दुनिया एक बार फिर एल नीनो (El Niño) की दस्तक के बीच खड़ी है। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO), विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) और विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने वर्ष 2026-27 के दौरान विकसित होने वाले एल नीनो को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मौसम प्रणाली मजबूत होती है तो इसका असर केवल मौसम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कृषि उत्पादन, खाद्य सुरक्षा, जल संसाधनों, महंगाई और वैश्विक अर्थव्यवस्था तक महसूस किया जाएगा।
विश्व मौसम विज्ञान संगठन के नवीनतम आकलन के अनुसार जून से अगस्त 2026 के दौरान एल नीनो विकसित होने की 80 प्रतिशत संभावना है, जबकि इसके नवंबर 2026 तक बने रहने की संभावना 90 प्रतिशत से अधिक है। अधिकांश जलवायु मॉडल संकेत दे रहे हैं कि यह एल नीनो कम से कम मध्यम और संभवतः मजबूत श्रेणी का हो सकता है।
एल नीनो एक प्राकृतिक महासागरीय एवं वायुमंडलीय घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से का समुद्री सतह तापमान सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। यही गर्म पानी वैश्विक वायु परिसंचरण को प्रभावित करता है और दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में वर्षा तथा तापमान के पैटर्न बदलने लगते हैं। आमतौर पर एल नीनो 2 से 7 वर्ष के अंतराल पर आता है और लगभग 9 से 12 महीने तक प्रभावी रहता है। इसका विकास मार्च से जून के बीच शुरू होता है और नवंबर से फरवरी के दौरान इसका प्रभाव सबसे अधिक देखा जाता है।
भारत की कृषि का बड़ा हिस्सा आज भी मानसून पर निर्भर है। देश के लगभग 50 प्रतिशत से अधिक कृषि क्षेत्र में सिंचाई के लिए वर्षा महत्वपूर्ण स्रोत है। ऐसे में यदि एल नीनो के कारण मानसून कमजोर पड़ता है या वर्षा का वितरण असमान होता है, तो खरीफ फसलों पर सीधा असर पड़ सकता है। हालांकि मौसम वैज्ञानिक स्पष्ट करते हैं कि हर एल नीनो का मतलब कमजोर भारतीय मानसून नहीं होता।
भारतीय मानसून पर हिंद महासागर द्विध्रुव (IOD), मॉनसून ट्रफ, मेडेन-जूलियन ऑसिलेशन (MJO) और अन्य महासागरीय कारकों का भी महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। इसलिए किसी राज्य या पूरे देश में वर्षा कितनी होगी, इसका अंतिम अनुमान मौसम विभाग के अद्यतन पूर्वानुमानों पर निर्भर करेगा।
यदि मानसून की शुरुआत देर से होती है या जुलाई-अगस्त में पर्याप्त वर्षा नहीं होती, तो धान की रोपाई प्रभावित हो सकती है। पूर्वी भारत, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और पूर्वी उत्तर प्रदेश में इसका अधिक असर देखने को मिल सकता है।
मक्का की फसल फूल आने के समय नमी की कमी के प्रति उत्पादन में उल्लेखनीय कमी आ सकती है। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान में बड़े पैमाने पर सोयाबीन की खेती होती है। कम वर्षा की स्थिति में अंकुरण कमजोर होगा। फूल और फलियां झड़ सकती हैं। कपास की शुरुआती वृद्धि के लिए पर्याप्त नमी आवश्यक होती है। बारिश कम होने पर पौधों की वृद्धि रुक सकती है। अरहर, उड़द और मूंग जैसी खरीफ दालें भी वर्षा पर निर्भर रहती हैं। ये फसलें अपेक्षाकृत सूखा सहन कर सकती हैं, लेकिन अत्यधिक गर्मी और लंबे सूखे की स्थिति में इनके उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है।
बागवानी फसलों पर भी रहेगा प्रभाव:
एल नीनो का असर केवल अनाज तक सीमित नहीं रहेगा। इन फसलों पर भी असर संभव है, आम,केला,अंगूर, संतरा, टमाटर, प्याज, आलू, मिर्च अधिक तापमान और नमी की कमी से फल गिरने, आकार छोटा रहने और गुणवत्ता घटने की संभावना बढ़ जाती है।
पशुपालन और डेयरी क्षेत्र भी होंगे प्रभावित:
यदि वर्षा कम होती है तो हरे चारे की उपलब्धता घटेगी। पशुओं में हीट स्ट्रेस बढ़ेगा। दूध उत्पादन कम हो सकता है। पशुपालन की लागत बढ़ेगी।
महंगाई पर भी पड़ सकता है असर:
यदि कृषि उत्पादन घटता है तो खाद्यान्न महंगे हो सकते हैं। खाद्य महंगाई बढ़ सकती है। सरकार को आयात बढ़ाना पड़ सकता है। किसानों और उपभोक्ताओं दोनों पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।
जलवायु परिवर्तन बढ़ा सकता है प्रभाव: विश्व मौसम विज्ञान संगठन का कहना है कि अब तक ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला है कि जलवायु परिवर्तन एल नीनो की संख्या या तीव्रता बढ़ाता है। लेकिन बढ़ते वैश्विक तापमान के कारण एल नीनो के प्रभाव अधिक गंभीर हो सकते हैं। गर्म महासागर और वातावरण के कारण हीटवेव, भारी वर्षा, बाढ़ और सूखे जैसी चरम मौसमी घटनाओं की तीव्रता बढ़ सकती है।
किसानों को अभी से क्या तैयारी करनी चाहिए?
FAQs:
1. El Niño 2026 क्या है?
El Niño 2026 प्रशांत महासागर में बनने वाली एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जो दुनिया के कई देशों के मौसम और वर्षा को प्रभावित कर सकती है।
2. क्या El Niño 2026 से भारत में मानसून कमजोर होगा?
संभावना है कि El Niño 2026 मानसून को प्रभावित करे, लेकिन अंतिम स्थिति IOD, MJO और अन्य मौसमीय कारकों पर भी निर्भर करेगी।
3. El Niño का सबसे ज्यादा असर किन फसलों पर पड़ सकता है?
धान, मक्का, सोयाबीन, कपास, अरहर, उड़द, मूंग, टमाटर, प्याज, आलू और संतरा जैसी फसलों पर असर पड़ सकता है।
4. किसानों को El Niño 2026 के दौरान क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
मौसम पूर्वानुमान देखें, सूखा सहनशील बीज चुनें, जल संरक्षण करें, सूक्ष्म सिंचाई अपनाएं और फसल बीमा का लाभ लें।
5. El Niño 2026 की जानकारी सबसे पहले कहां मिलेगी?
किसान Khetivyapar पर कृषि समाचार, मौसम अपडेट और फसल संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी नियमित रूप से प्राप्त कर सकते हैं।