महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र के एकमात्र हिल स्टेशन चिखलदरा में खेती का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। पारंपरिक फसलों की जगह अब किसान नकदी फसल के रूप में स्ट्रॉबेरी की खेती की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो रही है। यह बदलाव न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रहा है, बल्कि क्षेत्र को एक नई पहचान भी दे रहा है।
इस नई खेती की शुरुआत चिखलदरा के पास मोथा गांव के किसान साधुराम पाटिल ने की। उन्होंने सबसे पहले पारंपरिक खेती से हटकर स्ट्रॉबेरी की खेती का प्रयोग किया, जो सफल रहा। उनकी सफलता को देखकर अब क्षेत्र के अन्य किसान भी इस खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं और बेहतर मुनाफे के लिए इसे अपना रहे हैं।
अमरावती जिले के चिखलदरा के किसान गजानन येवले ने भी इस साल पहली बार स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की है। पहले वे चना और गेहूं जैसी पारंपरिक फसलें उगाते थे, लेकिन अब नई फसल से उन्हें बेहतर आमदनी मिल रही है। कृषि विभाग के अनुसार, चिखलदरा का ठंडा मौसम महाबलेश्वर की तरह स्ट्रॉबेरी उत्पादन के लिए अनुकूल है, जिससे यहां इस खेती की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं।
साधुराम पाटिल के मुताबिक, शुरुआत में स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए उन्हें सब्सिडी मिली थी, लेकिन अब बिना सब्सिडी के भी यह खेती लाभकारी साबित हो रही है। सीजन के दौरान रोजाना 4,000 से 5,000 रुपये और अधिकतम 7,000 रुपये तक की बिक्री हो जाती है। किसान खेत पर ही पैकिंग कर सीधे ग्राहकों को स्ट्रॉबेरी बेचते हैं, जिससे बिचौलियों की भूमिका खत्म हो जाती है और मुनाफा सीधे किसानों को मिलता है।
स्ट्रॉबेरी का सीजन करीब ढाई से साढ़े तीन महीने तक चलता है, जिसमें किसान लाखों रुपये तक की कमाई कर लेते हैं। हालांकि, मौसम में अचानक बदलाव होने पर नुकसान की संभावना भी बनी रहती है। चिखलदरा में इसकी खेती नवंबर-दिसंबर में शुरू होती है और मार्च-अप्रैल तक उत्पादन मिलता है। यहां का ठंडा तापमान स्ट्रॉबेरी की गुणवत्ता और स्वाद को बेहतर बनाता है, जिससे इसकी बाजार में मांग बढ़ रही है।
पर्यटन से बढ़ा किसानों का मुनाफा:
चिखलदरा में बढ़ते पर्यटन का भी किसानों को सीधा लाभ मिल रहा है। पर्यटक अब खेतों से ही ताजा स्ट्रॉबेरी खरीद रहे हैं, जिससे किसानों को बेहतर कीमत मिल रही है। इसके अलावा, यहां बन रहा देश का बड़ा स्काईवॉक भी पर्यटन को बढ़ावा दे रहा है, जिसका सकारात्मक असर स्थानीय कृषि पर पड़ रहा है।
पारंपरिक खेती से नकदी फसल की ओर रुझान:
किसान गजानन येवले का कहना है कि पारंपरिक खेती में सीमित मुनाफा होता था, जबकि स्ट्रॉबेरी से अच्छी आय मिल रही है। मोथा गांव से शुरू हुआ यह प्रयोग अब पूरे चिखलदरा क्षेत्र में फैल रहा है और एक नई कृषि क्रांति का रूप ले चुका है। आने वाले समय में चिखलदरा देश के उभरते स्ट्रॉबेरी हब के रूप में अपनी मजबूत पहचान बना सकता है।
FAQs:
Q1. स्ट्रॉबेरी की खेती कब शुरू होती है?
A. इसकी खेती नवंबर-दिसंबर में शुरू होती है।
Q2. स्ट्रॉबेरी का सीजन कितने समय तक रहता है?
A. लगभग 2.5 से 3.5 महीने तक।
Q3. स्ट्रॉबेरी की खेती से कितनी कमाई होती है?
A. किसान रोजाना 4,000 से 7,000 रुपये तक कमा सकते हैं।
Q4. स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए कौन सा मौसम अच्छा है?
A. ठंडा और समशीतोष्ण मौसम सबसे अच्छा होता है।
Q5. क्या स्ट्रॉबेरी की खेती में जोखिम है?
A. हां, मौसम में अचानक बदलाव से नुकसान हो सकता है।