• होम
  • आम की फसल पर ‘रेड बैंडेड बोरर’ का अटैक! 90% तक नुकसान का खतर...

आम की फसल पर ‘रेड बैंडेड बोरर’ का अटैक! 90% तक नुकसान का खतरा, जानें बचाव के उपाय

आम में रेड बैंडेड बोरर नियंत्रण
आम में रेड बैंडेड बोरर नियंत्रण

भारत में आम की बागवानी का महत्वपूर्ण स्थान है, लेकिन इन दिनों ‘रेड बैंडेड बोरर’ नामक कीट किसानों के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। यह कीट आम के फलों में छेद कर अंदर घुस जाता है और गूदा व गुठली को नुकसान पहुंचाता है, जिससे फल समय से पहले गिर जाते हैं और उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है।

तेजी से फैल रहा है खतरनाक कीट:

देश में आम का रकबा सबसे अधिक है, लेकिन बदलते मौसम और बढ़ती नमी के कारण नए कीटों का प्रकोप भी बढ़ा है। पिछले कुछ वर्षों में ‘रेड बैंडेड कैटरपिलर’ का हमला बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में तेजी से बढ़ा है। कई क्षेत्रों में 80 से 90 प्रतिशत तक फसल को नुकसान होने की रिपोर्ट सामने आई है।

विशेषज्ञों के अनुसार, जब फल मटर या छोटे कंचे के आकार का होता है, तभी यह कीट सबसे ज्यादा सक्रिय रहता है। ऐसे में समय पर पहचान और नियंत्रण बेहद जरूरी है।

कैसे करें पहचान?

  • इस कीट की पहचान सावधानी से की जा सकती है:
  • मादा पतंगा आम के डंठल पर छोटे अंडे देती है 
  • अंडों का रंग पहले सफेद और बाद में गहरा लाल हो जाता है 
  • लार्वा (इल्ली) के शरीर पर लाल और सफेद धारियां होती हैं 

यदि पेड़ के नीचे समय से पहले गिरे हुए फल दिखें या फलों में छोटे छेद और सड़न की गंध आए, तो यह इस कीट के हमले का संकेत है। इसकी 3–4 पीढ़ियां एक ही सीजन में तैयार हो जाती हैं, जिससे नुकसान तेजी से बढ़ता है।

बचाव के लिए अपनाएं ये उपाय:

  • विशेषज्ञों के अनुसार, इस कीट से बचाव के लिए साफ-सफाई सबसे प्रभावी तरीका है:
  • गिरे हुए संक्रमित फलों को तुरंत इकट्ठा कर नष्ट करें या जमीन में गहरा दबा दें 
  • बाग में सूखी टहनियां और झाड़ियां हटाकर वायु संचार बेहतर बनाएं 

छोटे फलों को पेपर या पॉली बैग से कवर करें:

जैविक उपायों में नीम आधारित दवाएं (जैसे एजाडिरैक्टिन) और लाभकारी कीटों का उपयोग काफी कारगर माना जाता है। इससे पर्यावरण सुरक्षित रहता है और फलों की गुणवत्ता भी बनी रहती है।

रासायनिक नियंत्रण कब और कैसे करें?

  • जब कीट का प्रकोप अधिक हो जाए, तो रासायनिक नियंत्रण जरूरी हो जाता है।
  • पहला छिड़काव फल के मटर के आकार का होने पर करें 
  • ‘क्लोरेंट्रानिलिप्रोल’ 0.4 मिली/लीटर या ‘इमामेक्टिन बेंजोएट’ 0.4 ग्राम/लीटर का उपयोग किया जा सकता है 

छिड़काव हमेशा शाम के समय करें:

जरूरत पड़ने पर 12–15 दिन बाद दोबारा छिड़काव करें 
किसी भी दवा का उपयोग करने से पहले कृषि विशेषज्ञ या नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह लेना बेहतर रहता है।

एकीकृत प्रबंधन ही है स्थायी समाधान: ‘रेड बैंडेड बोरर’ से बचाव के लिए एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM) अपनाना सबसे प्रभावी तरीका है। इसमें साफ-सफाई, जैविक उपाय और रासायनिक नियंत्रण का संतुलित उपयोग शामिल है। मौसम में बदलाव, खासकर नमी और बादल, इस कीट के प्रसार को बढ़ाते हैं, इसलिए किसानों को नियमित निगरानी बनाए रखना जरूरी है।

FAQs:

Q1. रेड बैंडेड बोरर क्या है?
यह आम का एक खतरनाक कीट है जो फलों को अंदर से नुकसान पहुंचाता है।

Q2. रेड बैंडेड बोरर कब सक्रिय होता है?
जब फल मटर के आकार का होता है, तब यह सबसे ज्यादा सक्रिय रहता है।

Q3. इसकी पहचान कैसे करें?
फलों में छेद, सड़न की गंध और गिरे हुए फल इसके मुख्य संकेत हैं।

Q4. इससे बचाव कैसे करें?
साफ-सफाई, नीम आधारित दवाएं और समय पर स्प्रे सबसे प्रभावी उपाय हैं।

Q5. कौन सी दवा उपयोग करें?
क्लोरेंट्रानिलिप्रोल और इमामेक्टिन बेंजोएट का उपयोग किया जा सकता है (विशेषज्ञ की सलाह से)।

khetivyapar.com अब whatsapp चैनल पर भी उपलब्ध है। आज ही फॉलो करें और पाएं महत्वपूर्ण जानकारी WhatsApp चैनल से जुड़ें