प्रदेश में किसानों के कल्याण, समृद्धि और खुशहाली को केंद्र में रखकर राज्य सरकार लगातार अहम फैसले ले रही है। किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंषाना ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में वर्ष 2026 को ‘कृषक कल्याण वर्ष’ के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। सरकार का फोकस किसानों की आय बढ़ाने, लागत घटाने और खेती को टिकाऊ बनाने पर है।
सरकार ने गेहूं उपार्जन के लिए ₹2585 प्रति क्विंटल MSP तय किया है, जिस पर ₹40 बोनस जोड़कर किसानों को कुल ₹2625 प्रति क्विंटल का भुगतान मिलेगा। इसके साथ ही, सरसों उत्पादक किसानों के लिए भावांतर भुगतान योजना लागू की गई है, जिसमें ₹5950 प्रति क्विंटल MSP और बाजार मूल्य के अंतर की राशि सीधे किसानों के बैंक खाते में दी जाएगी। उड़द उत्पादक किसानों के लिए भी बड़ा फैसला लिया गया है सरकार ने ₹600 प्रति क्विंटल बोनस की घोषणा की है। इससे उड़द का कुल लाभ बढ़कर ₹8400 प्रति क्विंटल तक पहुंच जाएगा, जो किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण राहत है।
पर्यावरण संरक्षण और मिट्टी की सेहत को ध्यान में रखते हुए नरवाई (पराली) जलाने पर सख्त रोक लगाई गई है। धारा 163 के तहत उल्लंघन करने पर ₹2500 से ₹15,000 तक जुर्माना लगाया जा सकता है।
सरकार किसानों को वैकल्पिक समाधान देने के लिए हैप्पी सीडर और सुपर सीडर जैसे पराली प्रबंधन यंत्रों पर अनुदान दे रही है। साथ ही, जागरूकता अभियानों के जरिए किसानों को पराली न जलाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
प्रदेश में सिंचाई का रकबा बढ़कर करीब 55 लाख हेक्टेयर हो चुका है, जिसे बढ़ाकर 100 लाख हेक्टेयर करने का लक्ष्य रखा गया है। पीएम कुसुम योजना के तहत किसानों को सोलर पंप लगाने पर 90% तक सब्सिडी दी जा रही है, जिससे सिंचाई आसान और सस्ती होगी तथा बिजली पर निर्भरता भी कम होगी।
राज्य सरकार ने दुग्ध उत्पादन को 9% से बढ़ाकर 20% तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए मुख्यमंत्री डेयरी प्लस कार्यक्रम के माध्यम से पशुपालन और डेयरी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस पहल से किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर मिलेंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
तकनीक, प्रोसेसिंग और प्राकृतिक खेती पर जोर:
कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से किसानों को आधुनिक तकनीक, उन्नत बीज और कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। फसलों की निगरानी के लिए ड्रोन और सैटेलाइट सर्वे का उपयोग किया जा रहा है। इसके अलावा, फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स के विस्तार, मोटे अनाज (मिलेट्स) के उत्पादन को बढ़ावा और जैविक व प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
किसानों की समृद्धि की दिशा में मजबूत कदम:
इन सभी पहलों से स्पष्ट है कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने, खेती को टिकाऊ बनाने और आधुनिक तकनीकों से जोड़ने के लिए ठोस रणनीति पर काम कर रही है। MSP, बोनस, सिंचाई, डेयरी और तकनीक के समन्वय से प्रदेश के किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में मजबूत कदम उठाए जा रहे हैं।
FAQs:
1. गेहूं का MSP और बोनस कितना है?
गेहूं का MSP ₹2585 और ₹40 बोनस मिलाकर ₹2625 प्रति क्विंटल है।
2. सरसों किसानों को क्या फायदा मिल रहा है?
सरसों पर ₹5950 MSP और भावांतर योजना का लाभ मिलता है।
3. उड़द पर कितना बोनस दिया जा रहा है?
उड़द पर ₹600 प्रति क्विंटल बोनस दिया जा रहा है।
4. पराली जलाने पर क्या सजा है?
₹2500 से ₹15,000 तक जुर्माना लगाया जा सकता है।
5. सोलर पंप पर कितनी सब्सिडी मिलती है?
PM कुसुम योजना के तहत 90% तक सब्सिडी मिलती है।