फसल की अच्छी पैदावार के लिए गुणवत्तापूर्ण उर्वरकों का उपयोग बेहद जरूरी है, लेकिन बाजार में नकली और मिलावटी खाद की बिक्री किसानों के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। ऐसे में किसानों को जागरूक करने के उद्देश्य से कृषि विभाग ने असली और नकली उर्वरकों की पहचान के आसान और वैज्ञानिक तरीके बताए हैं। मध्यप्रदेश के पाटन विकासखंड में चलाए जा रहे जागरूकता अभियान के तहत अनुविभागीय कृषि अधिकारी डॉ. इंदिरा त्रिपाठी ने किसानों से उर्वरक खरीदते समय सावधानी बरतने और सरल भौतिक परीक्षणों के माध्यम से उनकी गुणवत्ता जांचने की अपील की है।
किसानों को नकली उर्वरकों से होने वाले नुकसान से बचाने और गुणवत्तापूर्ण कृषि आदानों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए कृषि विभाग द्वारा विशेष जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत किसानों को विभिन्न उर्वरकों की पहचान करने के आसान घरेलू एवं भौतिक तरीकों की जानकारी दी जा रही है, ताकि वे खरीदारी के समय सही निर्णय ले सकें।
कृषि विभाग के अनुसार असली डीएपी उर्वरक की पहचान भी कुछ सरल परीक्षणों से की जा सकती है। दाने कठोर तथा भूरे, काले या बादामी रंग के होते हैं। नाखून से आसानी से नहीं टूटते। हथेली में लेकर फूंक मारने पर हल्की नमी महसूस होती है। चूने के साथ रगड़ने पर तीखी अमोनिया जैसी गंध आती है। तवे पर गर्म करने पर इसके दाने फूलकर बड़े हो जाते हैं।
सुपर फॉस्फेट की पहचान के आसान तरीके:
सुपर फॉस्फेट की पहचान अन्य उर्वरकों से अलग होती है। इसके दाने अपेक्षाकृत नरम होते हैं और नाखून से आसानी से टूट जाते हैं। पाउडर का रंग भूरा या मटमैला होता है। खुले वातावरण में रखने पर यह भी नमी अवशोषित कर लेता है। गर्म तवे पर रखने पर इसके दाने अपना आकार नहीं बदलते और डीएपी की तरह फूलते नहीं हैं।
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एनपीके और जिंक सल्फेट की पहचान:
कृषि विभाग के अनुसार एनपीके उर्वरक को भी आसानी से पहचाना जा सकता है। तवे पर धीमी आंच में गर्म करने पर इसके दाने मुरमुरे (लाई) की तरह फूल जाते हैं। खुले में रखने पर यह नमी सोखकर गीला हो जाता है। वहीं जिंक सल्फेट के दाने हल्के सफेद, पीले या भूरे रंग के बारीक कणों के रूप में दिखाई देते हैं। यदि डीएपी के घोल में जिंक सल्फेट का घोल मिलाया जाए तो गाढ़ा थक्केदार अवशेष बनकर बर्तन की तली में बैठ जाता है।
उर्वरक खरीदते समय इन बातों का रखें विशेष ध्यान:
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे उर्वरक हमेशा अधिकृत विक्रेताओं से ही खरीदें, खरीद का बिल अवश्य लें और किसी भी प्रकार की शंका होने पर स्वयं सरल परीक्षण कर गुणवत्ता की जांच करें। यदि किसी उर्वरक की गुणवत्ता संदिग्ध लगे या नकली खाद बेचने की जानकारी मिले, तो तत्काल कृषि विभाग के अधिकारियों को सूचना दें ताकि दोषियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
किसानों के लिए कृषि विभाग की सलाह:
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि गुणवत्तापूर्ण उर्वरकों का उपयोग न केवल फसल उत्पादन बढ़ाता है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए किसान बिना जांचे-परखे उर्वरक खरीदने से बचें, अधिकृत स्रोतों से ही खाद खरीदें और विभाग द्वारा बताए गए सरल परीक्षणों की मदद से असली एवं नकली उर्वरकों की पहचान करना सीखें। इससे फसल, मिट्टी और किसानों की आर्थिक सुरक्षा तीनों सुनिश्चित की जा सकती हैं।
FAQs:
1. असली और नकली उर्वरक की पहचान कैसे करें?
यूरिया, डीएपी, NPK और अन्य उर्वरकों की पहचान उनके रंग, आकार, पानी में घुलने और गर्म करने जैसे सरल परीक्षणों से की जा सकती है।
2. यूरिया की पहचान का सबसे आसान तरीका क्या है?
असली यूरिया सफेद और चमकदार होता है, पानी में पूरी तरह घुल जाता है और गर्म करने पर अमोनिया जैसी गंध देता है।
3. डीएपी की पहचान कैसे करें?
असली डीएपी के दाने कठोर होते हैं, नाखून से नहीं टूटते और गर्म करने पर फूल जाते हैं।
4. उर्वरक खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखें?
हमेशा अधिकृत विक्रेता से खरीदें, बिल लें और गुणवत्ता पर संदेह होने पर कृषि विभाग को शिकायत करें।
5. नकली उर्वरक से क्या नुकसान होता है?
नकली उर्वरक फसल की पैदावार घटाते हैं, मिट्टी की गुणवत्ता खराब करते हैं और किसानों को आर्थिक नुकसान पहुंचाते हैं।