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ICAR स्थापना दिवस 2026: 43 नई फसल किस्में लॉन्च, 100 क्लाइमेट स्मार्ट विलेज का ऐलान, किसानों तक पहुंचेगी नई कृषि तकनीक

ICAR स्थापना दिवस 2026
ICAR स्थापना दिवस 2026

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के 98वें स्थापना दिवस के अवसर पर केंद्र सरकार ने कृषि क्षेत्र के आधुनिकीकरण और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विकसित भारत 2047 के विजन के अनुरूप कृषि क्षेत्र की नई रणनीति प्रस्तुत करते हुए कहा कि अब खेती का लक्ष्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि गुणवत्ता, जलवायु-अनुकूल तकनीक, वैज्ञानिक नवाचार और किसानों तक आधुनिक शोध का लाभ पहुंचाना होना चाहिए।

इस अवसर पर 43 नई फसल किस्मों, 17 नई कृषि तकनीकों एवं उत्पादों तथा 14 वैज्ञानिक प्रकाशनों का लोकार्पण किया गया। साथ ही देशभर में 100 क्लाइमेट स्मार्ट विलेज विकसित करने और ICAR की तकनीकों को 10 करोड़ किसानों तक पहुंचाने का लक्ष्य भी घोषित किया गया।

43 नई फसल किस्में और 17 नई तकनीकों का हुआ लोकार्पण:

स्थापना दिवस समारोह में ICAR ने कृषि अनुसंधान की नई उपलब्धियों को देश के सामने प्रस्तुत किया। जारी की गई नई किस्मों में रोग प्रतिरोधी, अधिक उत्पादक और पोषणयुक्त फसलें शामिल हैं। इसके अलावा पशुपालन एवं मत्स्य क्षेत्र से जुड़ी नई वैक्सीन, आधुनिक कृषि तकनीकें और डिजिटल कृषि समाधान भी लॉन्च किए गए। कार्यक्रम के दौरान 70 से अधिक तकनीकी लाइसेंस और समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए, ताकि अनुसंधान संस्थानों, निजी कंपनियों और कृषि स्टार्टअप के सहयोग से नई तकनीकों को तेजी से किसानों तक पहुंचाया जा सके।

'किसान और वैज्ञानिक की साझेदारी से बदलेगी कृषि':

अपने संबोधन में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि देश का किसान कृषि व्यवस्था की आत्मा है, जबकि वैज्ञानिक उसका ज्ञान और नवाचार का आधार हैं। उन्होंने कहा कि किसानों का अनुभव, वैज्ञानिकों का शोध और सरकार की नीतियां जब एक साथ कार्य करती हैं, तभी कृषि क्षेत्र में स्थायी परिवर्तन संभव होता है। उन्होंने ICAR के वैज्ञानिकों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि भारत आज खाद्यान्न उत्पादन में जिस मजबूत स्थिति में है, उसमें कृषि अनुसंधान संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

अब केवल उत्पादन नहीं, गुणवत्ता और जलवायु-अनुकूल खेती पर होगा फोकस:

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत ने खाद्यान्न, बागवानी, दुग्ध और मत्स्य उत्पादन में उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन अब वैश्विक प्रतिस्पर्धा को देखते हुए कृषि उत्पादों की गुणवत्ता बढ़ाना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने जलवायु परिवर्तन, अनियमित मानसून और एल-नीनो (El Niño) जैसी परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि कृषि अनुसंधान को अब क्लाइमेट रेजिलिएंट खेती, जोखिम प्रबंधन और जिलेवार कृषि योजना पर अधिक ध्यान देना होगा। बदलती जलवायु के अनुरूप वैज्ञानिक समाधान किसानों तक समय पर पहुंचाना भविष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता होगी।

देशभर में विकसित होंगे 100 क्लाइमेट स्मार्ट विलेज:

शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की कि ICAR के 100वें स्थापना वर्ष से पहले देश में कम से कम 100 क्लाइमेट स्मार्ट विलेज विकसित किए जाएंगे। इन गांवों में विशेष रूप से जल संरक्षण और वर्षा जल प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य सुधार, एकीकृत कृषि प्रणाली, मौसम आधारित कृषि सलाह, जलवायु-अनुकूल खेती के मॉडल क्षेत्रों पर कार्य किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य इन मॉडलों को विकसित कर अन्य क्षेत्रों में भी लागू करना है।

10 करोड़ किसानों तक पहुंचेगी ICAR की वैज्ञानिक तकनीक:

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आने वाले वर्षों में ICAR की विकसित तकनीकों, शोध परिणामों और आधुनिक कृषि समाधानों को 10 करोड़ किसानों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए कृषि विज्ञान केंद्रों, डिजिटल प्लेटफॉर्म और राज्य सरकारों के सहयोग से व्यापक अभियान चलाया जाएगा।

वन इंस्टिट्यूट-वन ग्रैंड इनोवेशन' पहल पर होगा काम:

कार्यक्रम में "वन इंस्टिट्यूट-वन ग्रैंड इनोवेशन" पहल का भी उल्लेख किया गया। इसके तहत ICAR के प्रत्येक संस्थान को अगले दो वर्षों में कम से कम एक ऐसा नवाचार विकसित करने का लक्ष्य दिया जाएगा, जिसका राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक प्रभाव दिखाई दे। ये नवाचार नई फसल किस्में, उन्नत कृषि तकनीक, पशुधन एवं मत्स्य वैक्सीन, डिजिटल कृषि समाधान, जलवायु-अनुकूल खेती से जुड़े हो सकते हैं।

कृषि विज्ञान केंद्र बनेंगे इनोवेशन और क्लाइमेट एडवाइजरी सेंटर:

शिवराज सिंह चौहान ने अगले दो वर्षों को "मिशन ICAR-100" के रूप में आगे बढ़ाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि देश के कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) अब केवल प्रशिक्षण केंद्र नहीं रहेंगे, बल्कि उन्हें इनोवेशन हब, क्लाइमेट एडवाइजरी सेंटर और तकनीकी प्रदर्शन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।

इसके साथ ही ICAR एक ओपन डिजिटल नॉलेज प्लेटफॉर्म भी तैयार करेगा, जहां किसान अपने मोबाइल फोन के माध्यम से निःशुल्क वैज्ञानिक सलाह, मौसम आधारित कृषि जानकारी, मृदा परीक्षण, फसल प्रबंधन और नई कृषि तकनीकों की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।

FAQ:

1. ICAR के 98वें स्थापना दिवस पर क्या घोषणाएं हुईं?

ICAR ने 43 नई फसल किस्में, 17 नई कृषि तकनीकें, 14 वैज्ञानिक प्रकाशन लॉन्च किए और 100 क्लाइमेट स्मार्ट विलेज विकसित करने की घोषणा की।

2. 100 क्लाइमेट स्मार्ट विलेज का उद्देश्य क्या है?

इन गांवों में जल संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य, मौसम आधारित कृषि सलाह और जलवायु-अनुकूल खेती के मॉडल विकसित किए जाएंगे।

3. ICAR की तकनीक कितने किसानों तक पहुंचाई जाएगी?

सरकार ने आने वाले वर्षों में ICAR की वैज्ञानिक तकनीकों और शोध को 10 करोड़ किसानों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।

4. कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) में क्या बदलाव होंगे?

KVK को इनोवेशन हब, क्लाइमेट एडवाइजरी सेंटर और तकनीकी प्रदर्शन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।

5. किसानों को नई कृषि तकनीक की जानकारी कैसे मिलेगी?

ICAR एक ओपन डिजिटल नॉलेज प्लेटफॉर्म तैयार करेगा, जहां किसान मोबाइल के माध्यम से मुफ्त वैज्ञानिक सलाह, फसल प्रबंधन, मृदा परीक्षण और आधुनिक कृषि तकनीक की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।

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