देश में कृषि को अधिक लाभकारी, आधुनिक और जलवायु-अनुकूल बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक नई राष्ट्रीय पहल 'प्रगति (PRAGATI)' की शुरुआत की है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना का शुभारंभ करते हुए कहा कि 20 हजार कृषि-उद्यमियों (Agri-Entrepreneurs) का मजबूत नेटवर्क तैयार कर 20 लाख लघु एवं सीमांत किसानों की आय, उत्पादकता और आजीविका में व्यापक सुधार लाया जाएगा। सरकार का लक्ष्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि खेती की लागत कम कर किसानों की वास्तविक आय बढ़ाना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि छोटे और सीमांत किसानों के लिए केवल पारंपरिक खेती पर्याप्त नहीं है। किसानों को वैल्यू एडिशन, प्रोसेसिंग और कृषि आधारित उद्यमिता से जोड़ना समय की आवश्यकता है। उन्होंने बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन और अन्य कृषि-आधारित गतिविधियों को आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि प्रगति परियोजना किसानों को तकनीक, आधुनिक कृषि मशीनों, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और बेहतर बाजार संपर्क उपलब्ध कराकर खेती को अधिक लाभकारी बनाएगी।
प्रगति परियोजना के पहले चरण में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, असम और झारखंड को शामिल किया गया है। इस परियोजना के तहत प्रशिक्षित कृषि-उद्यमी गांव स्तर पर किसानों को कई महत्वपूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराएंगे, जिनमें शामिल हैं
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भविष्य की कृषि डिजिटल तकनीक, ड्रोन, वैज्ञानिक सलाह और आधुनिक मशीनीकरण पर आधारित होगी। उन्होंने मृदा स्वास्थ्य सुधार, लागत में कमी और उत्पादकता बढ़ाने पर विशेष जोर देते हुए कहा कि तकनीक आधारित खेती ही किसानों की आय बढ़ाने का सबसे प्रभावी माध्यम बनेगी।
महिला शक्ति और ग्रामीण युवाओं को मिलेगा नेतृत्व का अवसर:
इस परियोजना में महिला किसानों और ग्रामीण युवाओं की भागीदारी को विशेष महत्व दिया गया है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बड़ी संख्या में "कृषि सखी" और महिला कृषि-उद्यमी गांवों में परिवर्तन की अगुआ बनेंगी। उनका मानना है कि एक प्रशिक्षित कृषि-उद्यमी पूरे गांव की कृषि व्यवस्था और आर्थिक स्थिति बदल सकता है।
जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए टिकाऊ कृषि मॉडल तैयार होगा:
प्रगति परियोजना का उद्देश्य केवल कृषि उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन के अनुरूप टिकाऊ (Sustainable) और पुनर्योजी कृषि (Regenerative Agriculture) को बढ़ावा देना भी है। परियोजना के तहत कम से कम 20 प्रतिशत किसानों को कृषि पद्धतियां अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और खेती की स्थिरता सुनिश्चित हो सके।
किसानों की आय में 30% और उत्पादन में 15–20% वृद्धि का लक्ष्य:
FAQs:
1. PRAGATI Project क्या है?
PRAGATI Project केंद्र सरकार की नई कृषि पहल है, जिसका उद्देश्य 20 लाख लघु एवं सीमांत किसानों की आय बढ़ाना और खेती को आधुनिक बनाना है।
2. PRAGATI Project किन राज्यों में शुरू होगा?
पहले चरण में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, असम और झारखंड में लागू किया जाएगा।
3. किसानों को PRAGATI Project के तहत क्या लाभ मिलेगा?
किसानों को तकनीकी सलाह, मृदा परीक्षण, कृषि मशीनरी, बाजार संपर्क, डिजिटल सेवाएं और वित्तीय सहायता से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
4. PRAGATI Project में कृषि-उद्यमियों की क्या भूमिका होगी?
20,000 कृषि-उद्यमी गांव स्तर पर किसानों को आधुनिक खेती, ड्रोन तकनीक, वैज्ञानिक सलाह और बाजार से जोड़ने का कार्य करेंगे।
5. PRAGATI Project का मुख्य लक्ष्य क्या है?
इस परियोजना का लक्ष्य किसानों की आय में 30% तक वृद्धि, फसल उत्पादन में 15–20% बढ़ोतरी और जलवायु-अनुकूल टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देना है।