प्रदेश में गेहूँ खरीदी का कार्य तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और किसानों को इसका सीधा लाभ मिल रहा है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर अब तक 1 लाख 45 हजार 71 किसानों से 63 लाख 27 हजार 410 क्विंटल गेहूँ की खरीदी की जा चुकी है। इसके एवज में किसानों के बैंक खातों में 920 करोड़ 7 लाख रुपये का भुगतान भी किया जा चुका है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में मजबूती आई है।
सरकार ने किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए खरीदी प्रक्रिया को और सरल बनाया है। अब तक 5 लाख 36 हजार 367 किसानों ने 2 करोड़ 25 लाख 96 हजार 450 क्विंटल गेहूँ बेचने के लिए स्लॉट बुक किए हैं। उपार्जन केंद्रों पर तौल कांटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 कर दी गई है, जिससे किसानों को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा और समय पर तुलाई सुनिश्चित हो सकेगी। प्रदेशभर में 3171 उपार्जन केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां कार्यालयीन दिनों में खरीदी जारी है।
साथ ही, जिन खसरों का सेटेलाइट ई-मेल में मिलान नहीं हो पाया है, उन्हें छोड़कर शेष खसरों के लिए स्लॉट बुकिंग की सुविधा भी दी गई है, जिससे अधिक किसानों को लाभ मिल सके।
खरीदी प्रक्रिया को तेज़ करने के लिए सरकार ने प्रति उपार्जन केंद्र प्रतिदिन स्लॉट बुकिंग की सीमा 1000 क्विंटल से बढ़ाकर 1500 क्विंटल कर दी है। इससे अधिक किसानों से कम समय में उपार्जन संभव हो सकेगा और भीड़-भाड़ की समस्या भी कम होगी।
उपार्जन केंद्रों पर किसानों के लिए बेहतर सुविधाएं:
किसानों की सुविधा के लिए उपार्जन केंद्रों पर सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। यहां छायादार बैठने की व्यवस्था, स्वच्छ पेयजल, बारदाने, तौल कांटे, सिलाई मशीन, कंप्यूटर, इंटरनेट और गुणवत्ता जांच उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। इसके अलावा, गेहूँ की साफ-सफाई के लिए पंखे और छनने जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं, जिससे किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
MSP के साथ बोनस का भी लाभ:
रबी विपणन वर्ष 2026-27 के लिए सरकार किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल MSP के साथ 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस दे रही है। इस तरह किसानों को कुल 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूँ का भुगतान किया जा रहा है। उपार्जित गेहूँ के भंडारण के लिए जूट और पीपी/एचडीपी बैग की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। अब तक 51 लाख 75 हजार 370 क्विंटल गेहूँ का परिवहन भी किया जा चुका है।
रिकॉर्ड पंजीयन और बढ़ा लक्ष्य:
इस वर्ष प्रदेश में गेहूँ उपार्जन के लिए रिकॉर्ड 19 लाख 4 हजार किसानों ने पंजीयन कराया है, जो पिछले वर्ष से 3 लाख 60 हजार अधिक है। पिछले वर्ष जहां लगभग 77 लाख मीट्रिक टन गेहूँ की खरीदी हुई थी, वहीं इस वर्ष 78 लाख मीट्रिक टन उपार्जन का लक्ष्य रखा गया है।
किसानों को मिल रहा सीधा फायदा:
सरकार के इन प्रयासों से किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य समय पर मिल रहा है। बेहतर व्यवस्थाओं, बढ़ी हुई क्षमता और पारदर्शी भुगतान प्रणाली के चलते गेहूँ खरीदी प्रक्रिया अधिक प्रभावी और किसान हितैषी बन रही है।
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