मध्यप्रदेश सहित उत्तर भारत के कई राज्यों में मौसम एक बार फिर बड़ा बदलाव दिखाने जा रहा है। जहां एक ओर गर्मी की शुरुआत हो चुकी है, वहीं दूसरी ओर पश्चिमी विक्षोभ के असर से बारिश, आंधी और तेज हवाओं का नया दौर सक्रिय होने की संभावना है। India Meteorological Department के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक मार्च के अंतिम दिनों में मौसम अस्थिर बना रहेगा, जिससे किसानों के साथ-साथ आम जनजीवन पर भी असर पड़ सकता है।
इससे पहले भी मार्च में दो बार मौसम बदल चुका है। एक दौर लगातार चार दिनों तक चला, जिसमें 45 से अधिक जिलों में बारिश और तेज हवाएं चलीं, जबकि 17 जिलों में ओलावृष्टि दर्ज की गई। इस असामान्य मौसम ने गेहूं, पपीता और केले जैसी फसलों को नुकसान पहुंचाया है। अब तीसरा दौर 27 मार्च से शुरू होने की संभावना है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ सकती है।
मौसम विभाग ने संकेत दिए हैं कि 28 मार्च की रात से एक और पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो सकता है, जो उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित करेगा। इसके असर से अप्रैल की शुरुआत भी आंधी और बारिश के साथ हो सकती है, यानी गर्मी की रफ्तार फिलहाल थोड़ी धीमी रह सकती है।
हालांकि मार्च के अंत में राहत मिल रही है, लेकिन आने वाले महीनों में गर्मी तीखी रहने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार अप्रैल और मई में प्रदेश के कई हिस्सों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार जा सकता है। ग्वालियर, चंबल, जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग सबसे ज्यादा प्रभावित रह सकते हैं, जबकि भोपाल, इंदौर, उज्जैन और नर्मदापुरम में भी तेज गर्मी पड़ेगी।
पिछले 10 वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो मध्यप्रदेश में मार्च के दौरान ठंडी रातें, गर्म दिन और बीच-बीच में बारिश का ट्रेंड देखने को मिलता है। इस साल भी कुछ ऐसा ही पैटर्न देखने को मिल रहा है। भोपाल, इंदौर और उज्जैन में पहले ही बारिश हो चुकी है, जबकि रात का तापमान अभी भी स्थिर बना हुआ है।
उत्तर प्रदेश में भी बदलेगा मौसम का मिजाज:
उत्तर प्रदेश में भी मौसम एक बार फिर बदलने वाला है। दो सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से 31 मार्च तक बारिश और तेज हवाओं का दौर जारी रहने की संभावना है। इस दौरान 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं, जिससे दिन के तापमान में गिरावट आएगी और मौसम में ठंडक बढ़ेगी।
मौसम विभाग के अनुसार 27 मार्च को पूर्वी और पश्चिमी यूपी दोनों हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। इस दौरान मेघगर्जन और वज्रपात को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है। वहीं 28 मार्च को मौसम शुष्क रहने के आसार हैं, लेकिन 29 मार्च को एक और सिस्टम के असर से पश्चिमी यूपी के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश संभव है।
राजस्थान में भी एक्टिव होंगे दो पश्चिमी विक्षोभ:
राजस्थान में 26 से 31 मार्च के बीच दो नए पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना है। हालांकि अगले 2 से 3 दिन मौसम मुख्यतः शुष्क रहेगा, लेकिन 26 और 27 मार्च को सीमावर्ती क्षेत्रों और शेखावाटी में कहीं-कहीं हल्की बारिश और मेघगर्जन हो सकती है। Meteorological Centre Jaipur ने किसानों को सलाह दी है कि वे पकी हुई फसलों और खुले में रखे अनाज को सुरक्षित स्थान पर रखें, ताकि आंधी और बारिश से नुकसान से बचा जा सके।
FAQs:
1. पश्चिमी विक्षोभ क्या है?
पश्चिमी विक्षोभ एक मौसमीय प्रणाली है जो पश्चिमी भारत से उत्तर भारत तक बारिश, आंधी और तेज हवाओं का कारण बनती है।
2. मार्च में मौसम अस्थिर क्यों होता है?
मार्च में ठंडी रातें और गर्म दिन के बीच अंतर होता है, जिससे मौसम अस्थिर हो जाता है।
3. किसान कैसे अपनी फसल की सुरक्षा कर सकते हैं?
फसल को ताजा बारिश और तेज हवाओं से बचाने के लिए उसे सुरक्षित स्थान पर रखें और जरूरत पड़ने पर नकली आवरण का उपयोग करें।
4. अप्रैल-मई में गर्मी कितनी बढ़ सकती है?
उत्तर भारत में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना है।
5. Khetivyapar किसानों के लिए क्या सलाह देता है?
Khetivyapar सुझाव देता है कि मौसम अपडेट को नियमित देखें और अपने अनाज और फसल की सुरक्षा सुनिश्चित करें।