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सरकार का बड़ा फोकस: 2,996 नई जलवायु-रोधी फसल किस्में विकसित, बीज क्षेत्र को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए किया जा रहा मजबूत

भारत सरकार का बीज मिशन
भारत सरकार का बीज मिशन

भारत सरकार कृषि क्षेत्र को अधिक उत्पादक, जलवायु-अनुकूल और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए बीज क्षेत्र (Seed Sector) को मजबूत करने की दिशा में व्यापक स्तर पर काम कर रही है। उच्च गुणवत्ता वाले बीजों की उपलब्धता बढ़ाने, आधुनिक अनुसंधान को प्रोत्साहन देने, बीज उत्पादन एवं वितरण प्रणाली को डिजिटल बनाने और किसानों तक बेहतर किस्मों के बीज पहुंचाने के लिए कई नई पहलें की जा रही हैं।

सरकार का उद्देश्य बदलती जलवायु परिस्थितियों के बीच किसानों को ऐसी उन्नत फसल किस्में उपलब्ध कराना है, जो अधिक उत्पादन देने के साथ-साथ सूखा, बाढ़, लवणीयता, अत्यधिक तापमान और अन्य प्रतिकूल परिस्थितियों का बेहतर सामना कर सकें।

2014 से अब तक विकसित हुईं 3,236 नई फसल किस्में:

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), राज्य कृषि विश्वविद्यालयों और केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालयों के माध्यम से वर्ष 2014 से 2025 के बीच 3,236 नई फसल किस्में विकसित एवं अधिसूचित की गई हैं। इनमें से 2,996 किस्में जलवायु-अनुकूल हैं, जबकि 587 किस्में अत्यधिक प्रतिकूल मौसम को सहन करने में सक्षम हैं। इनमें 341 सूखा सहनशील किस्में, 89 बाढ़ सहनशील किस्में, 80 लवणीयता सहनशील किस्में, 59 अत्यधिक तापमान सहनशील किस्में, 18 ठंड सहनशील किस्में शामिल हैं।

अनाज से लेकर गन्ने तक सभी प्रमुख फसलों पर अनुसंधान:

सरकार द्वारा विकसित नई किस्मों में अनाज, दलहन, तिलहन, चारा फसलें, रेशा फसलें, गन्ना तथा अन्य महत्वपूर्ण कृषि फसलें शामिल हैं। 

  • अनाज फसलें – 1,574 नई किस्में 
  • तिलहन – 444 
  • दलहन – 473 
  • चारा फसलें – 207 
  • रेशा फसलें – 408 
  • गन्ना – 96 
  • अन्य फसलें – 34 

इनमें अधिकांश किस्मों को जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है।

उच्च गुणवत्ता वाले बीजों का उत्पादन और वितरण होगा मजबूत:

सरकार उच्च उत्पादक एवं जलवायु-अनुकूल किस्मों के ब्रीडर, फाउंडेशन और प्रमाणित बीजों के उत्पादन एवं वितरण को लगातार बढ़ावा दे रही है, ताकि किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध हो सकें। देशभर में वर्तमान में 229 सीड हब और 384 ब्रीडर सीड उत्पादन केंद्र सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। इनके अलावा राष्ट्रीय बीज निगम (NSC), राज्य बीज निगमों तथा सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र की अनेक संस्थाएं गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। अब तक 219 फसल प्रजातियों की 10,802 किस्मों का पंजीकरण किया जा चुका है, जिनमें से 5,689 किस्मों का पंजीकरण केवल 2023 से 2026 के बीच किया गया।

SATHI पोर्टल से बीजों की होगी डिजिटल ट्रैकिंग:

बीज गुणवत्ता और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए सरकार चरणबद्ध तरीके से Seed Authentication, Traceability and Holistic Inventory (SATHI) Portal लागू कर रही है। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म बीज उत्पादन, प्रमाणन, भंडारण, इन्वेंट्री प्रबंधन और वितरण की पूरी प्रक्रिया को ट्रैक करेगा। इससे नकली एवं निम्न गुणवत्ता वाले बीजों पर नियंत्रण के साथ किसानों तक प्रमाणित बीजों की पहुंच और अधिक मजबूत होगी।

178 सीड टेस्टिंग लैब से होगी गुणवत्ता की निगरानी:

देशभर में 178 अधिसूचित सीड टेस्टिंग लैबोरेटरी (Seed Testing Laboratories) बीजों की गुणवत्ता जांच का कार्य कर रही हैं। सरकार इन प्रयोगशालाओं को आधुनिक बनाने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप ISTA प्रमाणन और तकनीकी उन्नयन के लिए भी वित्तीय सहायता उपलब्ध करा रही है।

बीज निर्यात में लगातार बढ़ रही भारत की हिस्सेदारी:

भारत वैश्विक बीज व्यापार में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है। 2024-25 में बीज निर्यात: 92.06 हजार मीट्रिक टन, निर्यात मूल्य: ₹2,323.39 करोड़ रहा वहीं 2025-26 में यह बढ़कर 123.82 हजार मीट्रिक टन, निर्यात मूल्य ₹3,023.16 करोड़ तक पहुंच गया।

आधुनिक तकनीकों से तैयार होंगे भविष्य के बीज:

नई फसल किस्मों के विकास में अब मार्कर-असिस्टेड सिलेक्शन (MAS), जीन एडिटिंग, स्पीड ब्रीडिंग, बायोफोर्टिफिकेशन और मॉलिक्यूलर ब्रीडिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग तेजी से बढ़ाया जा रहा है। सरकार का मानना है कि इन तकनीकों के माध्यम से कम समय में अधिक उत्पादक, पोषणयुक्त और जलवायु-अनुकूल किस्में विकसित की जा सकेंगी।

FAQs:

1. भारत सरकार ने 2014 से 2025 तक कितनी नई फसल किस्में विकसित की हैं?

सरकार ने ICAR और कृषि विश्वविद्यालयों के माध्यम से 3,236 नई Crop Varieties विकसित एवं अधिसूचित की हैं।

2. SATHI Portal क्या है?

SATHI Portal एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो बीज उत्पादन, प्रमाणन, ट्रैकिंग, भंडारण और वितरण की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाएगा।

3. देश में कितने Seed Hub और Breeder Seed Centres हैं?

वर्तमान में भारत में 229 Seed Hub और 384 Breeder Seed Production Centres सक्रिय हैं।

4. भारत का Seed Export कितना बढ़ा है?

2025-26 में भारत का Seed Export बढ़कर 123.82 हजार मीट्रिक टन और इसका मूल्य ₹3,023.16 करोड़ तक पहुंच गया।

5. नई Crop Varieties विकसित करने में कौन-सी आधुनिक तकनीकों का उपयोग हो रहा है?

सरकार MAS, Gene Editing, Speed Breeding, Biofortification और Molecular Breeding जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर रही है ताकि अधिक उत्पादक और जलवायु-अनुकूल फसल किस्में विकसित की जा सकें।

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