• होम
  • El Niño Alert: कम बारिश में धान की खेती के 10 वैज्ञानिक उपाय...

El Niño Alert: कम बारिश में धान की खेती के 10 वैज्ञानिक उपाय, जानें सूखा-सहनशील किस्में, DSR तकनीक और नमी संरक्षण के तरीके

एल नीनो में धान की खेती
एल नीनो में धान की खेती

वर्ष 2026 में El Niño के संभावित प्रभाव को देखते हुए देश के कई हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा, लंबे ड्राई स्पेल और अधिक तापमान की आशंका जताई जा रही है। ऐसी परिस्थितियों में धान की खेती सबसे अधिक प्रभावित होती है, क्योंकि यह फसल शुरुआती विकास चरण में पर्याप्त नमी पर निर्भर करती है। यदि किसान बिना तैयारी के पारंपरिक तरीके अपनाते हैं, तो अंकुरण कमजोर हो सकता है, पौधों की वृद्धि प्रभावित हो सकती है और उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है।

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसान समय पर सही किस्मों का चयन करें, वैज्ञानिक खेती तकनीकों को अपनाएं, खेत में नमी संरक्षण के उपाय करें और मौसम आधारित कृषि सलाह का पालन करें, तो कम वर्षा की स्थिति में भी धान की अच्छी उपज प्राप्त की जा सकती है। आइए जानते हैं El Niño के दौरान धान की खेती को सुरक्षित और लाभदायक बनाने के लिए जरूरी वैज्ञानिक उपाय।

1. कम वर्षा के लिए सूखा-सहनशील धान की किस्मों का करें चयन:

कम बारिश वाले क्षेत्रों में धान की सफलता काफी हद तक सही किस्म के चयन पर निर्भर करती है। कृषि विशेषज्ञ किसानों को ऐसी किस्में अपनाने की सलाह देते हैं जो कम पानी में भी बेहतर उत्पादन देने में सक्षम हों। स्वर्ण श्रेया, सहभागी धान, DRR Dhan-42, DRR Dhan-44, नवीन, प्रभात, तुरंता, राजेंद्र श्वेता, पूसा की सूखा-सहनशील एवं कम अवधि वाली किस्में लगायें। ये किस्में सीमित नमी में भी बेहतर प्रदर्शन करती हैं और कमजोर मानसून की स्थिति में उत्पादन जोखिम को कम करती हैं।

2. पानी की कमी वाले क्षेत्रों में वैकल्पिक फसलों को दें प्राथमिकता:

जहां सिंचाई की सुविधा सीमित हो या खेत ऊंचाई पर स्थित हों, वहां केवल धान पर निर्भर रहना जोखिम बढ़ा सकता है। ऐसे क्षेत्रों में अरहर, मक्का और रागी जैसी फसलें बेहतर विकल्प साबित हो सकती हैं। अरहर की उपयुक्त किस्में मालवीय-13, IPA-203, पूसा-992, UPAS-120, राजेंद्र अरहर-1 किस्में लगायें। कृषि विशेषज्ञ इन फसलों में मेड़-नाली (Ridge and Furrow) पद्धति अपनाने तथा सामान्य से थोड़ा अधिक बीज दर रखने की सलाह देते हैं, जिससे नमी संरक्षण बेहतर होता है।

3. अच्छी बारिश के बाद ही करें बुवाई:

विशेषज्ञों के अनुसार बुवाई का निर्णय केवल कैलेंडर देखकर नहीं, बल्कि खेत में पर्याप्त नमी आने के बाद ही लेना चाहिए। यदि मानसून देर से पहुंचे, तो लंबी अवधि वाली किस्मों के बजाय 100 से 120 दिन में तैयार होने वाली मध्यम या कम अवधि की किस्मों का चयन करें। सूखी मिट्टी में जल्दबाजी में बुवाई करने से अंकुरण प्रभावित हो सकता है।

4. सीमित पानी में अपनाएं डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) तकनीक:

जहां सिंचाई की सीमित सुविधा हो, वहां DSR तकनीक लाभदायक हो सकती है। 20–30% तक पानी की बचत, मजदूरी कम लगती है, फसल जल्दी तैयार होती है और लागत कम आती है।

5. कम पानी में रोपाई करें:

यदि रोपाई कर रहे हैं तो 18–22 दिन की स्वस्थ पौध लगाएं। प्रति स्थान 2–3 पौधे लगाएं। कतार से कतार दूरी लगभग 20 सेमी रखें। लगातार पानी भरकर रखने की आवश्यकता नहीं है। 

