बिहार के किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने रबी सीजन 2026 के लिए चना, मसूर और सरसों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद को मंजूरी दे दी है। यह खरीद मूल्य समर्थन योजना (PSS) के तहत निर्धारित मात्रा में की जाएगी, जिससे किसानों को बाजार के उतार-चढ़ाव से सुरक्षा मिलेगी और उन्हें अपनी उपज का उचित मूल्य मिल सकेगा।
केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत खरीद के अनुसार राज्य में चना, मसूर और सरसों की बड़ी मात्रा में खरीद की जाएगी। इसमें चना 16,750 मीट्रिक टन, मसूर 32,000 मीट्रिक टन और सरसों 28,000 मीट्रिक टन शामिल हैं। इस निर्णय से दलहन और तिलहन उत्पादक किसानों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
राज्य के कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने बताया कि यह फैसला किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य दिलाने की दिशा में एक अहम कदम है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों के हितों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। MSP पर खरीद से किसानों को मजबूरी में कम दामों पर फसल बेचने की स्थिति से राहत मिलेगी।
सरकार जल्द ही राज्यभर में खरीद केंद्र स्थापित कर इस प्रक्रिया को सुचारू रूप से लागू करेगी। लक्ष्य है कि किसानों को समय पर MSP का लाभ मिल सके और भुगतान प्रक्रिया भी पारदर्शी और तेज हो। इस फैसले के लिए राज्य सरकार ने केंद्र का आभार भी जताया है।
इस बार की सबसे बड़ी खासियत यह है कि बिहार में पहली बार मसूर की MSP पर सरकारी खरीद की जाएगी। इसके लिए नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NAFED) को जिम्मेदारी सौंपी गई है। NAFED इस रबी सीजन में लगभग 32,000 मीट्रिक टन मसूर की खरीद ₹7,000 प्रति क्विंटल की दर से करेगा।
किसानों के लिए बड़ा बदलाव: अब तक बिहार में मुख्य रूप से धान और गेहूं की ही MSP पर खरीद होती थी, लेकिन इस फैसले से दलहन और तिलहन फसलों को भी समान महत्व मिलेगा। इससे किसानों को फसल विविधीकरण के लिए प्रोत्साहन मिलेगा और उनकी आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।
FAQs:
Q1. बिहार में किस फसल की MSP पर खरीद होगी?
चना, मसूर और सरसों की MSP पर खरीद होगी।
Q2. यह MSP खरीद कब लागू होगी?
यह रबी सीजन 2026 में लागू की जाएगी।
Q3. मसूर की खरीद किस संस्था को दी गई है?
NAFED को मसूर की खरीद की जिम्मेदारी दी गई है।
Q4. मसूर की MSP दर क्या है?
लगभग ₹7,000 प्रति क्विंटल निर्धारित की गई है।
Q5. इस योजना से किसानों को क्या फायदा होगा?
किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य मिलेगा और बाजार के उतार-चढ़ाव से सुरक्षा मिलेगी।