोजित इस सम्मेलन में दोनों राज्यों के 300 FPOs के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सम्मेलन में FPOs के जरिए कृषि उत्पादों की processing, value addition, marketing और किसानों की आय बढ़ाने की संभावनाओं पर भी अनुभव साझा किए गए।
राज्य स्तरीय सम्मेलन में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से आए करीब 300 Farmer Producer Organizations के प्रतिनिधि शामिल हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता SIET के निदेशक एवं किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के अपर संचालक डी.एल. कोरी ने की। सम्मेलन में FPO प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा किए और कृषि उत्पादों को बाजार से जोड़ने के प्रयासों की जानकारी दी। सम्मेलन के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले 13 FPOs को सम्मानित किया गया।
Damoh Mahila Farmer Producer Organization द्वारा मशरूम के उत्पादन, processing और marketing का काम किया जा रहा है। संगठन का यह मॉडल कृषि उत्पादन के साथ value addition और बाजार से जुड़ाव की संभावनाओं को दर्शाता है। Mandsaur Agro Industry द्वारा अलसी (linseed/flax) के डंठलों से fiber production और marketing का काम किया जा रहा है। यह कृषि अवशेषों के उपयोग और उनसे अतिरिक्त मूल्य तैयार करने का एक उदाहरण है।
छत्तीसगढ़ के कोरबा क्षेत्र के पाली FPO द्वारा हल्दी के उत्पादन के साथ-साथ processing और marketing पर काम किया जा रहा है। इससे किसानों को केवल कच्चे कृषि उत्पाद की बिक्री के बजाय value-added products से जुड़ने का अवसर मिलता है।
सम्मेलन में विभिन्न जिलों से आए किसान प्रतिनिधियों ने FPOs के माध्यम से किए जा रहे कार्यों और अपने अनुभव साझा किए। इस दौरान बैरसिया के किसान नेताओं पदम सिंह ठाकुर और अशोक पटेल तथा मध्य भारत के अध्यक्ष श्री पुन्नूलाल नंदा ने भी अपने विचार रखे। प्रतिनिधियों ने उत्पादन, processing, marketing और किसानों को संगठित बाजार से जोड़ने के अनुभवों पर चर्चा की।
FPOs के लिए ₹300 करोड़ का कारोबार लक्ष्य:
कार्यक्रम के दौरान मध्य भारत Consortium के Chief Executive Officer योगेश द्विवेदी ने वर्ष 2026–27 की वार्षिक योजना को मंजूरी दी। इसके साथ ही चालू वर्ष में सभी Farmer Producer Organizations के लिए ₹300 करोड़ से अधिक का annual business target निर्धारित किया गया है। यह लक्ष्य FPOs को उत्पादन से आगे बढ़कर processing, value addition, branding और market linkage जैसे क्षेत्रों में विस्तार करने के लिए प्रेरित कर सकता है।
FPOs से बदलेगा कृषि कारोबार का मॉडल:
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए योगेश द्विवेदी ने कहा कि आने वाले समय में Farmer Producer Organizations की भूमिका राज्य और देश की GDP में महत्वपूर्ण होने वाली है। FPOs किसानों को सामूहिक रूप से उत्पादन, कृषि inputs की खरीद, processing, storage, branding और marketing से जोड़ने में मदद कर सकते हैं। इससे छोटे और सीमांत किसानों के लिए बाजार तक बेहतर पहुंच और collective business opportunities विकसित करने की संभावनाएं बनती हैं।
FAQs:
1. FPO क्या होता है?
FPO यानी Farmer Producer Organization किसानों का ऐसा संगठन है, जिसमें किसान सामूहिक रूप से उत्पादन, खरीद, processing और marketing जैसे काम कर सकते हैं।
2. भोपाल FPO सम्मेलन में कितने FPOs शामिल हुए?
भोपाल में आयोजित सम्मेलन में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के करीब 300 FPOs के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
3. FPOs के लिए कितना कारोबार लक्ष्य रखा गया है?
वर्ष 2026–27 के लिए सभी FPOs के लिए ₹300 करोड़ से अधिक का annual business target निर्धारित किया गया है।
4. Damoh Mahila FPO क्या काम करता है?
Damoh Mahila FPO मशरूम के production, processing और marketing पर काम कर रहा है।
5. Pali FPO किस कृषि उत्पाद पर काम कर रहा है?
छत्तीसगढ़ के कोरबा क्षेत्र का Pali FPO हल्दी के production, processing और marketing पर काम कर रहा है।