6. वैज्ञानिक तरीके से करें धान की रोपाई:

  • यदि किसान रोपाई पद्धति अपनाते हैं तो कुछ वैज्ञानिक मानकों का पालन करना आवश्यक है। 
  • 18–22 दिन की स्वस्थ पौध का उपयोग करें। 
  • प्रति स्थान केवल 2–3 पौधे लगाएं। 
  • कतार से कतार लगभग 20 सेंटीमीटर दूरी रखें। 
  • खेत में लगातार पानी भरे रखने की आवश्यकता नहीं होती। 
  • इससे पौधों का विकास बेहतर होता है और पानी की बचत भी होती है।

7. संतुलित उर्वरक प्रबंधन:

  • मिट्टी परीक्षण के आधार पर उर्वरक दें। 
  • नाइट्रोजन एक साथ न डालकर 3–4 किस्तों में दें। 
  • जिंक और सल्फर की कमी होने पर उनकी पूर्ति करें। 
  • जैव उर्वरकों का उपयोग बढ़ाएं। 

8. सूखे की स्थिति में किसान क्या करें?

यदि 10–15 दिन तक बारिश नहीं होती तो उपलब्ध सिंचाई से जीवन रक्षक (Life Saving) सिंचाई करें। नाइट्रोजन की अगली खुराक बारिश या सिंचाई के बाद ही दें। खेत में दरारें बनने से पहले सिंचाई करें। खरपतवार नियंत्रण पर विशेष ध्यान दें क्योंकि वे नमी और पोषक तत्वों की प्रतिस्पर्धा बढ़ाते हैं। 

9. कीट एवं रोग प्रबंधन:

कम बारिश और अधिक तापमान में इनका प्रकोप बढ़ सकता है। तना छेदक, पत्ती लपेटक, ब्राउन प्लांट हॉपर (BPH), ब्लास्ट रोग। नियमित निगरानी करें और आर्थिक क्षति स्तर (ETL) के आधार पर ही नियंत्रण उपाय अपनाएं।

10. सरकारी योजनाओं का लाभ लें:

  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) 
  • मौसम आधारित कृषि सलाह 
  • कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) की सलाह 
  • राज्य कृषि विभाग की सूखा प्रबंधन योजनाएं 

किसानों के लिए विशेष सुझाव:

  • मौसम पूर्वानुमान देखकर ही बुवाई एवं उर्वरक प्रबंधन करें। 
  • खेत में वर्षा जल संग्रहण की व्यवस्था बनाएं। 
  • धान के साथ अरहर, मूंग या उड़द जैसी दलहनी फसलों को शामिल कर जोखिम कम करें। 
  • ड्रिप या स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई का उपयोग वहां करें जहां उपयुक्त हो। 
  • बीज, उर्वरक और कीटनाशकों की व्यवस्था पहले से कर लें ताकि बारिश मिलने पर तुरंत खेती शुरू की जा सके।

FAQs:

1. El Niño 2026 का धान की खेती पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

El Niño के कारण कम बारिश, अधिक तापमान और लंबे ड्राई स्पेल की संभावना रहती है, जिससे धान की खेती प्रभावित हो सकती है।

2. कम बारिश में कौन-सी धान की किस्म सबसे बेहतर है?

स्वर्ण श्रेया, सहभागी धान, DRR Dhan-42, DRR Dhan-44, प्रभात और राजेंद्र श्वेता जैसी सूखा-सहनशील किस्में बेहतर मानी जाती हैं।

3. DSR तकनीक क्या है?

डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) ऐसी तकनीक है जिसमें रोपाई के बजाय सीधे बीज बोए जाते हैं। इससे पानी, मजदूरी और लागत की बचत होती है।

4. सूखे की स्थिति में किसानों को क्या करना चाहिए?

10–15 दिन तक बारिश न होने पर लाइफ सेविंग सिंचाई करें, खरपतवार नियंत्रण करें और उर्वरक सिंचाई या बारिश के बाद ही दें।

5. El Niño के दौरान किसान किन सरकारी योजनाओं का लाभ लें?

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY), कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), मौसम आधारित कृषि सलाह और राज्य सरकार की सूखा प्रबंधन योजनाओं का लाभ लेना चाहिए।

khetivyapar.com अब whatsapp चैनल पर भी उपलब्ध है। आज ही फॉलो करें और पाएं महत्वपूर्ण जानकारी WhatsApp चैनल से जुड़ें