देश में बागवानी क्षेत्र तेजी से कृषि विकास का एक मजबूत स्तंभ बनकर उभर रहा है। हाल के आंकड़े बताते हैं कि फल, सब्जियों, मसालों और अन्य उच्च मूल्य वाली फसलों के उत्पादन और क्षेत्रफल में लगातार वृद्धि हो रही है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वर्ष 2024-25 के अंतिम अनुमान और 2025-26 के प्रथम अग्रिम अनुमान जारी करते हुए देश में बागवानी क्षेत्र की तेज़ प्रगति को रेखांकित किया।
यह न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक है, बल्कि पोषण सुरक्षा और कृषि की स्थिरता को भी मजबूती दे रहा है। बढ़ते उत्पादन, आधुनिक तकनीकों के उपयोग और बाजार से बेहतर जुड़ाव के चलते बागवानी क्षेत्र आने वाले समय में और अधिक संभावनाओं के साथ आगे बढ़ने की दिशा में अग्रसर है।
सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023-24 में बागवानी फसलों का कुल क्षेत्रफल 290.86 लाख हेक्टेयर था, जो 2024-25 में बढ़कर 301.36 लाख हेक्टेयर हो गया। यह लगभग 10.50 लाख हेक्टेयर (3.61%) की वृद्धि दर्शाता है। उत्पादन की बात करें तो 2023-24 में 3547.44 लाख टन उत्पादन हुआ था, जो 2024-25 में बढ़कर 3707.38 लाख टन हो गया। यानी 159.94 लाख टन (4.51%) की वृद्धि दर्ज की गई। वर्ष 2025-26 के लिए अनुमान है कि कुल उत्पादन 3708.46 लाख टन तक पहुंच जाएगा, जो निरंतर प्रगति का संकेत है।
फल उत्पादन में वर्ष 2024-25 के दौरान 4.13% की वृद्धि दर्ज की गई, जो 1176.49 लाख टन तक पहुंच गया। इस वृद्धि में केला, आम, संतरा, पपीता, अमरूद और तरबूज जैसी फसलों का अहम योगदान रहा। वहीं सब्जियों का उत्पादन 5.11% बढ़कर 2177.97 लाख टन हो गया। इसमें प्याज, आलू, हरी मिर्च, गोभी, बैंगन, भिंडी, मटर, कद्दू और खीरा जैसी फसलों की प्रमुख भूमिका रही। 2025-26 में भी फल और सब्जियों के उत्पादन में सकारात्मक रुझान बने रहने की संभावना जताई गई है।
रोजमर्रा की जरूरत वाली फसलों में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। प्याज का क्षेत्रफल 15.41 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 19.68 लाख हेक्टेयर हो गया, जबकि उत्पादन 307.67 लाख टन तक पहुंच गया। आलू का उत्पादन 585.71 लाख टन आंका गया है, जबकि टमाटर का उत्पादन 2025-26 में बढ़कर 227.02 लाख टन तक पहुंचने का अनुमान है। यह किसानों की आय और उपभोक्ताओं की उपलब्धता दोनों के लिए सकारात्मक संकेत है।
उच्च मूल्य वाली फसलों में भी तेज़ वृद्धि दर्ज की गई है। औषधीय और सुगंधित पौधों का क्षेत्रफल 9.83 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जबकि उत्पादन 9.01 लाख टन रहा। फूलों की खेती में 25% से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है और उत्पादन 42.65 लाख टन तक पहुंच गया है। मसालों का क्षेत्रफल 50.93 लाख हेक्टेयर और उत्पादन 129.93 लाख टन रहा, जिसमें जीरा, अदरक, लहसुन और हल्दी का योगदान प्रमुख है।
प्लांटेशन फसलों और भविष्य की दिशा: प्लांटेशन फसलों के उत्पादन में कुछ गिरावट के बाद 2025-26 में सुधार की उम्मीद है। अनुमान है कि क्षेत्रफल और उत्पादन दोनों में क्रमशः 1.61% और 5.82% की वृद्धि होगी। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार तकनीक, सिंचाई, वैल्यू चेन, प्रोसेसिंग, कोल्ड स्टोरेज और बाजार ढांचे को मजबूत कर रही है। इन प्रयासों का सीधा लाभ किसानों को मिल रहा है और कृषि को अधिक लाभकारी एवं टिकाऊ बनाया जा रहा है।
FAQs – बागवानी क्षेत्र:
Q1: बागवानी क्षेत्र में निवेश क्यों महत्वपूर्ण है?
A: यह किसानों की आय बढ़ाने, पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने और कृषि की स्थिरता के लिए आवश्यक है।
Q2: 2025-26 में फल और सब्जियों का उत्पादन कितना होने का अनुमान है?
A: अनुमान है कि उत्पादन 3708.46 लाख टन तक पहुंच जाएगा।
Q3: रोजमर्रा की फसलों में कौन-कौन सी फसलें शामिल हैं?
A: प्याज, आलू, टमाटर, हरी मिर्च, गोभी, बैंगन, भिंडी, मटर, कद्दू और खीरा।
Q4: मसाले और औषधीय फसलों का क्षेत्रफल कितना है?
A: औषधीय पौधों का क्षेत्रफल 9.83 लाख हेक्टेयर और मसालों का 50.93 लाख हेक्टेयर है।
Q5: Khetivyapar के अनुसार बागवानी क्षेत्र की भविष्य की दिशा क्या है?
A: तकनीक, सिंचाई, वैल्यू चेन और बाजार सुधार के जरिए बागवानी क्षेत्र किसानों के लिए अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनेगा।