By khetivyapar
पोस्टेड: 27 Sep, 2026 12:00 AM IST Updated Sun, 27 Sep 2026 09:56 AM IST
बिहार में किसानों को ऑयल पाम की खेती की ओर बढ़ाने के लिए वर्ष 2026-27 में आर्थिक सहायता दी जा रही है। यह पहल नेशनल मिशन ऑन एडीबल ऑयल-ऑयल पाम के तहत की जा रही है। योजना में किसान को सिर्फ पौधे लगाने के लिए ही सहायता नहीं मिलेगी, बल्कि पौधों के शुरुआती विकास के दौरान खेती और सिंचाई से जुड़े खर्च के लिए भी अलग-अलग प्रावधान किए गए हैं।
योजना के तहत एक हेक्टेयर जमीन में 150 ऑयल पाम पौधे लगाए जाएंगे। इसके लिए ₹29,000 प्रति हेक्टेयर की सहायता तय की गई है। वहीं, पौधों के बीच दूसरी बागवानी फसल लेने वाले किसानों के लिए ₹10,500 प्रति हेक्टेयर प्रति वर्ष और पात्र बोरवेल के लिए ₹50,000 प्रति बोरवेल तक सहायता का प्रावधान है।
एक हेक्टेयर में 150 पौधों का प्रावधान:
- ऑयल पाम की खेती शुरू करने वाले किसान को योजना के तहत निर्धारित संख्या में पौधे लगाने होंगे। प्रति हेक्टेयर 150 पौधे लगाए जाने का प्रावधान है और इसके लिए सरकार की ओर से ₹29,000 की सहायता दी जाएगी।
- किसानों को पौध खरीदने की प्रक्रिया भी योजना के तहत तय की गई है। पौध की आपूर्ति विभाग द्वारा Expression of Interest के जरिए चयनित योग्य आपूर्तिकर्ताओं से कराई जाएगी। यानी स्वीकृत क्षेत्र के लिए निर्धारित व्यवस्था के अनुसार ही Planting Material उपलब्ध कराया जाएगा।
शुरुआती वर्षों में दूसरी फसल के लिए ₹10,500:
- ऑयल पाम के पौधों को उत्पादन की स्थिति में आने में समय लगता है। इस दौरान पौधों के बीच उपलब्ध जमीन पर उपयुक्त उद्यानिक फसलें उगाई जा सकती हैं।
- इसी अवधि के लिए योजना में Management and Inputs for Intercropping During the Gestation Period नाम से अलग घटक रखा गया है। इसके तहत किसान को ₹10,500 प्रति हेक्टेयर प्रति वर्ष की सहायता मिलेगी।
- इस सहायता में निकौनी, पौधों की सुरक्षा, खाद-उर्वरक, खरपतवार नियंत्रण और इंटरक्रॉपिंग से जुड़े दूसरे खेती कार्य शामिल हैं।
इंटरक्रॉपिंग का पैसा पाने के लिए पहले पौधे लगाने होंगे:
- यहां किसानों के लिए योजना की एक जरूरी शर्त है। केवल दूसरी फसल उगाने पर इंटरक्रॉपिंग वाला अनुदान नहीं मिलेगा।
- पहले किसान को योजना के तहत स्वीकृत ऑयल पाम पौधों का अपनी जमीन पर रोपण करना होगा। Planting Material का रोपण पूरा होने के बाद ही इंटरक्रॉपिंग से जुड़े Management and Inputs का लाभ दिया जाएगा।
- यानी दोनों घटकों का लाभ लेने के लिए योजना में निर्धारित ऑयल पाम रोपण की शर्त पूरी करना जरूरी है।
बोरवेल के लिए ₹50 हजार की सहायता:
- ऑयल पाम की खेती से जुड़े किसानों के लिए सिंचाई व्यवस्था को भी योजना में शामिल किया गया है। बोरवेल लगाने के लिए ₹50,000 प्रति बोरवेल की दर से सहायता का प्रावधान किया गया है।
- वर्ष 2026-27 में 100 बोरवेल का भौतिक लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस घटक का लाभ संबंधित नियमों और स्वीकृति के आधार पर मिलेगा।
- इसलिए किसान बोरवेल के लिए आवेदन करने से पहले अपने जिले में इस घटक के लक्ष्य और पात्रता की जानकारी संबंधित विभाग से प्राप्त कर सकते हैं।
जमीन के दस्तावेज आवेदन में जरूरी:
- ऑयल पाम योजना का लाभ लेने के लिए किसान को अपनी जमीन से संबंधित वैध दस्तावेज देने होंगे। इनमें भूमि स्वामित्व प्रमाण-पत्र, निर्धारित अवधि की अद्यतन राजस्व रसीद, ऑनलाइन अद्यतन रसीद या वंशावली के आधार पर वैध भू-स्वामित्व प्रमाण-पत्र जैसे दस्तावेज शामिल हो सकते हैं।
- गैर रैयत किसान के मामले में एकरारनामा भी दस्तावेज के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है।
