बिहार में चाय की खेती को बढ़ावा देने के लिए चाय विकास योजना 2026-27 के तहत किसानों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इस योजना के माध्यम से राज्य के पांच जिलों में चाय का नया क्षेत्र विकसित करने की योजना है। इच्छुक किसान योजना के तहत ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। सरकार की ओर से चाय के पौध रोपण से लेकर मौजूदा चाय बागानों के प्रबंधन के लिए अलग-अलग प्रावधान किए गए हैं।
वर्ष 2026-27 में चाय विकास योजना के तहत किशनगंज, अररिया, सुपौल, पूर्णिया और कटिहार जिले में नए क्षेत्र में चाय की खेती को विस्तार देने का प्रावधान किया गया है। इन जिलों के पात्र किसान योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
नए क्षेत्र में चाय की खेती शुरू करने वाले किसानों को पौध रोपण सामग्री की खरीद स्वयं करनी होगी। यानी चाय के पौधों की रोपण सामग्री किसान को अपने स्तर से खरीदनी होगी, जिसके बाद योजना के निर्धारित नियमों के अनुसार अनुदान की राशि दी जाएगी।
नया चाय क्षेत्र लेने वाले किसानों के लिए जरूरी नियम:
योजना में एक महत्वपूर्ण प्रावधान यह भी है कि चाय के नए क्षेत्र विस्तार के लिए लाभ लेने वाले किसान अन्य हॉर्टिकल्चर अवयवों का लाभ लेने के पात्र नहीं होंगे। इसलिए आवेदन करने से पहले किसानों को योजना की पात्रता और शर्तों को ध्यान से समझ लेना चाहिए।
मौजूदा चाय बागानों के लिए भी मिलेगी सहायता:
लीफ कलेक्शन शेड पर मिलेगा अधिकतम ₹37,500 तक अनुदान:
किसानों के लिए क्या है योजना का महत्व?
FAQs:
1. बिहार चाय विकास योजना 2026-27 क्या है?
यह योजना बिहार में चाय की खेती को बढ़ावा देने और मौजूदा चाय बागानों के प्रबंधन में किसानों को सहायता देने के लिए शुरू की गई है।
2. चाय विकास योजना बिहार के तहत किन जिलों को शामिल किया गया है?
नए चाय क्षेत्र के विकास के लिए किशनगंज, अररिया, सुपौल, पूर्णिया और कटिहार जिलों को शामिल किया गया है।
3. चाय खेती अनुदान कितनी किस्तों में मिलेगा?
नए चाय क्षेत्र के विकास के लिए अनुदान 75:25 के अनुपात में दो किस्तों में दिया जाएगा।
4. लीफ कलेक्शन शेड पर कितना अनुदान मिलेगा?
पात्र किसानों को शेड की वास्तविक लागत का 50 प्रतिशत या अधिकतम ₹37,500, जो भी कम हो, अनुदान के रूप में मिलेगा।
5. दूसरी किस्त पाने के लिए क्या शर्त है?
पिछले वर्ष लगाए गए चाय के कम से कम 90 प्रतिशत पौधे जीवित रहने पर वित्तीय वर्ष 2027-28 में बची हुई 25 प्रतिशत राशि जारी की जाएगी।