खरीफ 2026 सीजन के बीच देश में सामान्य से 23 प्रतिशत कम बारिश और संभावित अल-नीनो के प्रभाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने कृषि तैयारियों की व्यापक समीक्षा की है। मानसून की प्रगति, खरीफ फसलों की बुवाई, 270 संवेदनशील जिलों की स्थिति, खाद-बीज की उपलब्धता और जल भंडारण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर समीक्षा करते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को राज्यों के साथ लगातार समन्वय बनाए रखने और किसानों तक समय पर उर्वरक एवं बीज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। सरकार का फोकस मौसम संबंधी चुनौतियों के बीच खरीफ उत्पादन को सुरक्षित रखने और किसानों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने पर है।
बैठक में जानकारी दी गई कि 9 जुलाई 2026 तक दक्षिण-पश्चिम मानसून ने राजस्थान, हरियाणा और पंजाब के शेष क्षेत्रों सहित पूरे देश को कवर कर लिया। सामान्यतः मानसून 8 जुलाई तक पूरे देश में पहुंच जाता है, जबकि इस वर्ष यह केवल एक दिन की देरी से पूरे भारत में सक्रिय हुआ। मानसून के पूर्ण विस्तार के बाद अधिकांश राज्यों में खरीफ फसलों की बुवाई के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनी हैं।
समीक्षा के दौरान बताया गया कि 17 जुलाई 2026 तक देश में खरीफ फसलों की बुवाई 658.19 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हो चुकी है। कुल बुवाई क्षेत्र पिछले वर्ष की तुलना में कुछ कम है, लेकिन कई राज्यों में धान, दलहन और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई में सकारात्मक प्रगति दर्ज की गई है।
अल-नीनो और 270 संवेदनशील जिलों पर विशेष निगरानी:
बैठक में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के नवीनतम पूर्वानुमानों, संभावित अल-नीनो परिस्थितियों तथा वर्षा की दृष्टि से चिन्हित 270 संवेदनशील जिलों की स्थिति की विस्तृत समीक्षा की गई। इस दौरान विभिन्न राज्यों में वर्षा की स्थिति, अधिक और कम वर्षा वाले क्षेत्रों, खरीफ बुवाई की प्रगति तथा एनडीवीआई (NDVI) जैसे उपग्रह आधारित संकेतकों के माध्यम से फसलों की स्थिति का भी आकलन किया गया।
देश में सामान्य से 23% कम बारिश दर्ज:
बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार 1 जून से 15 जुलाई 2026 के बीच देश में औसत वर्षा सामान्य से 23 प्रतिशत कम दर्ज की गई। इस अवधि में देशभर में 227 मिमी वर्षा हुई, जबकि सामान्य वर्षा 294.2 मिमी होनी चाहिए थी। क्षेत्रवार वर्षा की स्थिति इस प्रकार रही
खाद और बीज की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश:
बैठक में खरीफ सीजन के लिए उर्वरकों, विशेषकर यूरिया, तथा बीजों की उपलब्धता की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त मात्रा में खाद और बीज उपलब्ध कराए गए हैं तथा राज्यों के साथ समन्वय कर उनकी आपूर्ति की लगातार निगरानी की जा रही है।
केंद्रीय कृषि मंत्री ने निर्देश दिए कि कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs) और राज्य सरकारों के माध्यम से जमीनी स्तर की वास्तविक स्थिति की नियमित जानकारी प्राप्त की जाए। उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुसार समय पर उर्वरक उपलब्ध कराना प्राथमिकता होनी चाहिए और यदि कहीं वितरण व्यवस्था में किसी प्रकार की कमी या बाधा सामने आती है तो उसका तत्काल समाधान सुनिश्चित किया जाए।
कृषि गतिविधियों की होगी निरंतर निगरानी:
केंद्र सरकार ने संकेत दिए हैं कि खरीफ 2026 सीजन के दौरान मानसून, वर्षा, बुवाई, फसलों की स्थिति, खाद-बीज की उपलब्धता और संभावित अल-नीनो प्रभाव की नियमित समीक्षा जारी रहेगी। सरकार का उद्देश्य समय पर आवश्यक निर्णय लेकर किसानों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराना और मौसम संबंधी चुनौतियों के बीच खरीफ उत्पादन को सुरक्षित रखना है।
FAQs:
1. खरीफ 2026 में देश में कितनी कम बारिश हुई है?
1 जून से 15 जुलाई 2026 के बीच देश में सामान्य से 23% कम बारिश दर्ज की गई।
2. 17 जुलाई 2026 तक खरीफ बुवाई कितने क्षेत्र में हुई?
देश में 658.19 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई पूरी हो चुकी है।
3. सरकार किन जिलों पर विशेष निगरानी रख रही है?
संभावित अल-नीनो और कम वर्षा को देखते हुए 270 संवेदनशील जिलों की विशेष निगरानी की जा रही है।
4. क्या किसानों के लिए खाद और बीज की कमी है?
नहीं। सरकार के अनुसार किसानों की जरूरतों के अनुसार खाद-बीज की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।
5. खरीफ 2026 सीजन में सरकार का मुख्य फोकस क्या है?
सरकार का उद्देश्य खरीफ बुवाई, सामान्य से 23% कम बारिश और अल-नीनो जैसी चुनौतियों के बीच किसानों को समय पर सहायता देकर खरीफ उत्पादन को सुरक्षित रखना है।