भारत में कपास केवल एक नकदी फसल नहीं, बल्कि कृषि, उद्योग और निर्यात अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार है। खेतों से निकलने वाला कपास धागे, कपड़े और रेडीमेड परिधानों के रूप में देश-विदेश के बाजारों तक पहुंचता है और करोड़ों लोगों की आजीविका से जुड़ा हुआ है। यही कारण है कि कपास को देश में "सफेद सोना (White Gold)" भी कहा जाता है।
देश में लगभग 60 लाख किसान कपास की खेती करते हैं, जबकि 4 से 5 करोड़ लोग जिनिंग, स्पिनिंग, टेक्सटाइल, प्रोसेसिंग और व्यापार जैसे क्षेत्रों में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से इस उद्योग से जुड़े हैं। हाल के वर्षों में केंद्र सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), मिशन फॉर कॉटन प्रोडक्टिविटी और कस्तूरी कॉटन भारत जैसी पहलों ने इस क्षेत्र को नई दिशा देने का प्रयास किया है।
भारत दुनिया में कपास के सर्वाधिक क्षेत्रफल वाला देश है। देश में लगभग 114.84 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की खेती होती है, जो वैश्विक कपास क्षेत्र का करीब 38 प्रतिशत है। हालांकि, कपास उत्पादन का लगभग 62 प्रतिशत हिस्सा वर्षा आधारित खेती पर निर्भर है, जबकि केवल 38 प्रतिशत क्षेत्र सिंचित है। 2024-25 में देश का कपास उत्पादन लगभग 297.24 लाख गांठ (बेल) यानी करीब 50.6 लाख टन रहा। 2025-26 (प्रारंभिक अनुमान) में उत्पादन लगभग 290.91 लाख गांठ (49.5 लाख टन) रहने का अनुमान है। वहीं घरेलू खपत लगभग 328 लाख गांठ रही, जो देश के मजबूत वस्त्र उद्योग को दर्शाती है।
भारत विश्व के प्रमुख कपास निर्यातकों में शामिल है। वर्ष 2024-25 के दौरान देश से लगभग 18 लाख गांठ (0.31 मिलियन मीट्रिक टन) कपास का निर्यात हुआ, जो वैश्विक निर्यात का लगभग 3.37 प्रतिशत है। वित्त वर्ष 2024-25 में कपास एवं कपास आधारित उत्पादों का निर्यात मूल्य लगभग 11.49 अरब अमेरिकी डॉलर रहा।
केंद्र सरकार पहले ही 2026-27 के लिए कपास के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में 557 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि कर चुकी है। कपास किसानों को उचित मूल्य दिलाने के लिए केंद्र सरकार हर वर्ष मध्यम रेशा (Medium Staple) और लंबे रेशा (Long Staple) कपास के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) घोषित करती है। 2025-26 का MSP- मध्यम रेशा कपास: ₹7,710 प्रति क्विंटल, लंबे रेशा कपास: ₹8,110 प्रति क्विंटल। 2026-27 के लिए बढ़ाया गया MSP-मध्यम रेशा कपास: ₹8,267 प्रति क्विंटल, लंबे रेशा कपास: ₹8,667 प्रति क्विंटल। दोनों श्रेणियों में ₹557 प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ी है।
कपास क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम:
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार आधुनिक खेती तकनीकों, वैज्ञानिक अनुसंधान, गुणवत्ता सुधार और सरकारी समर्थन योजनाओं का यह संयुक्त प्रयास भारत के कपास क्षेत्र को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि देश के वस्त्र उद्योग, निर्यात और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी। सरकार का लक्ष्य कपास उत्पादन को टिकाऊ, लाभकारी और जलवायु-अनुकूल बनाकर भारत की "सफेद सोना" अर्थव्यवस्था को और सशक्त करना है।
FAQs:
1. भारत में कपास को "सफेद सोना" क्यों कहा जाता है?
कपास से किसानों, टेक्सटाइल उद्योग और निर्यात को बड़ा आर्थिक लाभ मिलता है, इसलिए इसे "सफेद सोना" कहा जाता है।
2. भारत में कपास की खेती कितने क्षेत्र में होती है?
भारत में लगभग 114.84 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की खेती की जाती है।
3. 2026-27 में कपास का नया MSP कितना है?
मध्यम रेशा कपास का MSP ₹8,267 प्रति क्विंटल और लंबे रेशा कपास का ₹8,667 प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है।
4. भारत का कपास उत्पादन कितना है?
2024-25 में भारत का कपास उत्पादन लगभग 297.24 लाख गांठ रहा, जबकि 2025-26 में करीब 290.91 लाख गांठ रहने का अनुमान है।
5. Khetivyapar के अनुसार कपास किसानों को क्या लाभ मिलेगा?
Khetivyapar के अनुसार बढ़ा हुआ MSP, आधुनिक खेती तकनीक और सरकारी योजनाएं कपास किसानों की आय बढ़ाने और भारत के टेक्सटाइल उद्योग को मजबूत बनाने में मदद करेंगी।