देश में कृषि विपणन को आधुनिक और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2016 से राष्ट्रीय कृषि बाजार (e-NAM) योजना का संचालन किया जा रहा है। यह एक ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म है, जो विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की थोक कृषि मंडियों को एकीकृत कर किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराता है।
e-NAM प्लेटफॉर्म से अब तक 23 राज्यों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों की कुल 1,656 मंडियां जोड़ी जा चुकी हैं। इससे देशभर के किसानों को एक बड़े और प्रतिस्पर्धी बाजार तक पहुंच मिली है। 28 फरवरी 2026 तक इस प्लेटफॉर्म पर 1.80 करोड़ से अधिक किसान और 2.72 लाख व्यापारी पंजीकृत हो चुके हैं। इसके साथ ही 4,724 किसान उत्पादक संगठन (FPO) भी e-NAM से जुड़े हैं, जिससे सामूहिक विपणन को बढ़ावा मिला है।
₹4.82 लाख करोड़ से अधिक का कारोबार:
e-NAM के माध्यम से शुरूआत से लेकर फरवरी 2026 तक कुल 13.22 करोड़ मीट्रिक टन कृषि उपज का व्यापार हुआ है, जिसकी कुल कीमत ₹4,82,350 करोड़ से अधिक है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए कृषि व्यापार में तेजी से वृद्धि हुई है।
किसानों को बेहतर दाम और पारदर्शिता:
e-NAM प्लेटफॉर्म किसानों को ऑनलाइन बोली (बिडिंग) के माध्यम से अपनी उपज बेचने की सुविधा देता है, जिससे उन्हें अधिक खरीदारों तक पहुंच मिलती है। इससे प्रतिस्पर्धी माहौल बनता है और किसानों को उनकी फसल का बेहतर मूल्य प्राप्त होता है। इसके साथ ही बिक्री की राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाती है, जिससे पारदर्शिता और भरोसा बढ़ा है।
राजस्थान में AI और ML से गुणवत्ता जांच: वर्तमान में राजस्थान की 134 e-NAM मंडियों में कृषि उपज की गुणवत्ता जांच के लिए AI और मशीन लर्निंग आधारित मशीनों का उपयोग किया जा रहा है। इससे परीक्षण में लगने वाला समय कम हुआ है और परिणाम अधिक सटीक मिल रहे हैं। इस पहल को केंद्र सरकार द्वारा e-NAM योजना के तहत सहायता प्रदान की गई है।
मंडी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए सरकारी सहायता: e-NAM योजना के तहत सरकार राज्यों को प्रति मंडी ₹75 लाख तक की अनुदान सहायता प्रदान करती है। इस राशि का उपयोग गुणवत्ता जांच प्रयोगशालाएं, इलेक्ट्रॉनिक तौल मशीनें, कंप्यूटर, प्रिंटर, सफाई, ग्रेडिंग, पैकेजिंग सुविधाएं, सॉफ्टवेयर इंफ्रास्ट्रक्चर और कम्पोस्ट यूनिट जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत करने में किया जाता है।