- अगर भूमि के रिकॉर्ड या राजस्व रसीद में आवेदक का नाम स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं है, तो संबंधित भूमि दस्तावेजों के साथ वंशावली लगाना अनिवार्य होगा।
बैंक खाते की जानकारी सही रखना जरूरी:
- योजना के तहत मिलने वाली सहायता का भुगतान DBT-In-Cash या DBT-In-Kind के माध्यम से CFMS के जरिए किया जाएगा। इसलिए आवेदन करते समय बैंक खाते से जुड़ी जानकारी सही देना जरूरी है।
- किसान को यह भी जांच लेना चाहिए कि आवेदन में दिया गया बैंक खाता DBT के लिए पंजीकृत है। बैंक संबंधी जानकारी गलत होने पर सहायता राशि के भुगतान में परेशानी हो सकती है।
योजना में कितनी सहायता मिलेगी?
ऑयल पाम योजना में अलग-अलग काम के लिए सहायता राशि निर्धारित है। इसे एक नजर में ऐसे समझ सकते हैं:
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योजना का घटक
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सहायता
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ऑयल पाम पौध रोपण
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₹29,000 प्रति हेक्टेयर
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इंटरक्रॉपिंग एवं प्रबंधन
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₹10,500 प्रति हेक्टेयर प्रति वर्ष
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बोरवेल
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₹50,000 प्रति बोरवेल
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पौधों की संख्या
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150 पौधे प्रति हेक्टेयर
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वर्ष 2026-27 बोरवेल लक्ष्य
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100 बोरवेल
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आवेदन करने से पहले किसानों को क्या देखना चाहिए?
- ऑयल पाम की खेती के लिए आवेदन करने से पहले किसान अपनी जमीन से जुड़े दस्तावेज तैयार रखें। खास तौर पर भूमि स्वामित्व, राजस्व रसीद और जरूरत पड़ने पर वंशावली या एकरारनामा की व्यवस्था पहले से कर लेना जरूरी है।
- साथ ही बैंक खाते की DBT स्थिति भी जांच लें। इंटरक्रॉपिंग सहायता लेने वाले किसानों को यह बात खास तौर पर ध्यान में रखनी होगी कि इसका लाभ ऑयल पाम के स्वीकृत पौधों का रोपण होने के बाद ही मिलेगा।
- योजना का लाभ लेने के इच्छुक किसान अपने जिले के उद्यानिकी विभाग से आवेदन की मौजूदा प्रक्रिया, उपलब्ध लक्ष्य और संबंधित घटक की शर्तों की जानकारी लेकर आगे की कार्रवाई कर सकते हैं।
FAQs:
1. बिहार में ऑयल पाम की खेती के लिए कितनी सहायता मिल रही है?
एक हेक्टेयर में ऑयल पाम पौध रोपण के लिए ₹29,000 प्रति हेक्टेयर की सहायता का प्रावधान है।
2. एक हेक्टेयर में कितने ऑयल पाम पौधे लगाए जाएंगे?
योजना के तहत एक हेक्टेयर जमीन में 150 ऑयल पाम पौधे लगाने का प्रावधान है।
3. इंटरक्रॉपिंग के लिए कितनी सहायता मिलेगी?
पौधों के बीच दूसरी उद्यानिक फसल लेने पर ₹10,500 प्रति हेक्टेयर प्रति वर्ष की सहायता का प्रावधान है।
4. क्या बोरवेल के लिए भी सहायता मिलेगी?
हां, पात्र बोरवेल के लिए ₹50,000 प्रति बोरवेल तक सहायता का प्रावधान है। वर्ष 2026-27 में 100 बोरवेल का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
5. ऑयल पाम योजना के लिए कौन से दस्तावेज जरूरी हैं?
किसान को भूमि स्वामित्व प्रमाण-पत्र, अद्यतन राजस्व रसीद और जरूरत के अनुसार वंशावली या एकरारनामा जैसे दस्तावेज देने पड़ सकते हैं। साथ ही DBT के लिए बैंक खाते की जानकारी सही होना जरूरी है।