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मुंबई समिट: अब AI से होगी खेती, डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया प्लान

कृषि में AI तकनीक
कृषि में AI तकनीक

मुंबई में आयोजित वैश्विक कृषि-एआई सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत की अगली कृषि क्रांति का आधार कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि आने वाले वर्षों में कृषि नीति, शोध और निवेश संरचना का मुख्य स्तंभ एआई तकनीक बनने जा रही है, क्योंकि यह खेती से जुड़ी पुरानी संरचनात्मक समस्याओं जैसे अनिश्चित मौसम, जानकारी की कमी और बिखरे बाजार का बड़े स्तर पर समाधान दे सकती है।

एआई से 10% बढ़ोतरी, गरीबी उन्मूलन में ऐतिहासिक मौका:

मंत्री ने बताया कि यदि वैश्विक दक्षिण के लगभग 60 करोड़ किसानों की उत्पादकता में केवल 10% वृद्धि भी होती है, तो यह सदी का सबसे बड़ा गरीबी-उन्मूलन अवसर साबित हो सकता है। भारत के 14 करोड़ कृषि जोतों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि यदि एआई आधारित सलाह से हर किसान सालाना ₹5,000 की बचत करे, तो कुल मिलाकर लगभग ₹70,000 करोड़ का अतिरिक्त मूल्य सृजित हो सकता है।

एआई से किसानों को मिलेगी स्मार्ट सलाह:

सरकार कृषि क्षेत्र को पारंपरिक नहीं बल्कि रणनीतिक सेक्टर के रूप में विकसित करने पर जोर दे रही है। इसी दिशा में बड़े पैमाने पर कंप्यूटिंग क्षमता, डाटा सेट और स्टार्टअप इकोसिस्टम विकसित किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि देश में बहुभाषी एआई मॉडल विकसित किए जा रहे हैं, जो किसानों को उनकी स्थानीय भाषा में सलाह देने में सक्षम होंगे चाहे वह मराठी हो, भोजपुरी या कन्नड़।

ओपन एआई फ्रेमवर्क से जुड़ेगा कृषि शोध:

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग एक खुला और इंटरऑपरेबल एआई ढांचा विकसित कर रहा है, ताकि देश में कहीं भी विकसित कृषि-एआई समाधान राष्ट्रीय प्रणाली से जुड़ सकें। वहीं अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन, IITs, IISc और ICAR जैसे संस्थानों के सहयोग से डीप-टेक और एआई शोध को बढ़ावा दिया जा रहा है।

सैटेलाइट, ड्रोन और क्लाइमेट इंटेलिजेंस का उपयोग:

सरकार के अनुसार ड्रोन और सैटेलाइट मैपिंग से भूमि और मिट्टी का सत्यापित डाटा मिल रहा है, जिससे किसानों को सटीक निर्णय लेने में मदद मिल रही है। मौसम विज्ञान और एआई के एकीकरण से प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली विकसित की जा रही है, ताकि किसान जोखिम से घबराने के बजाय पहले से योजना बना सकें। साथ ही जैव-प्रौद्योगिकी के जरिए रोग-प्रतिरोधी और जलवायु-सहिष्णु फसल किस्में विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है।

महाराष्ट्र मॉडल से राष्ट्रीय एग्री-एआई नेटवर्क की तैयारी:

महाराष्ट्र की एग्री-एआई नीति का उदाहरण देते हुए कहा कि केंद्र सरकार ऐसे राज्य स्तरीय प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार देने की दिशा में काम करेगी। भविष्य में एक राष्ट्रीय एग्री-एआई रिसर्च नेटवर्क बनाने की योजना है, जिसमें ICRISAT सहित देश-विदेश के संस्थान मिलकर भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप फसल, मिट्टी और जलवायु डाटा तैयार करेंगे।

FAQs:

1. कृषि-एआई समाधान किसानों को कैसे लाभ देंगे?
एआई आधारित सलाह से उत्पादकता बढ़ेगी, लागत घटेगी और जोखिम प्रबंधन बेहतर होगा।

2. ओपन एआई फ्रेमवर्क क्या है?
यह एक इंटरऑपरेबल ढांचा है, जिससे विभिन्न कृषि शोध और एआई मॉडल राष्ट्रीय प्रणाली से जुड़ सकेंगे।

3. ड्रोन और सैटेलाइट मैपिंग का क्या फायदा है?
इनसे भूमि, मिट्टी और फसल की सटीक जानकारी मिलती है, जिससे सही निर्णय लिया जा सकता है।

4. क्या एआई मॉडल स्थानीय भाषा में उपलब्ध होंगे?
हाँ, बहुभाषी एआई मॉडल किसानों को उनकी मातृभाषा में स्मार्ट सलाह देंगे।

5. राष्ट्रीय एग्री-एआई रिसर्च नेटवर्क का उद्देश्य क्या है?
भारतीय जलवायु और मिट्टी के अनुसार उन्नत कृषि-एआई समाधान विकसित करना।

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