महाराष्ट्र सरकार ने खरीफ सीजन 2026 से पहले किसानों को बड़ी राहत देने वाले कई अहम फैसलों की घोषणा की है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने खरीफ तैयारियों की समीक्षा बैठक के बाद फसल ऋण, कर्जमाफी, कमजोर मॉनसून और डिजिटल खेती से जुड़ी योजनाओं पर विस्तृत जानकारी साझा की। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब किसानों को फसल ऋण लेने के लिए CIBIL स्कोर की बाधा का सामना नहीं करना पड़ेगा। साथ ही राज्य सरकार जल्द ही कृषि कर्जमाफी योजना लागू करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने सभी बैंकों को निर्देश जारी किए हैं कि किसानों को केवल खराब CIBIL स्कोर के आधार पर फसल ऋण देने से इनकार न किया जाए। उन्होंने बताया कि Reserve Bank of India ने भी स्पष्ट किया है कि फसल ऋण को क्रेडिट स्कोर से जोड़ना उचित नहीं है। सरकार का उद्देश्य है कि खरीफ सीजन के दौरान किसानों को समय पर ऋण मिले ताकि बुवाई और खेती का काम प्रभावित न हो।
बैठक में कृषि ऋण और किसान कर्जमाफी को लेकर भी विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार द्वारा घोषित कृषि लोन माफी योजना पर तेजी से काम किया जा रहा है। कैबिनेट स्तर पर योजना को लेकर चर्चा पूरी हो चुकी है और जिलों से आवश्यक आंकड़े मिलते ही इसे 30 जून से पहले लागू करने का प्रयास किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इस फैसले से लाखों किसानों को आर्थिक राहत मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि महाराष्ट्र में खरीफ फसलों का कुल रकबा लगभग 152 लाख हेक्टेयर है, जिसमें सोयाबीन और कपास की हिस्सेदारी करीब 88 लाख हेक्टेयर है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस वर्ष मॉनसून सामान्य से कमजोर रह सकता है। अनुमान के अनुसार राज्य में औसत वर्षा का लगभग 88 प्रतिशत ही बारिश होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि पश्चिम विदर्भ, मराठवाड़ा और उत्तर महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में कम बारिश और लंबे ड्राई स्पेल की स्थिति बन सकती है, जिससे फसलों पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
संभावित सूखे जैसी स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने जल संरक्षण कार्यों को तेज करने के निर्देश दिए हैं। “जलयुक्त शिवार योजना” के तहत वर्षा जल संग्रहण और सुरक्षात्मक सिंचाई व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा। जिला प्रशासन को आकस्मिक कृषि योजनाएं तैयार करने और सूखा सहनशील बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है। सरकार के अनुसार राज्य में सोयाबीन, कपास, मक्का, धान, तुअर और बाजरा जैसी प्रमुख खरीफ फसलों के पर्याप्त बीज उपलब्ध हैं और प्रमाणित बीजों की सप्लाई भी सुनिश्चित की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि किसानों को उर्वरक खरीदते समय जबरन अन्य उत्पाद लेने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा। यदि कोई किसान केवल DAP या यूरिया खरीदना चाहता है, तो उसे अतिरिक्त सामान खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। सरकार ने इस मामले में सख्त कार्रवाई करते हुए नियमों का उल्लंघन करने वाले 400 से अधिक उर्वरक विक्रेताओं के लाइसेंस निलंबित या रद्द किए हैं।
AI आधारित स्मार्ट खेती को मिलेगा बढ़ावा:
बैठक के दौरान राज्य सरकार ने कई डिजिटल कृषि पहलों की शुरुआत भी की। “महाविस्तार 2.0” ऐप के जरिए किसानों को AI तकनीक की मदद से स्थानीय भाषा में मौसम पूर्वानुमान, फसल सलाह, कीट नियंत्रण और बाजार भाव की जानकारी मिलेगी। इसके अलावा “क्रॉपसैप” प्लेटफॉर्म पर किसान अपनी फसल की तस्वीर अपलोड कर सकेंगे, जिसके आधार पर उन्हें रोग, कीट हमले और उपचार से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।
डिजिटल क्रॉप सर्वे और QR ट्रेसबिलिटी सिस्टम लागू:
राज्य सरकार ने डिजिटल क्रॉप सर्वे सिस्टम भी शुरू किया है, जिसके जरिए किसान मोबाइल फोन से अपनी फसल का डेटा सीधे अपलोड कर सकेंगे। सरकार का मानना है कि इससे फसल बीमा और क्लेम प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सटीक बनेगी। साथ ही QR कोड आधारित ट्रेसबिलिटी सिस्टम भी लागू किया जा रहा है, जिससे खरीदार यह जान सकेंगे कि कृषि उत्पाद किस गांव और किस खेत में तैयार हुआ है। इससे कृषि उत्पादों की विश्वसनीयता बढ़ने के साथ किसानों को बेहतर बाजार मूल्य मिलने की संभावना भी मजबूत होगी।
FAQs:
1. क्या अब बिना CIBIL स्कोर के फसल ऋण मिलेगा?
हाँ, महाराष्ट्र सरकार ने बैंकों को निर्देश दिए हैं कि किसानों को खराब CIBIL स्कोर के आधार पर फसल ऋण देने से मना न किया जाए।
2. किसान कर्जमाफी योजना कब लागू हो सकती है?
सरकार इसे 30 जून 2026 से पहले लागू करने का प्रयास कर रही है।
3. महाराष्ट्र में मॉनसून को लेकर क्या अनुमान है?
इस साल राज्य में सामान्य से कमजोर मॉनसून और करीब 88 प्रतिशत बारिश होने का अनुमान है।
4. महाविस्तार 2.0 ऐप किसानों को क्या सुविधा देगा?
इस ऐप के जरिए किसानों को AI आधारित मौसम अपडेट, फसल सलाह, कीट नियंत्रण और बाजार भाव की जानकारी मिलेगी।
5. QR ट्रेसबिलिटी सिस्टम क्या है?
यह सिस्टम कृषि उत्पाद की जानकारी जैसे गांव और खेत की पहचान QR कोड के जरिए उपलब्ध कराएगा, जिससे किसानों को बेहतर बाजार मूल्य मिलने में मदद मिलेगी।