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Kharif Season 2026: खरीफ 2026 पर केंद्र सरकार का बड़ा एक्शन प्लान: एल नीनो अलर्ट, 262 जिलों पर विशेष निगरानी

एल नीनो का खतरा
एल नीनो का खतरा

संभावित एल नीनो और कमजोर मानसून की आशंकाओं के बीच केंद्र सरकार ने खरीफ सीजन की तैयारियों को लेकर व्यापक समीक्षा की है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली स्थित कृषि भवन में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में खरीफ बुवाई, मानसून की प्रगति, वर्षा की स्थिति, सूखा प्रबंधन, उर्वरकों की उपलब्धता, खाद्यान्न भंडारण और फसल सुरक्षा उपायों की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि एल नीनो के संभावित प्रभावों पर लगातार निगरानी रखी जाए और सभी राज्यों में जिला स्तर पर तैयार किए गए कॉन्टिंजेंसी प्लान का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।

210 जिले अब भी वर्षा की कमी से प्रभावित, 262 जिलों पर विशेष निगरानी:

देशभर में वर्षा की कमी की आशंका वाले 262 संवेदनशील जिलों की पहचान की गई है। इनमें से 52 जिलों में हाल के दिनों में अच्छी बारिश हुई है, जबकि 210 जिले अब भी कम वर्षा की स्थिति का सामना कर रहे हैं। इनमें 8 जिलों में अब तक नगण्य या लगभग शून्य वर्षा दर्ज की गई है। केंद्रीय कृषि मंत्री ने इन जिलों की स्थिति पर विशेष निगरानी रखने और समय पर आवश्यक राहत एवं कृषि उपाय लागू करने के निर्देश दिए।

कई राज्यों में मानसून बढ़ने की संभावना:

मौसम संबंधी समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने जानकारी दी कि 2 जुलाई से पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना है। इसके प्रभाव से अगले 2 से 3 दिनों के दौरान मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख तथा दक्षिण-पूर्वी राजस्थान के कुछ हिस्सों में मानसून आगे बढ़ सकता है। हालांकि, मौजूदा आकलनों के अनुसार इस वर्ष कुल वर्षा सामान्य से कम रहने की आशंका बनी हुई है।

एल नीनो से निपटने के लिए लागू होंगे कॉन्टिंजेंसी प्लान:

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हर जिले के लिए पहले से तैयार कॉन्टिंजेंसी प्लान को प्रभावी ढंग से लागू करना बेहद जरूरी है। उन्होंने संकेत दिया कि कम वर्षा से अधिक प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ अलग-अलग बैठकें कर तैयारियों और अब तक किए गए कार्यों की समीक्षा की जाएगी। साथ ही प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के प्रभावी क्रियान्वयन और किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के दायरे का विस्तार करने पर भी विशेष जोर दिया गया।

गुजरात और महाराष्ट्र की स्थिति पर भी सरकार की नजर:

समीक्षा बैठक में बताया गया कि उत्तर गुजरात के कुछ क्षेत्रों में वर्षा की कमी दर्ज की गई है। वहीं महाराष्ट्र में हाल में बारिश होने के बावजूद जलाशयों का जलस्तर घट रहा है। कृषि मंत्री ने कहा कि यदि लंबे समय तक वर्षा में अंतराल बना रहता है तो कृषि गतिविधियों पर असर पड़ सकता है, इसलिए राज्यों को पहले से तैयार रहने की आवश्यकता है।

जलाशयों में जल भंडारण कम, लेकिन भूजल की स्थिति फिलहाल स्थिर:

देश के 166 प्रमुख जलाशयों में जल भंडारण पिछले वर्ष की तुलना में कम है। हालांकि अधिकांश क्षेत्रों में भूजल स्तर फिलहाल स्थिर बना हुआ है। सूखे की स्थिति की लगातार निगरानी के लिए फसल मौसम निगरानी समूह (CWWG) नियमित साप्ताहिक बैठकें कर रहा है। इस कार्य में सहयोग के लिए 15 राज्यों ने नोडल अधिकारियों की नियुक्ति भी कर दी है।

बीज और उर्वरकों की उपलब्धता पर्याप्त:

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और केंद्रीय शुष्क भूमि कृषि अनुसंधान संस्थान (CRIDA) द्वारा किए जा रहे कार्यों की समीक्षा में बताया गया कि राष्ट्रीय बीज निगम के पास पर्याप्त मात्रा में गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध हैं। उर्वरकों की उपलब्धता पर भी संतोष व्यक्त करते हुए अधिकारियों ने बताया कि अप्रैल से जून 2026 के दौरान 176.13 लाख मीट्रिक टन की आवश्यकता के मुकाबले 286.37 लाख मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध रहे। कृषि मंत्री ने विशेष निर्देश दिए कि जनजातीय और दूरस्थ क्षेत्रों में उर्वरकों की आपूर्ति में किसी भी प्रकार की कमी न आने पाए।

दलहन, तिलहन और बागवानी फसलों पर विशेष फोकस:

बैठक में दलहन, तिलहन और कपास मिशन की प्रगति, बागवानी फसलों की बुवाई, साप्ताहिक मंडी कीमतों तथा गेहूं, चावल, दलहन और तिलहन के बफर स्टॉक की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों को इन क्षेत्रों में प्रयास और तेज करने के निर्देश दिए गए ताकि संभावित मौसमीय चुनौतियों के बावजूद खाद्य सुरक्षा और किसानों की आय प्रभावित न हो।

किसानों के लिए सरकार की प्राथमिकता स्पष्ट:

केंद्रीय कृषि ने कहा कि वर्ष 2025-26 भारतीय कृषि के लिए उल्लेखनीय उपलब्धियों वाला वर्ष रहा है, लेकिन संभावित मौसमीय चुनौतियों को देखते हुए तैयारी में किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रभावित जिलों में कॉन्टिंजेंसी प्लान, फसल बीमा, कृषि ऋण, बीज, उर्वरक उपलब्धता और किसानों को समय पर तकनीकी सलाह उपलब्ध कराने की व्यवस्था को और मजबूत किया जाए, ताकि खरीफ सीजन में किसानों को किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।

FAQs:

Q1. एल नीनो क्या है?
उत्तर: एल नीनो एक मौसमीय घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर का तापमान बढ़ने से दुनिया भर के मौसम पर असर पड़ता है और भारत में मानसून कमजोर हो सकता है।

Q2. सरकार ने कितने जिलों को संवेदनशील माना है?
उत्तर: सरकार ने वर्षा की कमी की आशंका वाले 262 जिलों की पहचान की है, जिनमें 210 जिले अभी भी कम वर्षा से प्रभावित हैं।

Q3. किसानों के लिए सरकार ने क्या तैयारी की है?
उत्तर: सरकार ने कॉन्टिंजेंसी प्लान लागू करने, PMFBY, KCC, बीज और उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

Q4. क्या खरीफ फसलों पर एल नीनो का असर पड़ सकता है?
उत्तर: यदि मानसून सामान्य से कमजोर रहता है, तो धान, दलहन, तिलहन और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई और उत्पादन प्रभावित हो सकते हैं।

Q5. Khetivyapar किसानों को क्या जानकारी देता है?
उत्तर: Khetivyapar किसानों तक कृषि समाचार, मौसम अपडेट, मंडी भाव, सरकारी योजनाएं और खेती से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी सरल भाषा में पहुंचाता है।

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